आस्था , धर्म और अध्यात्म का एक अनूठा संगम आज 88 हजार ऋषियों की पावन तपोभूमि नैमिषारण्य में देखने को मिला जब राम नाम की इस अद्भुत अनूठी यात्रा ने इस वर्ष की 84 कोसी धर्मयात्रा का पावन क्रम प्रारम्भ किया। सोमवार सुबह पहला आश्रम महंत नारायण दास द्वारा परम्परागत रूप से डंका बजाने के साथ ही आध्यात्म और आस्था के अनूठे संगम का शानदार आगाज हो गया।
प्रशासन द्वारा परिक्रमार्थियों पर फूलों की वर्षा की गई जिनके स्वागत के लिए जिला पंचायत द्वारा भव्य गेट बनाया गया था। भक्ति और मोक्ष की कामना से इस परिक्रमा में भाग ले रहे लाखों श्रद्धालुओं का इस परिक्रमा के प्रति उत्साह देखते ही बन रहा था।
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सर्वप्रथम महंत नारायण दास, महंत संतोष दास, व्यास पीठाधीश्वर अनिल शास्त्री, महंत अंजनी दास, रंजीत शास्त्री और विनीत मिश्रा बैंड बाजे के साथ चक्रतीर्थ पहुंचे जहां प्रधान पुजारी राज नारायण पाण्डेय द्वारा पूजन कराया गया। वहीं नारियल फोड़कर परिक्रमा का प्रारम्भ किया गया फिर भगवान गणेश का दर्शन किया।
परिक्रमा मार्ग पर बने स्वागत द्वार पर पंकज सक्सेना एसडीएम मिश्रिख, राजेश यादव सीओ मिश्रिख, तहसीलदार नीरज यादव, चेयरमैन प्रतिनिधि बबलू सिंह, थाना प्रभारी पंकज तिवारी द्वारा महंत नारायण दास, महंत संतोष दास, व्यासपीठाधीश्वर अनिल शास्त्री, अंजनी दास, रामानुज कुमारी माताजी, विद्यान्नद सरस्वती, प्रधान पुजारी राजनारायण पाण्डेय, विमल मिश्रा का माल्यार्पण और अंगवस्त्र भेंटकर स्वागत किया गया और उन पर फूलों की वर्षा की गई।
इस अनोखे धर्मपथ पर देश विदेश के लाखों श्रद्धालुगण धर्म की मस्त फुहारों में भीगते से नजर आ रहे थे जिसमे कोई सन्त जहां फक्कड़ भाव से चिमटा बजाते हुए अपनी ही धुन में गुनगुनाता जा रहा था तो कोई सन्त पालकी में बैठ कर परम्परा का निर्वहन करते दिख रहा था। वहीं कोई सन्त डमरू की धुन पर सबको मंत्रमुग्ध कर रहा था। यहां का आलम कुछ ऐसा था कि एक और जहां कोई श्रद्धालु परिक्रमा पथ पर ही दण्डवत प्रणाम की मुद्रा में दिख रहा था तो कोई ग्रामीण श्रद्धालु अपने नन्हे मुन्हे बच्चों के साथ साइकिल पर ही परिक्रमा मार्ग पर बढ़ रहा था।
इसी क्रम में मध्य प्रदेश से आई कई महिला श्रद्धालु भगवान शालिग्राम और तुलसी जी के पौधे को अपने सिर मत्थे पर रख परिक्रमा का आनन्द लेने के लिए प्रतिबद्ध दिख रही थी तो कोई युवा सरपट दौड़कर परिक्रमा पथ पर बढ़ रहा था। कोई बुजुर्ग डंडे के सहारे तो कोई दिव्यांग ट्राई साइकिल से ही परिक्रमा की राह पर बढ़ता जा रहा था। औरंगाबाद में आकिफ रब्बानी द्वारा परिक्रमार्थियों और साधु-संतो को माला पहनाकर फल वितरण किया और गंगा जमुनी तहजीब का सन्देश दिया।