Krishna Janmashtami 2024: जन्माष्टमी शुभ तिथि 2024
अष्टमी तिथि- वैदिक पंचांग के अनुसार 26 अगस्त को सुबह 3 बजकर 41 मिनट से भाद्रपद माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि आरंभ हो जाएगी। इस तिथि का समापन 27 अगस्त को सुबह 2 बजकर 21 मिनट पर होगा। ऐसे में उदया तिथि के अनुसार जन्माष्टमी 26 अगस्त को मनाई जाएगी।
जन्माष्टमी पर भूलकर भी न करें ये 2 काम
Janmashtami 2024
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कृष्ण जन्माष्टमी हिंदुओं का एक प्रमुख त्योहार है और इसे बड़ी धूमधाम से मनाया जाता है। इस दिन भगवान श्री कृष्ण की पूजा-अर्चना की जाती है। इस शुभ अवसर पर कुछ बातों का ध्यान रखना बहुत जरूरी होता है।
1- न करें मांसाहार का सेवन
जन्माष्टमी के दिन मांसाहार का सेवन करना वर्जित माना जाता है। मान्यता है कि इस दिन मांसाहार करने से भगवान श्री कृष्ण नाखुश हो सकते हैं। व्रत रखने वाले लोगों के लिए तो यह और भी अधिक महत्वपूर्ण है कि वे मांसाहार से पूरी तरह परहेज करें।
2- प्याज और लहसुन न खाएं
जन्माष्टमी के दिन प्याज और लहसुन का सेवन भी वर्जित माना जाता है। इन दोनों ही चीजों को तामसिक माना जाता है और इनका सेवन करने से व्यक्ति के मन में अशुद्ध विचार आ सकते हैं।
जन्माष्टमी पर इन 2 चीजों को घर लाना माना जाता है शुभ
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जन्माष्टमी पर कुछ खास चीजें घर लाने से घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है और साथ ही भगवान श्री कृष्ण की विशेष कृपा प्राप्त होती है। आइए जानते हैं ऐसी कौन सी दो चीजें हैं जिन्हें जन्माष्टमी पर घर लाना शुभ माना जाता है-
वैजयंती माला
वैजयंती माला को भगवान श्री कृष्ण को अति प्रिय माना जाता है। मान्यता है कि वैजयंती माला में मां लक्ष्मी का वास होता है। इसलिए, वैजयंती माला खरीद कर घर में लाने से बरकत होती है, आर्थिक स्थिति बेहद मजबूत होती है।
मोर पंख
मोर पंख भगवान श्रीकृष्ण के माथे की सान है। जन्माष्टमी के दिन पूजा के समय इसे घर लाना शुभ माना जाता है। यह सकारात्मक ऊर्जा का प्रतीक है और घर में नकारात्मक ऊर्जा को दूर करता है। मोर पंख को घर के मंदिर में या पूजा स्थल पर रखने से घर में सुख-शांति का वातावरण बना रहता है।
Krishna Janmashtami Shubh Muhurat 2024: जन्माष्टमी पूजा मुहूर्त 2024
पंचांग की गणना के मुताबिक श्रीकृष्ण जन्माष्टमी का पूजा का मुहूर्त रात 12 बजे से लेकर 12 बजकर 44 मिनट तक रहेगा। फिर व्रत का पारण 27 अगस्त को सुबह 11 बजे होगा।
जन्माष्टमी पर करें इस मंत्र का जाप
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जन्माष्टमी के पावन पर्व पर भगवान श्री कृष्ण की पूजा-अर्चना के साथ-साथ कुछ विशेष मंत्रों का जाप करना बहुत शुभ माना जाता है। इन मंत्रों के जाप से व्यक्ति के मन में शांति होती है और साथ ही भगवान कृष्ण की विशेष कृपा प्राप्त होती है।
ॐ देविकानन्दनाय विधमहे वासुदेवाय धीमहि तन्नो कृष्ण:प्रचोदयात
Krishna Janmashtami 2024: जन्माष्टमी पर रोहिणी नक्षत्र कब होगा शुरू
भगवान श्रीकृष्ण का जन्म रोहिणी नक्षत्र में हुआ था। ऐसे में 26 अगस्त को रोहिणी नक्षत्र की शुरुआत शाम 3 बजकर 54 मिनट से होगी और समापन 27 अगस्त को शाम 3 बजकर 39 मिनट पर होगा।
Krishna Janmashtami 2024: जानें किस नक्षत्र और तिथि में हुआ था भगवान श्रीकृष्ण का जन्म
धर्म ग्रंथों के अनुसार मथुरा के कारागार में भगवान श्रीकृष्ण का जन्म भाद्रपद माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि, रोहिणी नक्षत्र, वृषभ लग्न और बुधवार को मध्य रात्रि में हुआ था।
Krishna Janmashtami Auspicious Yog 2024: जन्माष्टमी पर बनेगा दुर्लभ योग
इस बार जन्माष्टमी का त्योहार 26 अगस्त को सोमवार के दिन जयंती योग में मनाया जाएगा। इसके अलावा इस बार जन्माष्टमी पर 30 साल बाद शनिदेव जो भगवान कृष्ण को अपना आराध्य देव मानते हैं स्वराशि और मूल त्रिकोण में रहेंगे। वहीं इस दिन सर्वार्थ सिद्धि योग भी बन रहा है। इस योग शुभ कार्य करने और पूजा-आराधना करने पर विशेष फल की प्राप्ति होती है।
जन्माष्टमी पर सुनें गोपाल स्तुति, सभी मनोकामनाएं होंगी पूर्ण
गोपाल स्तुति
नमो विश्वस्वरूपाय विश्वस्थित्यन्तहेतवे।
विश्वेश्वराय विश्वाय गोविन्दाय नमो नमः॥
नमो विज्ञानरूपाय परमानन्दरूपिणे।
कृष्णाय गोपीनाथाय गोविन्दाय नमो नमः॥
नमः कमलनेत्राय नमः कमलमालिने।
नमः कमलनाभाय कमलापतये नमः॥
बर्हापीडाभिरामाय रामायाकुण्ठमेधसे।
रमामानसहंसाय गोविन्दाय नमो नमः॥
कंसवशविनाशाय केशिचाणूरघातिने।
कालिन्दीकूललीलाय लोलकुण्डलधारिणे॥
वृषभध्वज-वन्द्याय पार्थसारथये नमः।
वेणुवादनशीलाय गोपालायाहिमर्दिने॥
बल्लवीवदनाम्भोजमालिने नृत्यशालिने।
नमः प्रणतपालाय श्रीकृष्णाय नमो नमः॥
नमः पापप्रणाशाय गोवर्धनधराय च।
पूतनाजीवितान्ताय तृणावर्तासुहारिणे॥
निष्कलाय विमोहाय शुद्धायाशुद्धवैरिणे।
अद्वितीयाय महते श्रीकृष्णाय नमो नमः॥
प्रसीद परमानन्द प्रसीद परमेश्वर।
आधि-व्याधि-भुजंगेन दष्ट मामुद्धर प्रभो॥
श्रीकृष्ण रुक्मिणीकान्त गोपीजनमनोहर।
संसारसागरे मग्नं मामुद्धर जगद्गुरो॥
केशव क्लेशहरण नारायण जनार्दन।
गोविन्द परमानन्द मां समुद्धर माधव॥
॥ इत्याथर्वणे गोपालतापिन्युपनिषदन्तर्गता गोपालस्तुति संपूर्णम॥
Janmashtami Panjiri: जन्माष्टमी पर पंजीरी का महत्व
Janmashtami 2024
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कृष्ण जन्माष्टमी के दिन बाल गोपाल के लिए विशेष रूप से धनिया से बनी पंजीरी का भोग लगाया जाता है। कान्हा जी को धनिये की पंजीरी का भोग बहुत प्रिय है इसलिए इस दिन उन्हें प्रसाद के रूप में धनिये की पंजीरी चढ़ाई जाती है। भोग लगाने के बाद यह प्रसाद सभी लोगों में बांटा जाता है। धार्मिक मान्यताओं के मुताबिक इस प्रसाद को ग्रहण करने से श्रीकृष्ण की कृपा उनके भक्तों पर बनी रहती है।
Janmashtami 2024: खीरे के बिना अधूरी है भगवान कृष्ण की पूजा
जन्माष्टमी पर खीरा का महत्व
