राजकीय और सहायता प्राप्त माध्यमिक विद्यालयों में मामूली गिरावट दिख रही है। कम छात्र संख्या के मद्देनजर विभाग भी असमंजस में है कि अंतिम तिथि को बढ़ाया जाए या नहीं। यदि अंतिम तिथि बढ़ाई गई तो बोर्ड की बाकी प्रक्रियाएं लेटलतीफी का शिकार होंगी।
स्कूलों के अनुसार कम छात्रों के आने का प्रमुख कारण फीस है। हाई स्कूल बोर्ड परीक्षा के लिए 500 और इंटरमीडिएट बोर्ड परीक्षा के लिए 600 रुपये शुल्क है।
माध्यमिक वित्तविहीन शिक्षक महासभा के प्रदेश महासचिव सुनील कुमार यादव ने बताया कि इन विद्यालयों में आर्थिक रूप से कमजोर छात्र पढ़ते हैं।
इनके अभिभावक लॉकडाउन में मासिक फीस देना नहीं चाहते। ऐसे में पंजीकरण और बोर्ड परीक्षा आवेदन के लिए छात्र नहीं आ रहे हैं। वहीं, सरकारी विद्यालयों में फीस नहीं लगती है।
ऐसे में छात्र पंजीकरण और बोर्ड आवेदन का शुल्क जमा करने के लिए विद्यालय आ रहे हैं। एमडी. शुक्ला इंटर कॉलेज के प्रधानाचार्य डॉ. एसएन उपाध्याय ने बताया कि सहायता प्राप्त माध्यमिक विद्यालयों में 9 से 12 तक के छात्रों के पंजीयन कराने की संख्या उम्मीद मुताबिक है।
सरकारी विद्यालयों में भी कक्षा 8 तक में छात्रों के दाखिले पर कोरोना का असर देखने को मिला है। कक्षा 1 से 8 तक में दाखिले के लिए छात्र नहीं आ रहे हैं।
एमडी. शुक्ला इंटर कॉलेज के प्रधानाचार्य डॉ. एसएन उपाध्याय ने बताया कि जूनियर सेक्शन में इस बार दाखिले उम्मीद मुताबिक नहीं हैं। छोटी कक्षाओं में पढ़ाई बुरी तरह से प्रभावित हुई है। ऑनलाइन पढ़ाई भी कारगर नहीं हो पा रही है, ऐसे में अभिभावक बच्चों के दाखिले कराने नहीं आ रहे हैं।