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मोदी के गठबंधन को 'सराब' बताने पर छिड़ा सियासी संग्राम, अखिलेश बोले- टेली प्रॉम्पटर ने खोली पोल

Thu, 28 Mar 2019 04:41 PM IST
kapil sharma न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
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अखिलेश यादव व नरेंद्र मोदी। - फोटो : amar ujala
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा सपा, रालोद व बसपा के गठबंधन को 'सराब' बताने पर सियासी संग्राम छिड़ गया है। कांग्रेस ने राजनीतिक दलों की तुलना शराब से किए जाने को लोकतंत्र का अपमान करार दिया है। वहीं, सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने ट्वीट कर पीएम मोदी व भाजपा पर करारा हमला बोला है। अखिलेश ने कहा, आज टेली-प्रॉम्प्टर ने पोल खोल दी कि सराब और शराब का अंतर वह लोग नहीं जानते जो नफ़रत के नशे को बढ़ावा देते हैं।

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अखिलेश ने आगे लिखा कि 'सराब' को मृगतृष्णा भी कहते हैं और यह वह धुंधला सा सपना है जो भाजपा पिछले पांच साल से देश की जनता को दिखा रही है जो कभी हासिल नहीं होता। अब जब नया चुनाव आ गया है तो वह नया शराब दिखा रहे हैं।

दरअसल, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मेरठ रैली में सपा-रालोद-बसपा को सराब की संज्ञा देते हुए कहा कि अच्छी सेहत के लिए 'सराब' से बचना चाहिए। सराब सेहत के लिए हानिकारक होती है। अच्छे भारत के भविष्य के लिए हानिकारक है। नए भारत के लिए हानिकारक है। इसलिए सपा, रालोद और बसपा- इस सराब से बचकर रहें, क्योंकि यह आपको बर्बाद कर सकती है। इस पर अखिलेश ने ट्वीट किया।
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मायावती ने मोदी की रैली पर इस तरह दिया जवाब

वहीं, बसपा सुप्रीमो मायावती ने पीएम मोदी की मेरठ रैली के बाद ट्वीट कर कहा, व्यक्तिगत, जातिगत व सांप्रदायिक द्वेष व घृणा की राजनीति करना बीजेपी एण्ड कम्पनी की शोभा है जिसके लिये उनकी सरकार लगातार सत्ता का दुरुपयोग करती रही है। देशहित को सर्वोपरि मानकर ऐसी गरीब, लोकतंत्र व जनविरोधी सरकार से देश को मुक्ति दिलाने के लिए बसपा-सपा-आरएलडी ने गठबंधन किया है।

उन्होंने पीएम मोदी की ईमानदारी पर भी ट्वीट कर सवाल उठाए और कहा, मोदी ने आज मेरठ से लोकसभा चुनाव अभियान की शुरूआत करते हुए कहा कि मैं अपना हिसाब दूंगा लेकिन विदेश से कालाधन वापस लाकर गरीबों को 15 से 20 लाख रुपये देने व किसानों की आय दोगुनी करने के जनहित के मुद्दों का हिसाब-किताब दिये बिना ही वे मैदान छोड़ गए। चौकीदार क्या ईमानदार है?
 

 
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