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Janmashtami 2024: धार्मिक मान्यताओं के मुताबिक खीरा भगवान श्रीकृष्ण को प्रिय है और खीरा का भोग लगाने से भक्तों के सारे दुख दूर होते हैं। इसलिए जन्माष्टमी के दिन ऐसा खीरा लाया जाता है, जिसमें थोड़ा डंठल और पत्तियां लगी होती हैं। जन्माष्ठमी पूजा के खीरे के इस्तेमाल के पीछे की मान्यता है कि जब बच्चा पैदा होता है तब उसको मां से अलग करने के लिए गर्भनाल को काटा जाता है, ठीक उसी प्रकार से जन्माष्टमी के दिन खीरे को डंठल से काटकर अलग किया जाता है। ये भगवान श्री कृष्ण को मां देवकी से अलग करने का प्रतीक माना जाता है। यही वजह है कि ऐसा करने के बाद ही कान्हा की विधि विधान से पूजा शुरू की जाती है।
Janmashtami 2024: बाल गोपाल को ऐसे कराएं स्नान
बाल गोपाल
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Laddu Gopal Panchamrit Snan: कान्हा को पंचामृत से स्नान कराते हैं। सबसे पहले धातु से बनी भगवान कृष्ण की प्रतिमा को किसी पात्र में रखें। अब उस मूर्ति को शहद, चीनी, दूध, दही और अंत में घी से स्नान कराएं। इस स्नान को रात कान्हा के जन्म के बाद यानी रात 12 बजे के बाद करा सकते हैं।
Shri Laddu Gopal Chalisa: जन्माष्टमी पर करें लड्डू गोपाल चालीसा का पाठ
|| श्री गोपाल चालीसा ||
| | दोहा | |
श्री राधापद कमल रज, सिर धरि यमुना कूल |
वरणो चालीसा सरस, सकल सुमंगल मूल | |
| | चौपाई | |
जय जय पूरण ब्रह्म बिहारी, दुष्ट दलन लीला अवतारी |
जो कोई तुम्हरी लीला गावै, बिन श्रम सकल पदारथ पावै |
श्री वसुदेव देवकी माता, प्रकट भये संग हलधर भ्राता |
मथुरा सों प्रभु गोकुल आये, नन्द भवन मे बजत बधाये |
जो विष देन पूतना आई, सो मुक्ति दै धाम पठाई |
तृणावर्त राक्षस संहारयौ, पग बढ़ाय सकटासुर मार्यौ |
खेल खेल में माटी खाई, मुख मे सब जग दियो दिखाई |
गोपिन घर घर माखन खायो, जसुमति बाल केलि सुख पायो |
ऊखल सों निज अंग बँधाई, यमलार्जुन जड़ योनि छुड़ाई |
बका असुर की चोंच विदारी, विकट अघासुर दियो सँहारी |
ब्रह्मा बालक वत्स चुराये, मोहन को मोहन हित आये |
बाल वत्स सब बने मुरारी, ब्रह्मा विनय करी तब भारी |
काली नाग नाथि भगवाना, दावानल को कीन्हों पाना |
सखन संग खेलत सुख पायो, श्रीदामा निज कन्ध चढ़ायो |
चीर हरन करि सीख सिखाई, नख पर गिरवर लियो उठाई |
दरश यज्ञ पत्निन को दीन्हों, राधा प्रेम सुधा सुख लीन्हों |
नन्दहिं वरुण लोक सों लाये, ग्वालन को निज लोक दिखाये |
शरद चन्द्र लखि वेणु बजाई, अति सुख दीन्हों रास रचाई |
अजगर सों पितु चरण छुड़ायो, शंखचूड़ को मूड़ गिरायो |
हने अरिष्टा सुर अरु केशी, व्योमासुर मार्यो छल वेषी |
व्याकुल ब्रज तजि मथुरा आये, मारि कंस यदुवंश बसाये |
मात पिता की बन्दि छुड़ाई, सान्दीपन गृह विघा पाई |
पुनि पठयौ ब्रज ऊधौ ज्ञानी, पे्रम देखि सुधि सकल भुलानी |
कीन्हीं कुबरी सुन्दर नारी, हरि लाये रुक्मिणि सुकुमारी |
भौमासुर हनि भक्त छुड़ाये, सुरन जीति सुरतरु महि लाये |
दन्तवक्र शिशुपाल संहारे, खग मृग नृग अरु बधिक उधारे |
दीन सुदामा धनपति कीन्हों, पारथ रथ सारथि यश लीन्हों |
गीता ज्ञान सिखावन हारे, अर्जुन मोह मिटावन हारे |
केला भक्त बिदुर घर पायो, युद्ध महाभारत रचवायो |
द्रुपद सुता को चीर बढ़ायो, गर्भ परीक्षित जरत बचायो |
कच्छ मच्छ वाराह अहीशा, बावन कल्की बुद्धि मुनीशा |
ह्वै नृसिंह प्रह्लाद उबार्यो, राम रुप धरि रावण मार्यो |
जय मधु कैटभ दैत्य हनैया, अम्बरीय प्रिय चक्र धरैया |
ब्याध अजामिल दीन्हें तारी, शबरी अरु गणिका सी नारी |
गरुड़ासन गज फन्द निकन्दन, देहु दरश धु्रव नयनानन्दन |
देहु शुद्ध सन्तन कर सग्ड़ा, बाढ़ै प्रेम भक्ति रस रग्ड़ा |
देहु दिव्य वृन्दावन बासा, छूटै मृग तृष्णा जग आशा |
तुम्हरो ध्यान धरत शिव नारद, शुक सनकादिक ब्रह्म विशारद |
जय जय राधारमण कृपाला, हरण सकल संकट भ्रम जाला |
बिनसैं बिघन रोग दुःख भारी, जो सुमरैं जगपति गिरधारी |
जो सत बार पढ़ै चालीसा, देहि सकल बाँछित फल शीशा |
| | छन्द | |
गोपाल चालीसा पढ़ै नित, नेम सों चित्त लावई |
सो दिव्य तन धरि अन्त महँ, गोलोक धाम सिधावई | |
संसार सुख सम्पत्ति सकल, जो भक्तजन सन महँ चहैं |
ट्टजयरामदेव' सदैव सो, गुरुदेव दाया सों लहैं | |
| | दोहा | |
प्रणत पाल अशरण शरण, करुणा-सिन्धु ब्रजेश |
चालीसा के संग मोहि, अपनावहु प्राणेश | |
इस एक श्लोक में है भगवान कृष्ण के जन्म का पूरा वर्णन
कान्हा के जन्म का उल्लेख हमें भागवत पुराण में देखने को मिलता है। भगवात पुराण में शुकदेव ने नीचे दिए गए श्लोक के माध्यम से उनके जन्म का वर्णन किया गया है।
अथ सर्वगुणोपेत: काल: परमशोभन: ।
यर्ह्येवाजनजन्मक्षन शान्तर्क्षग्रहतारकम् ॥
दिश: प्रसेदुर्गगनं निर्मलोडुगणोदयम् ।
मही मङ्गलभूयिष्ठपुरग्रामव्रजाकरा ॥
नद्य: प्रसन्नसलिला ह्रदा जलरुहश्रिय: ।
द्विजालिकुलसन्नादस्तवका वनराजय: ॥
भावार्थ- अर्थात, जब भगवान श्रीकृष्ण का जन्म हुआ उस समय ऐसा महसूस हुआ जैसे कि शुभ गुणों से युक्त शुभ काल आ गया है। कृष्ण के जन्म के सामी रोहिणी नक्षत्र था। आकाश के सभी नक्षत्र, ग्रह और तारे शांत हो गए। सभी दिशाएं स्वच्छ और प्रसन्न थी। आकाश में तारे जगमगा रहे थे। रात में भी सरोवरों में कमल खिल रहे थे। जंगलों में पत्तियां रंग बिरंगे फूलों से लद गई थीं।
Janmashtami 2024 Durlabh Sanyog: इस वर्ष कृष्ण जन्माष्टमी बहुत ही खास मानी जा रही है क्योंकि जन्माष्टमी पर कई साल बाद बहुत दुर्लभ संयोग बन रहा है। जन्माष्टमी पर इस बार वही योग बन रहा है, जो द्वापर में बना था। इस साल 26 अगस्त को यानी कृष्ण जन्माष्टमी के दिन चंद्रमा वृषभ राशि में ही विराजमान रहेंगे, माना जाता है कि जब भगवान श्रीकृष्ण का जन्म द्वापर युग में हुआ था तब ऐसा ही योग बना था।
Krishna Janmashtami 2024: जन्माष्टमी पर इस रंग के कपड़े पहनकर करें कान्हा की पूजा
भगवान कृष्ण के किरदार
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Krishna Janmashtami 2024: पीला रंग भगवान विष्णु का प्रिय रंग है, धार्मिक मान्यता के अनुसार, श्रीकृष्ण उन्हीं के अवतार हैं। ऐसे में अगर आप जन्माष्टमी के दिन पीले रंग के कपड़े पहनते हैं तो आपके जीवन में खुशियां और समृद्धि बनी रहती है। इसके अलावा आप गुलाबी, लाल, हरा रंग का कपड़ा पहन सकते हैं। ज्योतिष में इन रंगों को भगवान कृष्ण के लिए शुभ माना जाता है।
प्रियजनों को भेजें यह शुभकामना संदेश
हरे कृष्ण, हरे कृष्ण, कृष्ण कृष्ण, हरे हरे।
हरे राम, हरे राम, राम राम, हरे हरे।।
कृष्ण जन्माष्टमी की शुभकामनाएं!
