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एंटीजन टेस्ट में 4.5 तो आरटीपीसीआर में 13.88 प्रतिशत मिले कोरोना पॉजिटिव

Sat, 22 Aug 2020 08:36 PM IST
ishwar ashish चंद्रभान यादव, अमर उजाला/लखनऊ
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : iStock
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लखनऊ में एंटीजन टेस्ट से जांच का ग्राफ बढ़ाया जा रहा है, लेकिन इसकी रिपोर्ट सवालों के घेरे में है। इससे 4.5 फीसदी लोग पॉजिटिव मिले, जबकि आरटीपीसीआर में यह प्रतिशत 13.88 है।

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स्वास्थ्य विभाग के आंकड़े इसकी गवाही दे रहे हैं। माइक्रोबायोलॉजिस्ट भी एंटीजन टेस्ट को लेकर आश्वस्त नहीं हैं। चिकित्सा विशेषज्ञों का मानना है कि एंटीजन टेस्ट में निगेटिव आने वालों को भी दोबारा जांच की जरूरत पड़ती है।

इस तकनीक में फॉल्स रिपोर्ट की गुंजाइश है। हालांकि, इसके बाद भी स्वास्थ्य विभाग एंटीजन टेस्ट से सर्वाधिक जांच कर वाहवाही लूट रहा है। वहीं, जिनकी एंटीजन टेस्ट की रिपोर्ट निगेटिव आती है, वे बेफिक्र हो जाते हैं।
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वायरस फैलने की एक बड़ी वजह यह भी है। अगस्त में रोजाना औसतन पांच हजार लोगों की जांच कराने का दावा किया जा रहा है, लेकिन इनमें से ज्यादातर जांच एंटीजन टेस्ट से हो रही है। इसकी जांच रिपोर्ट में पॉजिटिव मरीजों की पकड़ पर लगातार सवाल उठ रहे हैं। 

तुरंत पकड़ में आता है मरीज

स्वास्थ्य विभाग के सूत्रों ने बताया कि 18 अगस्त तक करीब 40 हजार के एंटीजन टेस्ट हुए, जिनमें 1800 पॉजिटिव मिले। मरीज मिलने का आंकड़ा 4.5 प्रतिशत है। आरटीपीसीआर से 36 हजार सैंपल के करीब की जांच की गई।

इनमें से पांच हजार से ज्यादा पॉजिटिव मिले। यह आंकड़ा 13.88 प्रतिशत है। इससे जाहिर है कि एंटीजन से कोरोना के केस कम पकड़ में आ रहे हैं। सीएमओ डॉ. आरपी सिंह का कहना है कि एंटीजन टेस्ट से तत्काल मरीज पकड़ में आ जाता है।

इस कारण इससे जांच कराई जा रही है। हालांकि, जो निगेटिव आते हैं और उनमें लक्षण है तो आरटीपीसीआर कराया जाता है। स्वास्थ्य विभाग दावे चाहे जो करे, इतना तय है कि एंटीजन टेस्ट से रिपोर्ट कराने के बाद लोगों को उनके हाल पर छोड़ दिया जाता है। 

एंटीजन टेस्ट को जानें

रैपिड एंटीजन टेस्ट के जरिये यह पता लगाया जाता है कि संबंधित व्यक्ति में वायरस का कोई प्रोटीन है या नहीं। यदि यह मौजूद रहता है तो रिपोर्ट पॉजिटिव आ जाती है, लेकिन इसकी पकड़ने की क्षमता कम आंकी जा रही है।

रिपोर्ट पॉजिटिव आती है तो हो सकता है कि व्यक्ति को आइसोलेशन में रहने या अस्पताल में रखने की सलाह दी जाती है। टेस्ट निगेटिव है तो फिर उसका रियल टाइम पीसीआर टेस्ट किया जाता है। अगर किसी शख्स का पीसीआर टेस्ट नहीं हो पाता है तो उसे होम क्वारंटीन रखा जाता है और 10 दिन बाद दोबारा से एंटीबॉडी टेस्ट किया जाता है।

आरटीपीसीआर को समझें
आरटीपीसीआर या रियल टाइम पीसीआर टेस्ट के लिए स्वाब सैंपल लिया जाता है। इससे शरीर में वायरस के आरएनए जीनोम के सुबूत खोजे जाते हैं। यदि टेस्ट पॉजिटिव आता है तो मरीज को आइसोलेशन वार्ड या होम आइसोलेशन में भेजा जाता है।

नाक और गले के पिछले हिस्से दो ऐसी जगहें हैं जहां वायरस के मौजूद होने की संभावना ज्यादा होती हैं। स्वैब से इन्हीं कोशिकाओं को उठाया जाता है।
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क्या है ट्रूनेट मशीन

इस मशीन में भी स्वाब की जांच की जाती है। यह मशीन इसकी जानकारी दे देती है कि वायरस के आरएनए मौजूद हैं या नहीं। इसकी रिपोर्ट अभी तक पुख्ता मानी गई है। इस आधार पर ज्यादातर अस्पतालों में ट्रूनेट मशीन के जरिये लोगों की जांच की जा रही है। यदि किसी मरीज में संशय होता है तो उसका दोबारा पीसीआर टेस्ट करा ली जाती है। 

अभी तक आरटीपीसीआर और ट्रूनेट की जांच पर किसी तरह का सवाल नहीं उठा है। लेकिन रैपिड एंटीजन टेस्ट में निगेटिव आने वालों की दोबारा जांच करानी पड़ती है। इसका कारण है कि इसकी प्रमाणिकता पर अभी मुहर नहीं लगी है। ऐसे में जिनकी रिपोर्ट निगेटिव हो, उन्हें भी आरटीपीसीआर टेस्ट करा लेना चाहिए। -डॉ. शीतल वर्मा, एसोसिएट प्रो. माइक्रोबायोलॉजी     
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