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UP: ऑपरेशन किया पर नहीं लगाए टाकें, डॉक्टर पर 22 लाख हर्जाना, जबरन किया डिस्चार्ज

Fri, 02 Feb 2024 01:27 PM IST
ishwar ashish अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ

सार

इलाज में लापरवाही करने और मरीज को जबरन डिस्चार्ज करने को लेकर राज्य उपभोक्ता आयोग ने सख्त फैसला सुनाया है। आयोग ने डॉक्टर पर 22 लाख रुपये का जुर्माना लगा दिया।
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- फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
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हर्निया के मरीज के इलाज व ऑपरेशन में लापरवाही पर मैनपुरी के डॉक्टर पर राज्य उपभोक्ता आयोग ने तगड़ा हर्जाना लगाया है। आयोग के सदस्य राजेंद्र सिंह और विकास सक्सेना ने जिला उपभोक्ता आयोग के पूर्व में दिए फैसले को निरस्त कर दिया है। साथ ही पीड़ित को मानसिक रूप से परेशान करने के एवज में 10 लाख रुपये व इलाज में खर्च 55 हजार वापस करने का आदेश दिया है। इन दोनों राशि पर 2014 से 12 फीसदी सालाना की दर से ब्याज भी देना होगा। ऐसे में हर्जाने की कुल रकम करीब 22 लाख रुपये होगी।

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मैनपुरी निवासी रामतीर्थ को पेट में दर्द था। 29 अक्तूबर, 2014 को मैनपुरी में ही वह डॉ. पीके पाठक के पाठक हॉस्पिटल पहुंचे। वहां, तीस हजार रुपये लेकर उनका ऑपरेशन किया गया। ऑपरेशन के बाद मरीज के पेट में कोई सिलाई न करके पट्टियों से बांध दिया था। बाद में दवाओं के लिए भी दस हजार रुपये लिए गए। ऑपरेशन के करीब पांच घंटे बाद मरीज को खून की उल्टी हुई। पेट के चीरे गए भाग से खून व गंदगी निकलने लगी। कंपाउंडर से डॉक्टर को सूचना भिजवाई गई लेकिन रात भर मरणासन्न होने के बावजूद डॉक्टर नहीं आए।

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अशिक्षित नर्स के द्वारा किये गये उपचार से मरीज की हालत बिगड़ती चली गई। चार दिन अस्पताल में रखने के बाद उन्हें जबरन डिस्चार्ज कर दिया गया। रामतीर्थ उसी हालत में दूसरे अस्पताल पहुंचे। जांच में हर्निया कटा हुआ पाया, जिससे लीकेज हो रहा था। वहां इलाज कर रिसाव रोका गया। प्रिसाइडिंग जज राजेन्द्र सिंह ने तथ्यों के आधार पर पाया कि डॉ. पाठक व उनके अस्पताल ने इलाज में लापरवाही बरती। इसके बाद उन्होंने फैसला सुना दिया।

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