Krishna Janmashtami Date 2024: कब है जन्माष्टमी? जानें तिथि और रोहिणी नक्षत्र
आज यानी 26 अगस्त को जन्माष्टमी का व्रत रखा जा रहा है।
अष्टमी तिथि प्रारम्भ - 26 अगस्त को सुबह 3 बजकर 41 मिनट से
अष्टमी तिथि समाप्त - 27 अगस्त को सुबह 2 बजकर 21 मिनट तक
रोहिणी नक्षत्र प्रारम्भ - 26 अगस्त को दोपहर 3 बजकर 55 मिनट से
रोहिणी नक्षत्र समाप्त - 27 अगस्त को दोपहर 3 बजकर 38 मिनट तक
जन्माष्टमी 2024 मुहूर्त
इस साल कृष्ण जन्माष्टमी के दिन पूजा का मुहूर्त 26 अगस्त देर रात ठीक 12:00 से लेकर 27 अगस्त की सुबह 12 बजकर 45 मिनट तक रहने वाला है। ऐसे में आपके पास शुभ मुहूर्त में पूजा करने के लिए 45 मिनट का समय है।
कृष्ण जन्माष्टमी पर जानें पूजा की पूरी विधि
भगवान कृष्ण के जन्म की पूजा विधि इस प्रकार है-
- 26 अगस्त की मध्याह्न रात के समय जल में काला तिल डालकर स्नान करें।
- इसके बाद पूजा स्थल पर खीरे के अंदर बाल गोपाल की मूर्ति या चित्र स्थापित करें।
- ध्यान रखें इस दिन डंठल और हल्की सी पत्तियों वाले खीरे को कान्हा की पूजा में उपयोग करें।
- रात के 12 बजते ही खीरे के डंठल को किसी सिक्के से काटकर कान्हा का जन्म कराएं।
- बाल गोपाल के जन्म के बाद लड्डू गोपाल की मूर्ति को पहले गंगा जल से स्नान कराएं। फिर पंचामृत स्नान की प्रक्रिया अपनाएं जिसमें मूर्ति को दूध, दही, घी, शक्कर, शहद और केसर के स्नान कराएं
- अब शुद्ध जल से स्नान कराएं।
- इसके बाद शंख बजाकर बाल गोपाल के आने की खुशियां मनाएं और फिर विधिवत कुंज बिहारी की आरती गाएं।
- पूजा के बाद खीरे को प्रसाद के तौर पर बांट दिया जाता है।
जन्माष्टमी में पूजा थाली में जरूर शामिल करें ये सामग्री
जन्माष्टमी के दिन कान्हा की पूरे विधि विधान से पूजा अर्चना की जाती है। इस दिन पूजा थाली सजाते समय कुछ विशेष सामग्रियों का ध्यान रखना आवश्यक है। आइए जानते हैं क्या हैं वो सामग्रियां-
सिंहासन, बाजोट या झूला (चौकी, आसन), पंच पल्लव, पंचामृत, केले के पत्ते, औषधि, तुलसी दल, शुद्ध घी, दही, दूध, ऋतुफल, नैवेद्य या मिष्ठान्न, छोटी इलायची, लौंग मौली, इत्र की शीशी, श्रीकृष्ण की प्रतिमा या तस्वीर, गणेशजी की तस्वीर, अम्बिका जी की तस्वीर, भगवान के वस्त्र, गणेशजी को अर्पित करने के लिए वस्त्र, अम्बिका को अर्पित करने के लिए वस्त्र, जल कलश, सफेद कपड़ा, लाल कपड़ा, पंच रत्न, दीपक, बड़े दीपक के लिए तेल, बन्दनवार, ताम्बूल, नारियल, चावल, गेहूं, चंदन, यज्ञोपवीत 5, कुमकुम, अक्षत, अबीर, गुलाल, अभ्रक, हल्दी, आभूषण, नाड़ा, रुई, रोली, सिंदूर, सुपारी, पान के पत्ते, पुष्पमाला, कमलगट्टे, गुलाब और लाल कमल के फूल, दूर्वा, अर्घ्य पात्र,धूप बत्ती, अगरबत्ती, कपूर, केसर, तुलसीमाला, खड़ा धनिया, सप्तमृत्तिका, सप्तधान, कुशा व दूर्वा, पंच मेवा, गंगाजल, शहद, शक्कर, आदि।
जन्माष्टमी के दिन जरूर करें भगवान श्रीकृष्ण की ये आरती
आरती कुंजबिहारी की,श्री गिरिधर कृष्ण मुरारी की ॥
आरती कुंजबिहारी की,श्री गिरिधर कृष्ण मुरारी की ॥
गले में बैजंती माला, बजावै मुरली मधुर बाला
श्रवण में कुण्डल झलकाला,नंद के आनंद नंदलाला
गगन सम अंग कांति काली, राधिका चमक रही आली
लतन में ठाढ़े बनमाली भ्रमर सी अलक, कस्तूरी तिलक
चंद्र सी झलक, ललित छवि श्यामा प्यारी की,
श्री गिरिधर कृष्ण मुरारी की, आरती कुंजबिहारी की…॥
कनकमय मोर मुकुट बिलसै, देवता दरसन को तरसैं।
गगन सों सुमन रासि बरसै, बजे मुरचंग, मधुर मिरदंग ग्वालिन संग।
अतुल रति गोप कुमारी की, श्री गिरिधर कृष्णमुरारी की ॥
॥ आरती कुंजबिहारी की…॥
जहां ते प्रकट भई गंगा, सकल मन हारिणि श्री गंगा।
स्मरन ते होत मोह भंगा, बसी शिव सीस।
जटा के बीच,हरै अघ कीच, चरन छवि श्रीबनवारी की
श्री गिरिधर कृष्णमुरारी की ॥ ॥ आरती कुंजबिहारी की…॥
चमकती उज्ज्वल तट रेनू, बज रही वृंदावन बेनू
चहुं दिसि गोपि ग्वाल धेनू
हंसत मृदु मंद, चांदनी चंद, कटत भव फंद।
टेर सुन दीन दुखारी की
श्री गिरिधर कृष्णमुरारी की ॥
॥ आरती कुंजबिहारी की…॥
आरती कुंजबिहारी की
श्री गिरिधर कृष्ण मुरारी की ॥
आरती कुंजबिहारी की
श्री गिरिधर कृष्ण मुरारी की ॥
इस बार रोहिणी नक्षत्र में है जन्माष्टमी
धार्मिक कथाओं के मुताबिक भगावन श्री कृष्ण का जन्म रोहिणी नक्षत्र में हुआ था। इसीलिए जन्माष्टमी पर रोहिणी नक्षत्र का विशेष महत्व है। हिन्दू पंचांग के मुताबिक 26 अगस्त को रोहिणी नक्षत्र की शुरुआत शाम 3 बजकर 54 मिनट से होगी और समापन 27 अगस्त को शाम 3 बजकर 39 मिनट पर होगा।
जन्माष्टमी पर मोरपंख से करें ये उपाय
जन्माष्टमी के दिन घर के पूजास्थल में पांच मोरपंख रखें और प्रतिदिन इनकी पूजा करें। इक्कीस दिन बाद इन मोरपंख को तिजोरी या लॉकर में रख दें, ऐसा करने से धन-संपत्ति में वृद्धि होगी और अटके काम भी बनने लगेंगे।
इस विधि से खोला जाता है जन्माष्टमी का व्रत
- जन्माष्टमी में कई लोग निराहार तो कई लोग फलाहार रखकर व्रत करते हैं। ऐसे में व्रत का पारण करते समय कुछ विशेष नियमों का ध्यान रखना चाहिए।
- जन्माष्टमी व्रत का पारण कान्हा को भोग लगाने के बाद ही करें।
- कान्हा के भोग में अर्पित पंजीरी, पंचामृत और माखन से व्रत खोलें।
- धार्मिक मान्यताओं के अनुसार सबको प्रसाद वितरित करने के बाद कान्हा केभोग से व्रत खोलना शुभ माना जाता है।
कृष्ण जन्माष्टमी के दिन सर्वार्थ सिद्धि योग का निर्माण हो रहा है। सर्वार्थ सिद्धि योग एक विशिष्ट प्रकार का योग है जो सप्ताह के किसी विशेष दिन कुछ नक्षत्रों के पड़ने पर बनता है। इन नक्षत्रों का संयोग नए कार्यों या व्यवसाय को करने के लिए शुभ माना जाता है। कुछ राशि के लोंगों के लिए जन्माष्टमी का त्योहार बहुत लकी साबिक होगा, जनके बारे में आपको भी जानना चाहिए। कुंभ राशि, सिंह राशि, वृषभ राशि, मेष राशि, इन चार राशियों के जातक के लिए यह त्योहार बेहद खास रहने वाला है।
Janmashtami 2024
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कृष्ण जन्माष्टमी के दिन अष्टमी तिथि कब से कब तक-
अष्टमी तिथि आरम्भ: 26 अगस्त, 2024, प्रातः 03:39 बजे लग जाएगी
अष्टमी तिथि समाप्त: 27 अगस्त, 2024, प्रातः 02:19 बजे होगी
कृष्ण जन्माष्टमी की पूजा का शुभ समय
निशिता पूजा (रात के समय) का समय: 27 अगस्त को रात 12:01 मिनट से 12:45 मिनट तक
आप इस दौरान 45 मिनट के शुभ मुहूर्त में कान्हा जी की आराधना कर सकते हैं और उनका जन्मोत्सव मना सकते हैं।
पारण का समय : 27 अगस्त को रात 12: 45 मिनट पर रहेगा
मथुरा, उत्तर प्रदेश: श्री कृष्ण जन्माष्टमी के अवसर पर श्री कृष्ण जन्मस्थान मंदिर में सुबह की आरती की गई
कृष्णा जन्माष्टमी की शुभकामना
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हाथी घोड़ा पालकी, जय कन्हैया लाल की
कृष्ण जन्माष्टमी की हार्दिक शुभकामनाएं
#WATCH | मथुरा, उत्तर प्रदेश: श्री कृष्ण जन्मस्थान मंदिर में श्री कृष्ण जन्माष्टमी के अवसर पर उत्सव जोरों पर है
पूजा विधि
Krishna Janmashtami 2024
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- जन्माष्टमी के दिन ब्रह्ममुहूर्त में उठकर स्नान करें और व्रत रखने का संकल्प लें।
- पूजा की शुरुआत से पहले घर और मंदिर को साफ करें।
- लड्डू गोपाल जी का पंचामृत व गंगाजल से अभिषेक करें।
- फिर उन्हें नए सुंदर वस्त्र, मुकुट, मोर पंख और बांसुरी आदि से सजाएं। पीले चंदन का तिलक लगाएं।
