नाका कोतवाली क्षेत्र के पानदरीबा में सालभर पहले कनाडा से लौटे आदित्य सिंह ने सोमवार सुबह फांसी लगाकर खुदकुशी कर ली। पिछले साल ही उसके ट्रांसपोर्टर पिता ने मां की गोली मारकर हत्या करके खुद को भी गोली से उड़ा लिया था। माता-पिता की मौत के बाद पिछले साल कनाडा से लौटा आदित्य अपने छोटे भाई को वहीं शिफ्ट करना चाहता था, मगर किन्हीं कारणों से वहां जा नहीं पा रहा था। जबकि कनाडा में रह रही उसकी पत्नी लगातार फोन करके उसे बुला रही थी। इन्हीं उलझनों के चलते आदित्य शराब पीने का आदी हो गया था। आशंका है कि इसी के चलते उसने खुदकुशी की है।
पानदरीबा स्थित बंदर कोठी निवासी ट्रांसपोर्टर अनुरूप सिंह ने 20 अगस्त 2020 को लाइसेंसी पिस्टल से पत्नी मधु सिंह की गोली मारकर हत्या करने के बाद खुद को गोली से उड़ा लिया था। घटना के दो महीने बाद कनाडा में रहने वाला अनुरूप का बड़ा बेटा आदित्य सिंह (26) यहां आया था। वह छोटे भाई आर्यन को भी कनाडा में शिफ्ट करना चाहता था। कनाडा में रह रही आदित्य की पत्नी निराली दीक्षित लगातार फोन करके उसे वापस बुला रही थी।
मगर कुछ पारिवारिक कारणों के चलते वह कनाडा नहीं जा पा रहा था। माता-पिता की असामयिक मौत से भी अनुरूप डिप्रेशन में था। इसके चलते वह शराब पीने लगा था। शनिवार सुबह पानदरीबा स्थित कोठी के बाथरूम में उसका शव फांसी के फंदे पर लटका मिला। आदित्य के मामा धीरेंद्र सिंह निवासी निरालानगर ने पुलिस को सूचना दी। इस पर नाका कोतवाली के उपनिरीक्षक नीरज द्विवेदी ने बताया कि छानबीन कर शव पोस्टमार्टम के लिए भेजा है।
चंद महीने ही पति संग रह पाई निराली
आदित्य कनाडा के एक बड़े होटल व जिम में नौकरी करता था। पिछले साल ही उसने वहां रहने वाली भारतीय मूल की निराली दीक्षित से लव मैरिज की थी। मगर शादी के कुछ महीने बाद ही माता-पिता की मौत होने पर अक्तूबर 2020 में आदित्य कनाडा से इंडिया आ गया था। तब से वह कनाडा नहीं जा पा रहा था। परिजनों के मुताबिक रविवार रात उसकी पत्नी से फोन पर बात हुई थी। सोमवार सुबह उसने खुदकुशी कर ली। रिश्तेदारों ने निराली को फोन करके आदित्य के खुदकुशी करने की खबर दी है।
वीरान हो गई बंदर कोठी
आदित्य के दादा हरबंस सिंह बंदराें के नामी डॉक्टर थे। इसी के चलते उनका आलीशान मकान पूरे इलाके में बंदर कोठी के नाम से मशहूर है। पिछले साल आदित्य के माता-पिता की मौत के कुछ दिन बाद ही दादा हरबंस सिंह का कोरोना से निधन हो गया था। कोठी में सिर्फ आर्यन व उसकी दादी ही बची थीं। आर्यन और कनाडा से लौटे आदित्य को परेशान देख उनकी मौसी अपने बेटे संग आकर इसी कोठी में रह रही हैं। सालभर के भीतर परिवार में चार लोगों के असामयिक निधन से कोठी वीरान सी हो गई है।