प्रदेश में सड़क दुर्घटनाओं की जांच के लिए जिला स्तर पर कमेटी गठित की जाएगी। कमेटी की जांच रिपोर्ट के आधार पर भी दुर्घटना में विधिक कार्यवाही की जाएगी। योगी कैबिनेट ने मंगलवार को उत्तर प्रदेश सड़क दुर्घटना जांच योजना 2023 का प्रस्ताव मंजूर किया है।
परिवहन राज्यमंत्री दयाशंकर सिंह ने कैबिनेट निर्णय की जानकारी देते हुए बताया कि वर्तमान में सड़क दुर्घटनाओं के विश्लेषण के लिए कोई मानीकृत प्रक्रिया नहीं हैँ। इससे दुर्घटना के पीछे मानवीय भूल, सड़क इंजीनियरिंग, वाहन फिटनेस सहित अन्य कारणों का आकलन नहीं होता है।
उन्होंने बताया कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश के तहत गंभीर सड़क दुर्घटनाओं की जांच एक समिति से कराई जाएगी। इससे सड़क दुर्घटना के कारणों का वैज्ञानिक विश्लेषण किया जा सकेगा। समिति में परिवहन, गृह, लोक निर्माण विभाग के अधिकारियों के साथ स्वयं सेवी संस्थाओं के प्रतिनिधि भी शामिल होंगे। समिति जांच में विशेषज्ञों की मदद भी ले सकेगी। इससे गंभीर सड़क दुर्घटनाओं का फोरेंसिक विश्लेषण भी किया जा सकेगा। इससे चालक की दक्षता, सड़क इंजीनियरिंग, वाहन फिटनेस और पर्यावरणीय कारणों का पता चल सकेगा।
परिवहन आयुक्त सीबी सिंह ने बताया कि सड़क दुर्घटना जांच योजना के तहत गठित कमेटी उन्हीं दुर्घटना की जांच करेगी जिनमें तीन से अधिक लोगों की मृत्यु होगी। तीन या तीन से कम लोगों की मृत्यु होने पर जांच की वर्तमान व्यवस्था लागू रहेगी। वर्तमान में पुलिस के स्तर से ही जांच की जाती है।
मुआवजा मिलने पर आसानी होगी
सीबी सिंह ने बताया कि सड़क दुर्घटना में मृत्यु होने पर होने पर पांच लाख रुपये मुआवजा दिया जाता है। इसके अतिरिक्त मृतक यात्री या वाहन चालक को निजी बीमा, वाहन इंश्योरेंस से भी सहायता राशि मिलती है। जांच कमेटी की रिपोर्ट के बाद मुआवजा मिलने में आसानी होगी।
प्रदेश के 1.89 लाख 014 आंगनबाड़ी केन्द्रों पर पंजीकृत 1.27 करोड़ से अधिक 3 से 6 साल तक की उम्र वाले बच्चों को सरकार फिर से गरम भोजन खिलाएगी। प्रदेश में सात साल से बंद पड़ी 'गरम भोजन योजना' (हॉटकुक्ड मील स्कीम) को शुरू करने के प्रस्ताव को मंगलवार को कैबिनेट ने मंजूरी दे दी है। योजना के प्रारूप में आंशिक बदलाव करते हुए अब इस योजना का क्रियान्वयन प्राथमिक विद्यालयों में चल रहे मध्यान्ह भोजन योजना (मिड डे मील) की तर्ज पर किया जाएगा।
बता दें कि अखिलेश सरकार ने इस योजना को 2016 में बंद कर दिया था । अब प्रदेश सरकार इस योजना को फिर से शुरू करने का फैसला किया है। बाल विकास सेवा एवं पुष्टाहार विभाग द्वारा संचालित होने वाली इस योजना के तहत साल में कम से कम 300 दिन लाभार्थियों को गरम भोजन खिलाया जाएगा। । एक दिन में एक बच्चे को प्रतिदिन कम से कम 300 कैलोरी व 7 से 8 ग्राम प्रोटीन देना अनिवार्य होगा।
योजना के तहत प्राथमिक विद्यालयों स्थित आंगनबाड़ी केन्द्रों पर आने वाले 3 से 6 साल की उम्र वाले बच्चों को भी गरम भोजन खिलाया जाएगा। योजना पर होने वाले खर्च की धनराशि का 50-50 प्रतिशत राशि केन्द्र और राज्य सरकरा मिलकर वहन करेंगे।
टास्क फोर्स करेगी निगरानी
योजना के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए राज्य व जिला स्तर पर टास्क फोर्स का भी गठन किया जाएगा । यह टास्क फोर्स योजना के तहत बच्चों को खिलाया जाने वाले गर्म भोजन की गुणवत्ता, मेन्यू और मात्रा आदि पर नजर रखेगी । साथ ही योजना के लाभार्थी बच्चों के पोषण में हो रहे सुधार की प्रगति की रिपोर्ट भी तैयार कराएगी।