- माखन -मिश्री, पंजीरी, पंचामृत, ऋतु फल और मिठाई आदि चीजों का भोग लगाएं।
- कान्हा के वैदिक मंत्रों का जाप पूरे दिन मन ही मन करें।
- आरती से पूजा का समापन करें। अंत में शंखनाद करें। इसके बाद प्रसाद का वितरण करें।
- अगले दिन प्रसाद से अपने व्रत का पारण करें। पूजा में हुई गलतियों के लिए क्षमा मांगे।
भगवान श्रीकृष्ण के 108 नाम
कृष्ण जन्माष्टमी की तस्वीरें
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1. ॐ परात्पराय नमः
2. ॐ सर्वग्रह रुपिणे नमः
3. ॐ सर्वभूतात्मकाय नमः
4. ॐ दयानिधये नमः
5. ॐ वेदवेद्याय नमः
6. ॐ तीर्थकृते नमः
7. ॐ पुण्य श्लोकाय नमः
8. ॐ पन्नगाशन वाहनाय नमः
9. ॐ परब्रह्मणे नमः
10. ॐ नारायणाय नमः
11. ॐ दानवेन्द्र विनाशकाय नमः
12. ॐ यज्ञभोक्त्रे नमः
13. ॐ दामोदराय नमः
14. ॐ गीतामृत महोदधये नमः
15. ॐ अव्यक्ताय नमः
16. ॐ पार्थसारथये नमः
17. ॐ बर्हिबर्हावतंसकाय नमः
18. ॐ युधिष्ठिर प्रतिष्ठात्रे नमः
19. ॐ बाणासुर करान्तकाय नमः
20. ॐ वृषभासुर विध्वंसिने नमः
21. ॐ वेणुनाद विशारदाय नमः
22. ॐ जगन्नाथाय नमः
23. ॐ जगद्गुरवे नमः
24. ॐ भीष्ममुक्ति प्रदायकाय नमः
25. ॐ विष्णवे नमः
26. ॐ सुभद्रा पूर्वजाय नमः
27. ॐ जयिने नमः
28. ॐ सत्यभामारताय नमः
29. ॐ सत्य सङ्कल्पाय नमः
30. ॐ सत्यवाचे नमः
31. ॐ विश्वरूपप्रदर्शकाय नमः
32. ॐ विदुराक्रूर वरदाय नमः
33. ॐ दुर्येधनकुलान्तकाय नमः
34. ॐ शिशुपालशिरश्छेत्रे नमः
35. ॐ कृष्णाव्यसन कर्शकाय नमः
36. ॐ अनादि ब्रह्मचारिणे नमः
37. ॐ नाराकान्तकाय नमः
38. ॐ मुरारये नमः
39. ॐ कंसारये नमः
40. ॐ संसारवैरिणे नमः
41. ॐ परमपुरुषाय नमः
42. ॐ मायिने नमः
43. ॐ कुब्जा कृष्णाम्बरधराय नमः
44. ॐ नरनारयणात्मकाय नमः
45. ॐ स्यमन्तकमणेर्हर्त्रे नमः
46. ॐ तुलसीदाम भूषनाय नमः
47. ॐ बृन्दावनान्त सञ्चारिणे नमः
48. ॐ बलिने नमः
49. ॐ द्वारकानायकाय नमः
50. ॐ मथुरानाथाय नमः
51. ॐ मधुघ्ने नमः
52. ॐ कञ्जलोचनाय नमः
53. ॐ कामजनकाय नमः
54. ॐ निरञ्जनाय नमः
55. ॐ अजाय नमः
56. ॐ सर्वपालकाय नमः
57. ॐ गोपालाय नमः
58. ॐ गोवर्थनाचलोद्धर्त्रे नमः
59. ॐ पारिजातापहारकाय नमः
60. ॐ पीतवसने नमः
61. ॐ वनमालिने नमः
62. ॐ वनमालिने नमः
63. ॐ यादवेंद्राय नमः
64. ॐ यदूद्वहाय नमः
65. ॐ यादवेंद्राय नमः
66. ॐ परंज्योतिषे नमः
67. ॐ इलापतये नमः
68. ॐ कोटिसूर्यसमप्रभाय नमः
69. ॐ योगिने नमः
70. ॐ गोपगोपीश्वराय नमः
71. ॐ तमालश्यामलाकृतिये नमः
72. ॐ उत्तलोत्तालभेत्रे नमः
73. ॐ यमलार्जुनभञ्जनाय नमः
74. ॐ तृणीकृत तृणावर्ताय नमः
75. ॐ धेनुकासुरभञ्जनाय नमः
76. ॐ अनन्ताय नमः
77. ॐ वत्सवाटिचराय नमः
78. ॐ योगिनांपतये नमः
79. ॐ गोविन्दाय नमः
80. ॐ शुकवागमृताब्दीन्दवे नमः
81. ॐ मधुराकृतये नमः
82. ॐ त्रिभङ्गिने नमः
83. ॐ षोडशस्त्रीसहस्रेशाय नमः
84. ॐ मुचुकुन्दप्रसादकाय नमः
85. ॐ नवनीतनटनाय नमः
86. ॐ नवनीतविलिप्ताङ्गाय नमः
87. ॐ सच्चिदानन्दविग्रहाय नमः
88. ॐ नन्दव्रजजनानन्दिने नमः
89. ॐ शकटासुरभञ्जनाय नमः
90. ॐ पूतनाजीवितहराय नमः
91. ॐ बलभद्रप्रियनुजाय नमः
92. ॐ यमुनावेगासंहारिणे नमः
93. ॐ नन्दगोपप्रियात्मजाय नमः
94. ॐ श्रीशाय नमः
95. ॐ देवकीनन्दनाय नमः
96. ॐ सङ्खाम्बुजायुदायुजाय नमः
97. ॐ चतुर्भुजात्तचक्रासिगदा नमः
98. ॐ हरिये नमः
99. ॐ यशोदावत्सलाय नमः
100. ॐ श्रीवत्सकौस्तुभधराय नमः
101. ॐ लीलामानुष विग्रहाय नमः
102. ॐ पुण्याय नमः
103. ॐ वसुदेवात्मजाय नमः
104. ॐ सनातनाय नमः
105. ॐ वासुदेवाय नमः
106. ॐ कमलनाथाय नमः
107. ॐ कृष्णाय नमः
108. ॐ ॐ अनंताय नमः
राशि के अनुसार लड्डूगोपाल का श्रृंगार
Krishna Janmashtami 2024
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Krishna Janmashtami Ki Hardik Shubhkamnaein: पुण्य लाभ के लिए पूजा-अर्चना में आराध्य देवता के साथ ग्रहों की प्रसन्नता भी जरूरी है। राशि के स्वामी से संबंधित देवी या देवता जातक के लिए विशेष लाभदायक होते हैं और उनकी उपासना से मनचाहा फल प्राप्त होता है। यदि भक्त अपनी राशि के अनुसार वस्त्रों से भगवान का शृंगार और पूजन करें तो भगवान श्रीकृष्ण के साथ-साथ राशि के स्वामी भी प्रसन्न और ग्रह-नक्षत्र अनुकूल होकर अशुभ फल में कमी करते हैं।
मेष : इस राशि का स्वामी मंगल है। इसलिए मेष राशि वाले भगवान श्रीकृष्ण को लाल रंग के वस्त्र धारण कराएं और घर की झांकी में अधिक से अधिक लाल रंग का उपयोग करें।
वृष : इस राशि का स्वामी शुक्र है। इसलिए वृष राशि वाले श्रीकृष्ण को चटक सफेद रंग के वस्त्र धारण कराएं और घर की झांकी में अधिक से अधिक सफेद रंग का उपयोग करें।
मिथुन : इस राशि का स्वामी बुध है। इसलिए इस राशि के लोग भगवान श्रीकृष्ण को हरे रंग के वस्त्र धारण कराएं और घर की झांकी में अधिक से अधिक हरे रंग का उपयोग करें।
कर्क : इस राशि का स्वामी चंद्रमा है। इसलिए कर्क राशि वाले भगवान श्रीकृष्ण को श्वेत रंग के वस्त्र धारण कराएं और घर की झांकी में अधिक से अधिक श्वेत रंग का उपयोग करें।
सिंह : इस राशि का स्वामी सूर्य है। इसलिए सिंह राशि वाले भगवान श्रीकृष्ण को लाल, गुलाबी रंग के वस्त्र धारण कराएं और घर की झांकी में लाल एवं गुलाबी रंग का उपयोग करें।
कन्या : इस राशि का स्वामी बुध है। इसलिए कन्या राशि वाले भगवान श्रीकृष्ण को हरे रंग के वस्त्रों से सुशोभित करें और घर की झांकी में अधिक से अधिक हरे रंग का उपयोग करें।
तुला : इस राशि का स्वामी शुक्र है। इसलिए तुला राशि वाले श्रीकृष्ण को चटक सफेद रंग के वस्त्रों से सुशोभित करें और झांकी में अधिक से अधिक सफेद रंग का उपयोग करें।
वृश्चिक : इस राशि का स्वामी मंगल है। इसलिए वृश्चिक राशि के लोग श्रीकृष्ण को लाल रंग के वस्त्रों से सुशोभित करें और घर की झांकी में अधिक से अधिक लाल रंग का उपयोग करें।
धनु : इस राशि का स्वामी बृहस्पति है। इसलिए धनु राशि वाले भगवान श्रीकृष्ण को पीले रंग के वस्त्र धारण कराएं और घर की झांकी में अधिक से अधिक पीले रंग का प्रयोग करें।
मकर : इस राशि का स्वामी शनि है। इसलिए मकर राशि वाले भगवान श्रीकृष्ण को श्याम वर्ण के वस्त्र धारण कराएं और घर की झांकी में श्याम रंग का उपयोग करें।
कुंभ : इस राशि का स्वामी भी शनि है। इसलिए कुंभ राशि वाले श्रीकृष्ण को श्याम वर्ण के वस्त्रों से सुशोभित करें और घर की झांकी में श्याम रंग का उपयोग करें।
मीन : इस राशि का स्वामी बृहस्पति है। इसलिए मीन राशि वाले भगवान श्रीकृष्ण को पीले रंग के वस्त्रों से सुशोभित करें और झांकी में अधिक से अधिक पीले रंग का उपयोग करें।
Krishna Janmashtami 2024: इस शुभ योग में मनाया जाएगा श्री कृष्ण जन्मोत्सव, जानें महत्व और पूजा विधि
Krishna Janmashtami 2024
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Shri Krishna Janmashtami Wishes: इस वर्ष कृष्ण जन्मोत्सव का त्योहार 26 अगस्त 2024 को मनाया जा रहा है। इस खास दिन पर कई शुभ योग का निर्माण हो रहा है, जिनमें सर्वार्थ सिद्धि योग और जयंती योग का नाम मुख्य रूप से शामिल है। इस दिन चंद्रमा वृषभ राशि में मौजूद रहेंगे। वहीं बालव और कौलव करण के साथ कृत्तिका नक्षत्र का संयोग बन रहा है, जो इस तिथि की महत्ता अधिक बढ़ा रहा है। ऐसे में आप सभी कृष्ण भक्तों और रिश्तेदारों को कृष्ण जन्मोत्सव की शुभकामनाएं दे सकते हैं।
माखन चोर नन्द किशोर
बांधी जिसने प्रीत की डोर
