लखनऊ विश्वविद्यालय में पीएचडी सीट निर्धारण को लेकर खींचतान अभी भी जारी है। शिक्षकों के विरोध के बाद लविवि प्रशासन नियमों में थोड़ी और ढील देने को तैयार हो गया है। इसके बाद पीएचडी की कम से कम 50 और सीट बढ़ने का रास्ता साफ हो गया है। अब अगले तीन साल में सेवानिवृत्त होने जा रहे शिक्षकों को भी सीटें आवंटित की जाएंगी।
इतना ही नहीं जन्म तिथि के आधार पर जिन शिक्षकों को अगले साल पीएचडी सीट आवंटित नहीं होनी है, इस साल उनके लिए अनुमन्य सभी सीटें आवंटित कर दी जाएंगी। यूजीसी के निर्देश के अनुसार नवनियुक्त प्रोफेसर एक समय में अधिकतम आठ, एसोसिएट प्रोफेसर छह और असिस्टेंट प्रोफेसर चार शोधार्थियों के गाइड बन सकते हैं।
नये सर्कुलर के अनुसार नवनियुक्त प्रोफेसर को पहले और दूसरे साल तीन और तीसरे साल दो सीटें आवंटित की जानी थीं। इसी तरह एसोसिएट प्रोफेसर को तीनों साल दो-दो और असिस्टेंट प्रोफेसर को पहले साल दो और अगले दो साल में एक-एक सीट आवंटित होनी थीं।इसके अलावा जब तक पीएचडी थीसिस जमा नहीं हो जाती, सीट खाली नहीं मानी जाएगी।
लविवि में प्रवेश परीक्षा के बाद सीट निर्धारण के लिए जारी सर्कुलर से शिक्षकों में काफी रोष था। लखनऊ विश्वविद्यालय टीचर्स एसोसिएशन (लूटा) ने इसके विरोध में कुलपति को ज्ञापन और धरना देकर अपना विरोध जाहिर किया था। इस सर्कुलर के हिसाब से नवनियुक्त शिक्षकों को उनके लिए निर्धारित अधिकतम सीट में से सिर्फ एक तिहाई ही इस साल आवंटित होनी थीं। अगले तीन साल में सेवानिवृत्त हो रहे शिक्षक को एक भी सीट आवंटित नहीं होने संबंधी नियम पर शिक्षकों में काफी नाराजगी थी। विवि द्वारा छूट दिये जाने के बाद शिक्षक संघ के पदाधिकारियों ने संतोष जाहिर किया है।