पीड़ित परिजनों के मुताबिक 10 सितंबर और एक अक्तूबर को मुन्ना पुलिस के पास गए थे। इससे पहले भी कई बार पुलिस से शिकायत की, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं की गई। आरोप है कि आलमबाग पुलिस की टेंट हाउस मालिक से सांठगांठ थी। इसलिए वह कार्रवाई नहीं कर रही थी। मुन्ना को ही जेल भेजने की धमकी दी जा रही थी।
चार साल से चक्कर लगाते-लगाते थक गया
झुलसने के बाद मुन्ना जब अस्पताल पहुंचाए जा रहे थे तब वह चीखते चिल्लाते हुए बोल भी रहे थे। वह कह रहे थे कि पुलिस ने कोई मदद नहीं की। चार साल से चक्कर लगाते लगाते थक गए, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं की गई।
पुलिसकर्मियों की सजगता से जल्द बुझी आग
विधानभवन और कालिदास मार्ग के पास कई लोग आत्मदाह की कोशिश कर चुके हैं। दो महीने पहले तो एक महिला की मौत भी हो गई थी। कई लोगों को पुलिसकर्मियों ने बचाया भी है। वहां पर पुलिस की एक टीम इसलिए तैनात भी की गई है। चूंकि मुन्ना पहले से ही पेट्रोल डालकर वहां पर पहुंचे थे इसलिए पुलिसकर्मियों को भनक नहीं लग सकी। लेकिन, जैसे ही उनको जलता देखा तो कंबल डालकर आग बुुझाई। आग बुझाने वाले पुलिसकर्मियों में सिपाही पुष्पेंद्र कुमार, हरीश मिश्रा, संध्या, रेशमा, प्रियंका शामिल रहीं।