हरे कृष्ण हरे मुरारी
पूजती जिन्हे दुनिया सारी।
कृष्ण जन्माष्टमी की हार्दिक शुभकामनाएं
krishna janmashtami 2024
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जन्माष्टमी पर लगाएं पंजीरी का भोग
जन्माष्टमी के दिन कान्हा जी के लिए विशेष रूप से धनिया पंजीरी का भोग लगाया जाता है। कान्हाजी को धनिये की पंजीरी का भोग बहुत प्रिय है इसलिए इस दिन उन्हें प्रसाद के रूप में धनिये की पंजीरी चढ़ाई जाती है।
Krishna Janmashtami 2024: जन्माष्टमी पर कान्हा जी को क्यों लगाया जाता है धनिया की पंजीरी का भोग? जानें
जन्माष्टमी पर झांकी सजाने के नियम और लाभ
झांकी सजाने के नियम
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Happy Krishna Janmashtami Wallpaper: जन्माष्टमी को किसी त्योहार के रूप में नहीं बल्कि उत्सव के रूप में मनाया जाता है। यह एक ऐसा पर्व है जो हमारे जीवन से नकारात्मकता को दूर कर सकारात्मक ऊर्जा प्रदान करता है। जन्माष्टमी पर झांकी सजाने का उद्देश्य केवल नियम मात्र नहीं होता, बल्कि इसके कई लाभ भी हैं। आइए जानते हैं जन्माष्टमी पर झांकी सजाने के नियम और उससे जुड़े लाभ के बारे में।
- जन्माष्टमी पर मोर पंख से झांकी सजाने से कालसर्प दोष से मुक्ति मिलती है। आप मोरपंख को कान्हा के मुकुट या झूले आदि पर सजा सकते हैं। मोर पंख कृष्ण की प्रिय वस्तुओं में एक है।
- भाग्योदय या भाग्य में वृद्धि के लिए जन्माष्टमी पर झांकी में गाय और बछड़े की मूर्ति या तस्वीरें भी रखें। साथ ही झांकी तैयार करने के लिए वैजयंती फूलों का भी प्रयोग करें। इन चीजों से कान्हा को अत्यधिक लगाव है।
- जन्माष्टमी पर झांकी तैयार करने में श्रीकृष्ण के प्रिय वस्तुओं का प्रयोग करना सबसे अच्छा होता है। इसलिए आप बांसुरी का प्रयोग जरूर करें। आप झूले या मूर्ति के पास बांसुरी जरूर रखें। इससे घर पर सुख-शांति बनी रहती है और सभी परेशानियों का नाश होता है
Krishna Janmashtami 2024: कृष्ण जन्माष्टमी पर घर में सजाते हैं झांकी, जानें इसके नियम
धन लाभ के लिए जन्माष्टमी पर करें ये उपाय
- जन्माष्टमी पर पूजा के दौरान ''क्लीं कृष्णाय वासुदेवाय हरये:परमात्मने प्रणत:क्लेशनाशाय गोविंदाय नमो नमः'' मंत्र का जाप करने से शत्रु का भय कम होता है।
- अगर आप आर्थिक समस्याओं से जूझ रहे हैं, तो जन्माष्टमी के शुभ अवसर पर कान्हा जी का केसर मिश्रित दूध से अभिषेक करें। ऐसा करने पर आर्थिक परेशानियों का निवारण होता है।
Krishna Janmashtami 2024: वैवाहिक जीवन में खुशियां और धन लाभ के लिए जन्माष्टमी पर करें ये पांच उपाय
भगवान श्रीकृष्ण को अर्पित करें प्रिय फूल
- लड्डू गोपाल के हृदय में कमल के फूल का अहम स्थान माना जाता है। अगर आप प्रभु की कृपा प्राप्त करना चाहते हैं, तो जन्माष्टमी की पूजा के दौरान उन्हें कमल के फूल जरूर अर्पित करें। इससे साधक और परिवार के सभी सदस्यों को सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है।
- चमेली के फूल को अच्छी सुगंध के लिए जाना जाता है। ऐसे में आप पूजा थाली में चमेली के फूल को जरूर शामिल करें। ऐसा करने से आध्यात्मिक भक्ति में वृद्धि होती है।
- इसके अलावा लड्डू गोपाल को पलाश, करवरी और गेंदे के फूल अर्पित कर सकते हैं। इन सभी फूलों को अर्पित करने से लड्डू प्रसन्न होंगे और जीवन में खुशियों का आगमन होगा। साथ ही साधक को करियर में सफलता प्राप्त होगी।
इस सरल विधि से करें जन्माष्टमी व्रत का पारण
- जो लोग जन्माष्टमी का व्रत कर रहे हैं, उन्हें इस व्रत का पारण समय और विधि अनुसार करना चाहिए।
- सबसे पहले भगवान कृष्ण की विधिपूर्वक पूजा करें और उन्हें प्रणाम करें।
- फिर पूजा में चढ़ाए गए प्रसाद जैसे- माखन, मिश्री, खीरा या पंजीरी आदि को ग्रहण करें।
- इसके बाद सात्विक भोजन करें, जिसमें लहसून, प्याज न हो।
- इसके साथ ही भगवान का आभार प्रकट करें।
जन्माष्टमी व्रत के नियम
जन्माष्टमी
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1. जन्माष्टमी का व्रत रखने वाले व्रतियों को पूरे दिन ब्रह्मचर्य के नियमों का पालन करना चाहिए।
2. जन्माष्टमी के व्रत में भूलकर भी अन्न ग्रहण नहीं करना चाहिए।
3. जन्माष्टमी का व्रत रात को 12 बजे भगवान का जन्म करवाने के बाद खोलना चाहिए। कुछ लोग जन्माष्टमी के व्रत का पारण अगले दिन सूर्योदय के बाद करते हैं।
4. जन्माष्टमी के शुभ अवसर पर आपको भगवान कृष्ण के किसी मंदिर में जाकर दर्शन जरूर करने चाहिए।
5. जन्माष्टमी के दिन सुबह और रात में श्री कृष्ण भगवान की विधि विधान पूजा करनी चाहिए.
6. जन्माष्टमी के दिन भगवान को जिन चीजों का भोग लगाएं उन्हीं वस्तुओं को प्रसाद के रूप में ग्रहण करके व्रत खोलना चाहिए।
7. व्रत रखने वालों को गलती से भी दिन में सोना नहीं चाहिए।
8. किसी को अपशब्द नहीं बोलने चाहिए।
जन्माष्टमी के उपाय
अगर आप संतान सुख की प्राप्ति से वंचित हैं, तो ऐसे में जन्माष्टमी के दिन किए गए उपाय आपके लिए बेहद कारगार साबित होंगे। इस शुभ तिथि पर पति और पत्नी लड्डू गोपाल की विधिपूर्वक पूजा-अर्चना करें और माखन मिश्री का भोग लगाएं। अंत में प्रभु से संतान प्राप्ति के लिए कामना करें। साथ ही व्रत रखें। मान्यता है कि इस उपाय को सच्चे मन से करने से संतान की प्राप्ति होती है।
Krishna Janmashtami 2024: जन्माष्टमी पर किस रंग के कपड़े पहनकर करें भगवान श्रीकृष्ण की पूजा, जानें महत्व
जन्माष्टमी पूजा मंत्र विधि विधान सहित
शुद्धि मंत्र: -
ओम अपवित्रः पवित्रोवा सर्वावस्थां गतोअपि वा। यः स्मरेत पुण्डरीकाक्षं स बाह्याभ्यन्तरः शुचिः।। जल को स्वयं पर और पूजन सामग्री पर छींटे लगाकर पवित्र करें। इसके बाद पूजा का आरंभ विधि विधान सहित करे।
श्रीकृष्ण ध्यान मंत्र
वसुदेव सुतं देव कंस चाणूर मर्दनम्। देवकी परमानंदं कृष्णं वन्दे जगद्गुरुम्।। हे वसुदेव के पुत्र कंस और चाणूर का अंत करने वाले, देवकी को आनंदित करने वाले और जगत में पूजनीय श्रीकृष्ण आपको नमस्कार है। - इस मंत्र से भगवान श्री कृष्ण का ध्यान करके फूल भगवान श्रीकृष्ण के चरणों में निवेदित करें।
जन्माष्टमी 2024 पूजन संकल्प मंत्र :
‘यथोपलब्धपूजनसामग्रीभिः कार्य सिद्धयर्थं कलशाधिष्ठित देवता सहित, श्रीजन्माष्टमी पूजनं महं करिष्ये। - हाथ में पान का पत्ता कम से कम एक रुपये का सिक्का, जल, अक्षत, फूल, फल लेकर भी यह संकल्प मंत्र बोलें, फिर हाथ में रखी हुई सामग्री की भगवान श्री कृष्ण के चरणों में अर्पित करें।
भगवान श्रीकृष्ण आवाहन मंत्रः
बिना आह्वान किए भगवान की पूजा पूरी नहीं हो पाती है। आह्वान का मतलब होता है भगवान को बुलाना। और जब आप भगवान को बुलाएंगे ही नहीं तो पूजा कैसे स्वीकार करेंगे भगवान इसलिए आह्वान किया जाता है।
आवाहन करने की विधि और मंत्र, हाथ में तिल जौ लेकर मूर्ति में भगवान का आवाहन करना चाहिए, आवाहन मंत्र- अनादिमाद्यं पुरुषोत्तमोत्तमं श्रीकृष्णचन्द्रं निजभक्तवत्सलम्। स्वयं त्वसंख्याण्डपतिं परात्परं राधापतिं त्वां शरणं व्रजाम्यहम्।। - तिल जौ को भगवान की प्रतिमा पर छोड़ें।
भगवान श्रीकृष्ण को आसन देने का मंत्र :
अर्घा में जल लेकर बोलें- रम्यं सुशोभनं दिव्यं सर्वासौख्यकरं शुभम्। आसनं च मया दत्तं गृहाण परमेश्वर।। जल छोड़ें।
भगवान श्री कृष्ण को को अर्घ्य देने का मंत्र :
