डीबीटीएल को लेकर परेशान घरेलू गैस उपभोक्ताओं को जल्द बड़ी राहत मिलेगी। जिला प्रशासन ने उपभोक्ताओं को सस्ती दर के सब्सिडीयुक्त सिलेंडर दिलाने के लिए अलग से शिविर लगाकर आधार कार्ड बनवाने का फैसला किया है
इन शिविरों में नई नामित वेंडर कंपनी के माध्यम से गैस एजेंसियों की कस्टमर संख्या के आधार पर बॉयोमीट्रिक पंजीयन के बाद आधार कार्ड बनवाएं जाएंगे।
एनपीआर बॉयोमीट्रिक पंजीयन शिविरों के इतर आयोजित होने वाले इन कैंपों में सिर्फ घरेलू गैस उपभोक्ताओं के आधार कार्ड ही बनेंगे।
ताकि केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्रालय द्वारा 31 मार्च तक दी गई मोहलत में ही शत-प्रतिशत गैस उपभोक्ताओं के आधार कार्ड बनवा कर इन्हें बैंक खाते व एलपीजी कंज्यूमर नंबर से लिंकअप करा डीबीटीएल (कैश बेस सब्सिडी) के दायरे में लाकर राहत दिलाई जा सके।
यह जानकारी शनिवार को एनपीआर पंजीयन के नोडल प्रभारी व एडीएम वित्त व राजस्व संजय कुमार सिंह यादव ने दी। आधार कार्ड बनवाने को प्रस्तावित शिविरों से जिले में पंजीकृत तीनों प्रमुख तेल कंपनियों से संबद्ध 8.72 लाख एलपीजी कस्टमरों को राहत दिलाने का उद्देश्य पूरा हो सकेगा।
आपूर्ति विभाग व यूआईडी की निगरानी में संचालित होने वाले इन विशेष शिविरों में संबंधित गैस उपभोक्ताओं का बॉयोमीट्रिक पंजीयन व आधार कार्ड बनवाने का कार्य कर्वी कंपनी करेगी।
शिविर आयोजित कराने के लिए गैस उपभोक्ताओं की संख्या का पूरा विवरण भी तैयार करा लिया गया है। इसके आधार पर शिविर स्थल का चयन होगा।
एक शिविर में आसपास के इलाके के न्यूनतम पांच व अधिकतम दस गैस एजेंसियों से जुड़े गैस उपभोक्ताओं के आधार कार्ड बनवाने की रोस्टर आधारित व्यवस्था रहेगी।
डीबीटीएल के लिए बैंक खाते से संबद्ध आधार कार्ड की अनिवार्यता को हर संभव स्तर पर मियाद में पूरा कराया जाएगा ताकि उपभोक्ता को महज आधार कार्ड न होने की कमी से डीबीटीएल के फायदे से वंचित न होना पड़े।
वर्तमान में नगर निगम व जनगणना विभाग के माध्यम से संचालित एनपीआर शिविरों में बॉयोमीट्रिक पंजीयन से गैस उपभोक्ताओं के आधार कार्ड निर्धारित मियाद में बन पाना संभव नहीं लग रहा था।
इसी कारण शासन स्तर पर प्रमुख सचिव खाद्य के यहां हुई बैठक के बाद घरेलू गैस उपभोक्ताओं को डीबीटीएल का फायदा दिलवाने के लिए अलग से शिविर आयोजित कराने का निर्णय हुआ है।