बैठक में चार प्रस्ताव पेश किए गए। पहले प्रस्ताव में है कि इस देश के मुसलमान स्वत: सद्भावना के इरादे से इस बात पर अपनी सहमति प्रकट करते हैं कि अयोध्या स्थित विवादित जमीन को राममंदिर बनाने हेतु दूसरी पार्टी को दिया जाए, जिससे वहां राममंदिर बन सके।
दूसरे प्रस्ताव में अयोध्या में किसी मुनासिब जगह पर मुसलमानों को लगभग 10 एकड़ जमीन आवंटित कर दी जाए जिससे कि वहां पर एक मस्जिद बनाई जा सके।
तीसरे प्रस्ताव में मुसलमानों को यह आश्वासन दिया जाए कि इसके बाद मुसलमानों के सभी धार्मिक स्थलों की आजादी के समय जो स्थिति थी, वह यथास्थिति कायम रहेगी।
अंतिम प्रस्ताव में कहा गया कि 1991 में बने अयोध्या एक्ट को स्पष्ट और पूर्णत: लागू करवाने की जवाबदेही इलाके के सांसद, विधायक, जिलाधिकारी व पुलिस अधीक्षक की होगी।