अर्घा में जल लेकर बोलें - अर्घ्यं गृहाण देवेश गन्धपुष्पाक्षतैः सह। करुणां करु मे देव! गृहाणार्घ्यं नमोस्तु ते।। जल छोड़ें।
भगवान श्रीकृष्ण का आचमन करवाने का मंत्र :
अर्घा में जल और गंध मिलाकर बोलें - सर्वतीर्थसमायुक्तं सुगन्धं निर्मलं जलम्। आचम्यतां मया दत्तं गृहत्वा परमेश्वर।। जल छोड़ें।
जन्माष्टमी के त्योहार के लिए लाल रंग को बेहद शुभ माना जाता है। बहुत से ज्योतिषाचार्य लाल और पीले रंग के कपड़े को पहनने का सुझाव देते हैं। लाल रंग ऊर्जा और साहस का प्रतीक भी माना जाता है। लाल रंग को मंगल ग्रह से भी जोड़ कर देखा जाता है। ऐसे में इस साल कृष्ण जन्माष्टमी के त्योहार पर लाल रंग के कपड़े पहनते हैं तो आपके जीवन में भी अकूत उत्साह और ऊर्जा की वृद्धि होगी।
जन्माष्टमी पर करें इस स्तोत्र का पाठ
सानन्दं सुन्दरं शुद्धं श्रीकृष्णं प्रकृतेः परम् ॥
राधेशं राधिकाप्राणवल्लभं वल्लवीसुतम् ।
राधासेवितपादाब्जं राधावक्षस्थलस्थितम् ॥
राधानुगं राधिकेष्टं राधापहृतमानसम् ।
राधाधारं भवाधारं सर्वाधारं नमामि तम् ॥
राधाहृत्पद्ममध्ये च वसन्तं सन्ततं शुभम् ।
राधासहचरं शश्वत् राधाज्ञापरिपालकम् ॥
ध्यायन्ते योगिनो योगान् सिद्धाः सिद्धेश्वराश्च यम् ।
तं ध्यायेत् सततं शुद्धं भगवन्तं सनातनम् ॥
निर्लिप्तं च निरीहं च परमात्मानमीश्वरम् ।
नित्यं सत्यं च परमं भगवन्तं सनातनम् ॥
यः सृष्टेरादिभूतं च सर्वबीजं परात्परम् ।
योगिनस्तं प्रपद्यन्ते भगवन्तं सनातनम् ॥
बीजं नानावताराणां सर्वकारणकारणम् ।
वेदवेद्यं वेदबीजं वेदकारणकारणम् ॥
योगिनस्तं प्रपद्यन्ते भगवन्तं सनातनम् ।
गन्धर्वेण कृतं स्तोत्रं यः पठेत् प्रयतः शुचिः ।
इहैव जीवन्मुक्तश्च परं याति परां गतिम् ॥
हरिभक्तिं हरेर्दास्यं गोलोकं च निरामयम् ।
पार्षदप्रवरत्वं च लभते नात्र संशयः ॥
।।श्रीकृष्ण स्तुति।।
भये प्रगट कृपाला दीन दयाला,यशुमति के हितकारी, हर्षित महतारी रूप निहारी, मोहन मदन मुरारी।
कंसासुर जाना अति भय माना, पूतना बेगि पठाई, सो मन मुसुकाई हर्षित धाई, गई जहां जदुराई।
तेहि जाइ उठाई ह्रदय लगाई, पयोधर मुख में दीन्हें, तब कृष्ण कन्हाई मन मुसुकाई, प्राण तासु हरि लीन्हें।
जब इन्द्र रिसाये मेघ बुलाये, वशीकरण ब्रज सारी, गौवन हितकारी मुनि मन हारी, नखपर गिरिवर धारी।
कंसासुर मारे अति हंकारे, वत्सासुर संहारे, बक्कासुर आयो बहुत डरायो, ताकर बदन बिडारे।
अति दीन जानि प्रभु चक्रपाणी, ताहि दीन निज लोका, ब्रह्मासुर राई अति सुख पाई, मगन हुए गए शोका।
यह छन्द अनूपा है रस रूपा, जो नर याको गावै, तेहि सम नहिं कोई त्रिभुवन मांहीं, मन-वांछित फल पावै।
दोहा- नन्द यशोदा तप कियो, मोहन सो मन लाय तासों हरि तिन्ह सुख दियो, बाल भाव दिखलाय।
जन्माष्टमी व्रत करने वाले जरूर करें इस कथा का पाठ
पूर्वकाल में हरिश्चन्द्र नायक एक चक्रवर्ती राजा हो गये है। उनपर संतुष्ट होकर ब्रह्माजी ने उन्हें एक सुन्दर पुरी प्रदान की, जो समस्त कामनाओं को पूर्ण करने वाली थी। उसमें रहकर राजा हरिश्चन्द्र सात द्वीपों से युक्त वसुन्धरा का धर्म पूर्वक पालन करते थे। प्रजा को वे औरस पुत्र की भाँति मानते थे । राजा के पास धन-धान्य की अधिकता थी। उन्हें नाती- पोतो की भी कमी न थी। अपने उत्तम राज्य का पालन करते हुए राजा को एक दिन बड़ा विस्मय हुआ। वे सोचने लगे ' आज के पहले कभी किसी को ऐसा राज्य नहीं मिला था। मेरे सिवा दूसरे मनुष्यों ने ऐसे विमान पर सवारी नहीं की होगी। यह मेरे किस कर्म का फल है, जिससे मैं देवराज इन्द्र के समान सुखी हूं ?'
राजाओं में श्रेष्ठ हरिश्चन्द्र इस प्रकार सोच-विचारकर अपने उत्तम विमान पर आकाश मार्ग से जाते समय पर्वतों में श्रेष्ठ मेरु पर उनकी दृष्टि पड़ी। उस श्रेष्ठ शैल पर झनयोग-परायण महर्षि सनकुमार दिखायी पड़े, जो सुवर्णमयी शिला के ऊपर विराजमान थे। उन्हें देखकर राजा अपना विस्मय पूछने के लिये उतर पड़े। उन्होंने पास जा मुनि के चरणों में मस्तक झुकाया । महर्षि ने भी राजा का अभिनन्दन किया। फिर सुखपूर्वक बैठकर राजा ने मुनिश्रेष्ठ सनत्कुमारजी से पूछा- 'भगवन् ! मुझे जो यह सम्पत्ति प्राप्त हुई है. मानवलोक में प्रायः दुर्लभ है। ऐसी सम्पत्ति किस कर्म से प्राप्त होती है? मैं पूर्वजन्म में कौन था ? ये सब बातें यथार्थ रूप से बतलाइये ।'
सनत्कुमार जी बोले- राजन् ! सुनो - तुम पूर्व जन्म में सत्यवादी, पवित्र एवं उत्तम वैश्य थे। तुमने अपना काम-धाम छोड़ दिया था, इसलिये बन्धु-वान्धवों ने तुम्हारा परित्याग कर दिया। तुम्हारे पास जीविका का कोई साधन नहीं रह गया था, इसलिए तुम स्वजनों को छोड़कर चल दिये। एक समय तुम किसी जङ्गल में जा पहुंचे। वहां एक पोखर में कमल खिले हुए थे। उन्हें देखकर तुम दोनों के मन में यह विचार उठा कि हम यहां से कमल ले लें। कमल लेकर तुम दोनों एक-एक पग भूमि लांघते हुए शुभ एवं पुण्यमयी वाराणसी पुरी में पहुंचे। वहां तुम लोग कमल बेचने लगे किंतु कोई भी उन्हें खरीदता नहीं था। वहीं खड़े-खड़े तुम्हारे कानों में बाजे की आवाज सुनाई पड़ी। फिर तुम उसी ओर चल दिये। वहां काशी के विख्यात राजा इन्द्रद्युम्न की सती-साध्वी कन्या चन्द्रावती ने, जो बड़ी सौभाग्यशालिनी थी, जयन्ती नामक जन्माष्टमी का शुभ कारक व्रत किया था। उस स्थान पर तुम बड़े हर्ष के साथ गए। वहां पहुंचने पर तुम्हारा चित्त संतुष्ट हो गया।
तुमने वहां भगवान के पूजन का विधान देखा। कलश के ऊपर श्रीहरि की स्थापना करके उनकी पूजा हो रही थी। विशेष समारोह के साथ भगवान् का पूजन किया गया था, भित्र-भिन्न पुष्पों से उनका शृंगार हुआ था। भगवान की भक्ति के वशीभूत हो तुमने भी अपनी पुत्री के साथ कमल के फूलो से वहां श्रीहरि का पूजन किया तथा पूजा से बचे हुए फूलों को उनके समीप ही बिखेर दिया। तुमने भगवान् को पुष्पमय कर दिया। इससे उस कन्या को बड़ा संतोष हुआ। वह स्वयं तुम्हें धन देने लगी, किन्तु तुमने नहीं लिया। तब राजकुमारी ने तुम्हें भोजन के लिये निमन्त्रित किया; किन्तु उस समय तुमने न तो भोजन स्वीकार किया और न धन ही लिया। यही पुण्य तुमने पिछले जन्म में उपार्जित किया था। फिर अपने कर्म के अनुसार तुम्हारी मृत्यु हो गयी। उसी महान् पुण्य के प्रभाव से तुम्हें विमान मिला है। राजन् । पूर्व जन्म में जो तुम्हारे द्वारा वह पुण्य हुआ था, उसी का फल इस समय तुम भोग रहे हो।
भगवान श्रीकृष्ण के मंत्र
1. ॐ कृष्णाय नमः
2. हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे ।
हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे ।।
3. ॐ श्री कृष्णः शरणं ममः
4. ॐ देव्किनन्दनाय विधमहे वासुदेवाय धीमहि तन्नो कृष्ण:प्रचोदयात
5. ॐ नमो भगवते तस्मै कृष्णाया कुण्ठमेधसे।
सर्वव्याधि विनाशाय प्रभो माममृतं कृधि।।
कृष्ण जन्माष्टमी पूजा सामग्री
Krishna Janmashtami 2024 Puja Samagri List
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- भगवान कृष्ण की मूर्ति या चित्र
- चौकी और लाल या पीला कपड़ा, पूजा की थाली
- रुई, दीपक, तेल, अगरबत्ती, कपूर और धूप
- फूल, गेंदे का फूल, तुलसी दल, केले के पत्ते, सुपारी, पान के पत्ते, गुलाब के फूल
- मिठाई (लड्डू, पेड़ा), फल, दही, मक्खन, मिश्री, पंच मेवा, दही, पंजीरी
- पंचामृत (दही, दूध, घी, शहद और चीनी का मिश्रण)
- गंगाजल, इत्र की शीशी, चंदन, कुमकुम अक्षत और शुद्ध जल
- लड्डू गोपाल के लिए श्रृंगार का सामान (बांसुरी, कुंडल, पगड़ी, कड़े, माला, टीका, पाजेब या कमरबंध, काजल, मोर पंख )
- कान्हा जी के लिए झूला और मोरपंख
जन्माष्टमी पर करें इस मंत्र का जाप
Krishna Janmashtami 2024
- फोटो : अमर उजाला
ॐ देविकानन्दनाय विधमहे वासुदेवाय धीमहि तन्नो कृष्ण:प्रचोदयात
Krishna Janmashtami 2024: कुछ मिनटों में शुरू होगा रोहिणी नक्षत्र
भगवान श्रीकृष्ण का जन्म रोहिणी नक्षत्र में हुआ था। रोहिणी नक्षत्र की शुरुआत शाम 3 बजकर 54 मिनट से होगी और समापन कल यानी 27 अगस्त को शाम 3 बजकर 39 मिनट पर होगा।
Krishna Janmashtami 2024: रोहिणी नक्षत्र शुरू, इस दौरान जरूर करें ये 2 काम
धार्मिक कथाओं के मुताबिक भगावन श्री कृष्ण का जन्म रोहिणी नक्षत्र में हुआ था। इसीलिए जन्माष्टमी पर रोहिणी नक्षत्र का विशेष महत्व है। इस दौरान हर भक्त को ये दो काम जरूर करना चाहिए।
- भजन-कीर्तन: भगवान श्री कृष्ण के भजन-कीर्तन करना भी एक अच्छा विचार है। इससे वातावरण में पवित्रता आती है और मन शांत होता है।
- कथा सुनना: रोहिणी नक्षत्र में श्रीमद्भगवद्गीता या श्री कृष्ण के अन्य जीवन से जुड़ी कथाएं सुनना भी लाभदायक होता है।
Krishna Janmashtami Shubh Muhurat 2024: जन्माष्टमी पूजा मुहूर्त 2024
पंचांग की गणना के मुताबिक श्रीकृष्ण जन्माष्टमी का पूजा का मुहूर्त आज रात 12 बजे से लेकर 12 बजकर 44 मिनट तक रहेगा।
Janmashtami 2024: सीएम भजनलाल शर्मा ने जन्माष्टमी पर बाल गोपाल का किया दर्शन
राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने जन्माष्टमी के अवसर पर मुकुट मुखारविंद मंदिर में बाल गोपल का किया दर्शन-
Krishna Janmashtami 2024 Aarti: कृष्ण जन्माष्टमी पर करें ये आरती, सभी मनोकामनाएं होंगे पूर्ण
Krishna Janmashtami 2024
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श्रीकृष्ण की आरती
आरती कुंजबिहारी की,श्री गिरिधर कृष्ण मुरारी की ॥
आरती कुंजबिहारी की,श्री गिरिधर कृष्ण मुरारी की ॥
गले में बैजंती माला, बजावै मुरली मधुर बाला
श्रवण में कुण्डल झलकाला,नंद के आनंद नंदलाला
गगन सम अंग कांति काली, राधिका चमक रही आली
लतन में ठाढ़े बनमाली भ्रमर सी अलक, कस्तूरी तिलक
चंद्र सी झलक, ललित छवि श्यामा प्यारी की,
श्री गिरिधर कृष्ण मुरारी की, आरती कुंजबिहारी की…॥
कनकमय मोर मुकुट बिलसै, देवता दरसन को तरसैं।
गगन सों सुमन रासि बरसै, बजे मुरचंग, मधुर मिरदंग ग्वालिन संग।
अतुल रति गोप कुमारी की, श्री गिरिधर कृष्णमुरारी की ॥
॥ आरती कुंजबिहारी की…॥
जहां ते प्रकट भई गंगा, सकल मन हारिणि श्री गंगा।
स्मरन ते होत मोह भंगा, बसी शिव सीस।
जटा के बीच,हरै अघ कीच, चरन छवि श्रीबनवारी की
श्री गिरिधर कृष्णमुरारी की ॥ ॥ आरती कुंजबिहारी की…॥
चमकती उज्ज्वल तट रेनू, बज रही वृंदावन बेनू
चहुं दिसि गोपि ग्वाल धेनू
हंसत मृदु मंद, चांदनी चंद, कटत भव फंद।
टेर सुन दीन दुखारी की
श्री गिरिधर कृष्णमुरारी की ॥
॥ आरती कुंजबिहारी की…॥
आरती कुंजबिहारी की
श्री गिरिधर कृष्ण मुरारी की ॥
आरती कुंजबिहारी की
श्री गिरिधर कृष्ण मुरारी की ॥
Janmashtami 2024 Durlabh Sanyog: वर्षों बाद बन रहा है जन्माष्टमी पर यह दुर्लभ संयोग
आज का दिन सभी कृष्ण भक्तों के लिए बहुत ही खास है। इस वर्ष कृष्ण जन्माष्टमी बहुत ही खास मानी जा रही है क्योंकि आज जन्माष्टमी पर कई वर्षों बाद बहुत दुर्लभ संयोग बन रहा है। जन्माष्टमी पर इस बार वही योग बन रहा है, जो द्वापर में बना था। आज यानी 26 अगस्त के दिन चंद्रमा वृषभ राशि में ही विराजमान रहेंगे, माना जाता है कि जब भगवान श्रीकृष्ण का जन्म द्वापर युग में हुआ था तब ऐसा ही योग बना था।
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Janmashtami 2024: जन्माष्टमी पर खीरा का महत्व
जन्माष्टमी पर खीरा का महत्व
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धार्मिक मान्यताओं के मुताबिक खीरा भगवान श्रीकृष्ण को प्रिय है और खीरा का भोग लगाने से भक्तों के सारे दुख दूर होते हैं। इसलिए आज के दिन ऐसा खीरा लाया जाता है, जिसमें थोड़ा डंठल और पत्तियां लगी होती हैं। जन्माष्ठमी पूजा के दिन खीरे के इस्तेमाल के पीछे की मान्यता है कि जब बच्चा पैदा होता है तब उसको मां से अलग करने के लिए गर्भनाल को काटा जाता है, ठीक उसी प्रकार से जन्माष्टमी के दिन खीरे को डंठल से काटकर अलग किया जाता है। ये भगवान श्री कृष्ण को मां देवकी से अलग करने का प्रतीक माना जाता है। यही वजह है कि ऐसा करने के बाद ही बाल गोपाल की विधि विधान से पूजा शुरू की जाती है।
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Krishna Janmashtami 2024
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नन्द के घर आनंद भयो,
जय कन्हैया लाल की,
हाथी घोड़ा पालकी,
जय कन्हैया लाल की।
कृष्ण जन्माष्टमी की हार्दिक शुभकामनाएं
Janmashtami 2024: दिल्ली के इस्कॉन मंदिर में भगवान श्री कृष्ण के दर्शन के लिए भक्तों की उमड़ी भीड़
जन्माष्टमी पर पंजाबी बाग स्थित इस्कॉन मंदिर में भगवान श्री कृष्ण के दर्शन के लिए भक्तों की उमड़ी भीड़। भक्तों ने मंदिर में पूजा-अर्चना की और प्रसाद ग्रहण किया।
Krishna Janmashtami 2024: मणिपुर में धूमधाम से मनाई जा रही है जन्माष्टमी का पर्व
मणिपुर के श्री श्री गोविंदजी मंदिर में धूमधाम से मनाई जा रही है जन्माष्टमी। भक्तों की भारी भीड़ भगवान श्री कृष्ण के दर्शन के लिए उमड़ी है। मंदिर को रंग-बिरंगे फूलों से सजाया गया है और भजन-कीर्तन का आयोजन किया जा रहा है।
Janmashtami 2024: जन्माष्टमी पर क्यों चढ़ाया जाता है धनिया की पंजीरी
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धनिया की पंजीरी का यह प्रसाद भगवान श्री कृष्ण को बहुत प्रिय है। भोग लगाने के बाद ये प्रसाद के तौर पर लोगों में बांटा जाता है। ऐसा माना जाता है कि इस प्रसाद को ग्रहण करने से श्रीकृष्ण की कृपा उनके भक्तों पर बनी रहती है। इस प्रसाद को खाकर श्रद्धालु इस दिन अपना उपवास भी खोलते हैं।
Krishna Janmashtami 2024: दिल्ली के इंदिरा गांधी स्टेडियम में धूमधाम से मनाया गया जन्माष्टमी का पर्व, देखें वीडियो
दिल्ली के इंदिरा गांधी स्टेडियम में जन्माष्टमी के मौके पर दही हांडी का उत्सव धूमधाम से मनाया जा रहा है। युवाओं ने इस दौरान जोश और उत्साह के साथ दही हांडी फोड़ने की कोशिश की। इस मौके पर भारी संख्या में लोग मौजूद हैं।
Janmashtami 2024 Mantra: कृष्ण जन्माष्टमी पर अपनी राशि के अनुसार करें इन मंत्रों का जाप
मेष राशि- ‘ॐ गोविंदाय नमः’
वृषभ राशि- ॐ अनंताय नमः’
मिथुन राशि- ‘ॐ अच्युताय नमः’
कर्क राशि - ‘ॐ माधवाय नमः’
सिंह राशि - ‘ॐ वासुदेवाय नमः’
कन्या राशि - ‘ॐ आदित्याय नमः’
Janmashtami 2024: कृष्ण जन्माष्टमी पर अपनी राशि के अनुसार करें इन मंत्रों का जाप
शेष राशि
तुला राशि - ‘ॐ बलभद्रप्रियनुजाय नमः’
वृश्चिक राशि - ‘ॐ सच्चिदानन्दविग्रहाय नमः’
धनु राशि- ‘ॐ मधुराकृतये नमः’
मकर राशि- ‘ॐ गोपगोपीश्वराय नमः’
कुंभ राशि- ‘ॐ गोपालाय नमः’
मीन राशि- ‘ॐ जगन्नाथाय नमः’
Janmashtami Puja Muhurat, Vidhi in Hindi: जन्माष्टमी पूजा मुहूर्त
आज बाल गोपाल के पूजा का मुहूर्त मध्यरात्रि ठीक 12:00 से लेकर 27 अगस्त की सुबह 12 बजकर 45 मिनट तक रहने वाला है। ऐसे में आपके पास शुभ मुहूर्त में पूजा करने के लिए 45 मिनट का समय है।
Janmashtami 2024: जन्माष्टमी पर क्यों फोड़ते हैं दही हांडी?
कान्हा के बचपन के शरारतों को याद करने के लिए जन्माष्टमी में माखन की मटकी को ऊंचाई पर टांग दिया जाता है। युवा वर्ग के लड़के नाचते-गाते पिरामिड बनाते हुए मटकी तक पहुंचकर उसे फोड़ते हैं। इसे दही हांडी कहते हैं, जो लड़का ऊपर जाकर हांडी फोड़ता है, उसे गोविंदा कहा जाता है।
Janmashtami Mantra 2024: जन्माष्टमी पर कान्हा को प्रसन्न करने के लिए इन मंत्रों करें जाप
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1- ॐ देविकानन्दनाय विधमहे वासुदेवाय धीमहि तन्नो कृष्ण:प्रचोदयात
2- कृं कृष्णाय नमः
3- गोकुल नाथाय नमः
4- ऊं श्रीं नमः श्रीकृष्णाय परिपूर्णतमाय स्वाहा
5- ओम क्लीम कृष्णाय नमः
6- पंचामृत स्नान
“पंचामृतं मयाआनीतं पयोदधि घृतं मधु। शर्करा च समायुक्तं स्नानार्थं प्रतिगृह्यताम्।।
7-स्नान मंत्र
“गंगा, सरस्वती, रेवा, पयोष्णी, नर्मदाजलैः। स्नापितोअसि मया देव तथा शांति कुरुष्व मे।।
Janmashtami Mantra 2024: जन्माष्टमी पर ऐसे सजाएं घर का मंदिर
गुब्बारे और फूलों से सजाएं
जिस तरह बच्चे के जन्मदिन पर गुब्बारे और फूलों से घर को सजाया जाता है ठीक उसी तरह बाल गोपाल का जन्मदिन भी मनाया जाता है। इसलिए आप घर और मंदिर को उसी तरह सजा सकते हैं। रंग बिरंगे गुब्बारों को घर की दीवारों, मंदिर के इर्द गिर्द लगाएं। चाहें तो कृष्ण जन्माष्टमी की सजावट के लिए फूलों का इस्तेमाल भी कर सकते हैं। फूल सजावट के साथ ही पूजा के काम भी आते हैं।
Janmashtami 2024: बाल गोपाल का झूला सजाएं
जन्माष्टमी पर झांकी सजाने का तरीका
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मंदिर और घर सजाने के साथ ही बाल गोपाल का पालना और झूला भी सजाना चाहिए। मध्यरात्रि 12 बजे के बाद यानी जन्म के बाद कान्हा का पालने या झूले में बैठाकर झुलाया जाता है। इसलिए कृष्ण जी के झूले को फूलों से, मोतियों से सजा सकती हैं।
Janmashtami 2024: बाल गोपाल से संबंधित रंगोली बनाएं
जन्माष्टमी पर आप घर के द्वार पर या मंदिर के पास रंगोली बना सकती हैं। त्योहारों पर रंगोली बनाना शुभ माना जाता है, साथ ही इससे घर की सजावट में बढ़ोतरी होती है। किसी भी पर्व में रंगोली बनाकर घर सजाने के साथ ही भगवान को आमंत्रित किया जाता है। इसलिए सुंदर रंगों और कलाकृति से रंगोली बनाकर घर सजा सकते हैं।
Janmashtami 2024: पटना के इस्कॉन मंदिर में भक्तों की उमड़ी भारी भीड़
Bihar: पटना के इस्कॉन मंदिर में जन्माष्टमी के पावन पर्व पर भक्तों की भारी भीड़ उमड़ी है। भक्त भगवान श्री कृष्ण के दर्शन के लिए उत्साहित हैं। मंदिर को रंग-बिरंगे फूलों से सजाया गया है और भजन-कीर्तन का आयोजन किया जा रहा है।
Janmashtami Mantra 2024: जन्माष्टमी पर भगवान श्रीकृष्ण की पूजा के दौरान जरूर करें उनकी आरती
Vat Savitri Vrat 2024
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Aarti Kunj Bihari Ki Lyrics In Hindi: श्रीकृष्ण की आरती
आरती कुंजबिहारी की,श्री गिरिधर कृष्ण मुरारी की ॥
आरती कुंजबिहारी की,श्री गिरिधर कृष्ण मुरारी की ॥
गले में बैजंती माला, बजावै मुरली मधुर बाला
श्रवण में कुण्डल झलकाला,नंद के आनंद नंदलाला
गगन सम अंग कांति काली, राधिका चमक रही आली
लतन में ठाढ़े बनमाली भ्रमर सी अलक, कस्तूरी तिलक
चंद्र सी झलक, ललित छवि श्यामा प्यारी की,
श्री गिरिधर कृष्ण मुरारी की, आरती कुंजबिहारी की…॥
कनकमय मोर मुकुट बिलसै, देवता दरसन को तरसैं।
गगन सों सुमन रासि बरसै, बजे मुरचंग, मधुर मिरदंग ग्वालिन संग।
अतुल रति गोप कुमारी की, श्री गिरिधर कृष्णमुरारी की ॥
॥ आरती कुंजबिहारी की…॥
जहां ते प्रकट भई गंगा, सकल मन हारिणि श्री गंगा।
स्मरन ते होत मोह भंगा, बसी शिव सीस।
जटा के बीच,हरै अघ कीच, चरन छवि श्रीबनवारी की
श्री गिरिधर कृष्णमुरारी की ॥ ॥ आरती कुंजबिहारी की…॥
चमकती उज्ज्वल तट रेनू, बज रही वृंदावन बेनू
चहुं दिसि गोपि ग्वाल धेनू
हंसत मृदु मंद, चांदनी चंद, कटत भव फंद।
टेर सुन दीन दुखारी की
श्री गिरिधर कृष्णमुरारी की ॥
॥ आरती कुंजबिहारी की…॥
आरती कुंजबिहारी की
श्री गिरिधर कृष्ण मुरारी की ॥
आरती कुंजबिहारी की
श्री गिरिधर कृष्ण मुरारी की ॥
Krishna Janmashtami 2024: जन्माष्टमी पूजा का शुभ मुहूर्त
जन्माष्टमी पूजा का शुभ मुहूर्त
पूजा का समय - आज रात ठीक 12 बजे से 12 बजकर 45 मिनट तक
पूजा अवधि - 45 मिनट
पारण का समय - 27 अगस्त दोपहर 3 बजकर 38 मिनट पर
चंद्रोदय समय - आज रात 11 बजकर 20 मिनट पर
जन्माष्टमी पूजन विधि
सबसे पहले 12 बजे के बाद कृष्ण जन्मोत्सव के बाद कान्हा जी का पंचामृत से अभिषेक करें। फिर उन्हें नए वस्त्र पहनाएं। उनका पूरा शृंगार करें। माखन मिश्री का भोग भी लगाएं। विधि अनुसार पूजा करते हुए सुख-समृद्धि की कामना करें।
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Krishna Janmashtami 2024: कृष्ण जन्माष्टमी व्रत का इस सरल विधि से करें पारण, जीवन की हर समस्या होगी दूर
पारण का समय - 27 अगस्त दोपहर 3 बजकर 38 मिनट पर
- जो लोग जन्माष्टमी का व्रत कर रहे हैं, उन्हें इस व्रत का पारण समय और विधि अनुसार करना चाहिए।
- सबसे पहले भगवान कृष्ण की विधिपूर्वक पूजा करें और उन्हें प्रणाम करें।
- फिर पूजा में चढ़ाए गए प्रसाद जैसे- माखन, मिश्री, खीरा या पंजीरी आदि को ग्रहण करें।
- इसके बाद सात्विक भोजन करें, जिसमें लहसून, प्याज न हो।
- इसके साथ ही भगवान का आभार प्रकट करें।