करवा चौथ के चांद निकलने में देरी होने पर सभी सुहागिन महिलाओं को चंद्रदेव के मंत्रों और भगवान शिव के मंत्र का जाप करते रहना चाहिए।
देश के कुछ जगहों पर करवा चौथ का चांद दिखाई दिया है। जहां पर सुहागिन महिलाएं चंद्रदेव को अर्घ्य देकर व्रत का समापन किया है।
वाराणसी- 07:52
प्रयागराज- 07:57
कानपुर- 08:02
शिमला- 08:03
चंडीगढ़- 08:06
आगरा- 08:10
देश के नार्थ-ईस्ट क्षेत्र में करवा चौथ का चांद सबसे पहले देखा जाएगा। सबसे पहले गुवाहाटी में 7 बजकर 15 मिनट पर करवा चौथ के चांद का दीदार होगा और कुछ ही देर बाद देश के उत्तरी और मध्य भाग में भी करवा चौथ का चांद देखा जा सकेगा। सुहागिन महिलाएं चांद के दर्शन व अर्घ्य देते हुए पति के हाथों से पानी पीकर व्रत पूरा करेंगी।
Moon Rising Time Today : देश के अलग-अलग शहरों में करवा चौथ के चांद के निकलने का समय
Aaj Chand Nikalne Ka Samay Kya Hai: करवा चौथ की पूजा और कथा सुनने के बाद अब सुहागिन महिलाओं को चांद के निकलने का बेसब्री से इंतजार हो रहा है। अगर उत्तर प्रदेश में चांद के निकलने की बात करें तो करीब सवा 8 बजे चांद के दर्शन होंगे।
Today Moonrise Time In Aligarh: 08 बजकर 12 मिनट
Today Moonrise Time in Agra: 08 बजकर 10 मिनट
Today Moonrise Time In Mathura: 08 बजकर 08 मिनट
Today Moonrise Time In Kanpur: 08 बजकर 02 मिनट
Karwa Chauth 2022 : Aaj Chand Kis Time Nikalega
Today Moonrise Time in Indore- शाम 08 बजकर 27 मिनट पर
Today Time in Jaipur- शाम 08 बजकर 16 मिनट पर
Today Time in Bhopal- शाम 08 बजकर 21 मिनट पर
Today Time in Chandigarh- शाम 08 बजकर 06 मिनट पर
पंचांग गणना के अनुसार देश भर में शाम 08 बजे से लेकर 09 बजे के बीच चांद के दर्शन होंगे। आइए जानते हैं देश के शहरों में कब निकलेगा करवा चौथ का चांद
अब से थोड़ी देर बाद करवा चौथ की पूजा का शुभ मुहूर्त शुरु हो जाएगा। करवा चौथ पर शुभ मुहूर्त में करवा माता की पूजा,आरती और कथा सुनी जाती है। फिर इसके बाद चांद के निकलने का इंतजार किया जाता है और चंद्रमा के दर्शन करते हुए अर्घ्य देकर व्रत पूरा करते हैं।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार किसी भी पूजा में अगर मंत्रों का जाप किया जाय तो पूजा अवश्य ही सफल होती है। मंत्रों के जाप से देवी-देवता प्रसन्न होते हैं और सुख-समृद्धि का आशीर्वाद प्रदान करते हैं। करवा चौथ पर भगवान शिव-माता पार्वती, भगवान गणेश और चंद्रदेव की पूजा करने का विधान होता है।
सोलह श्रृंगार- धार्मिक मान्यताओं के अनुसार पति की लंबी आयु और सुखी जीवन की कामना के लिए महिलाएं करवा चौथ का व्रत रखती हैं। जिन महिलाओं का विवाह के बाद पहला करवा चौथ व्रत है ,वे श्रृंगार में सुहाग से संबंधित सारी चीजों का इस्तेमाल करें। 16 श्रृंगार से करवा माता प्रसन्न होती है और अखंड सौभाग्य का आशीर्वाद प्रदान करती हैं।
लाल रंग के कपड़े- करवा चौथ पर सुहागिन महिलाएं लाल और गुलाबी रंग के ही कपड़े पहनें। भूलकर भी सफेद और काले रंग के कपड़े नहीं पहनना चाहिए।
व्रत का पारण- करवा पूजा, चंद्र दर्शन और अर्घ्य देने के बाद अपने पति के हाथों से पानी पीकर ही व्रत का पारण करना चाहिए। रात में सिर्फ सादा और शाकाहारी भोजन करना चाहिए।
हिंदू धर्म में कोई भी पूजा, व्रत और धार्मिक अनुष्ठान बिना आरती के पूरी नहीं मानी जाती है। करवा चौथ पूजा और कथा सुनने के बाद सभी सुहागिन महिलाओं को करवा माता की आरती की आरती जरूर करनी चाहिए। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार आरती करने पर देवी-देवता सबसे ज्यादा प्रसन्न होते हैं और आशीर्वाद प्रदान करते हैं। ऐसे में करवा चौथ में पूजा, कथा और चंद्र दर्शन के साथ करवा माता की आरती जरूर करनी चाहिए।
ओम जय करवा मैया, माता जय करवा मैया।
जो व्रत करे तुम्हारा, पार करो नइया।। ओम जय करवा मैया।
सब जग की हो माता, तुम हो रुद्राणी।
यश तुम्हारा गावत, जग के सब प्राणी।।
कार्तिक कृष्ण चतुर्थी, जो नारी व्रत करती।
दीर्घायु पति होवे , दुख सारे हरती।।
ओम जय करवा मैया, माता जय करवा मैया।
जो व्रत करे तुम्हारा, पार करो नइया।।
होए सुहागिन नारी, सुख संपत्ति पावे।
गणपति जी बड़े दयालु, विघ्न सभी नाशे।।
ओम जय करवा मैया, माता जय करवा मैया।
जो व्रत करे तुम्हारा, पार करो नइया।।
करवा मैया की आरती,व्रत कर जो गावे।
व्रत हो जाता पूरन, सब विधि सुख पावे।।
ओम जय करवा मैया,माता जय करवा मैया।
जो व्रत करे तुम्हारा,पार करो नइया।।
पौराणिक कथा के अनुसार भगवान गणेश के सिर को भगवान शिव ने काटा था और फिर हाथी के बच्चे का सिर लगाकर उन्हें दोबारा से जीवित किया था। सभी देवी-देवता भगवान गणेश के इस रूप को देखकर उनकी पूजा-आराधना की थी लेकिन चंद्रदेव को अपनी सुंदरता पर बड़ा घमंड था और गणेश जी के स्वरूप को देखकर उनका परिहास किया था। तब गणेश जी ने चंद्रदेव को छय रोग का श्राप दिया था और चतु्र्थी तिथि पर चंद्रमा को देखने पर दोष लगेगा। इस कारण से चांद को को सीधे नहीं देखा जाता है बल्कि छलनी का प्रयोग करके चांद के दर्शन किया जाता है।
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वैदिक पंचांग की गणना के अनुसार कार्तिक कृष्ण पक्ष की चतु्र्थी पर चंद्रोदय शाम 08 बजकर 09 मिनट पर होगा। करवा चौथ पर चांद के दर्शन और अर्घ्य देकर पूजा पूरी होती है। लेकिन देश के अलग-अलग हिस्सों में मौसम एक जैसा नहीं होने पर चांद निकलने में देरी हो सकती है। कुछ जगहों पर बादल और बरसात की वजह से चंद्रमा नहीं दिखाई दे सकता। ऐसे में करवा चौथ का व्रत रखने वाली सुहागिन महिलाएं पूर्व-उत्तर दिशा में पूजा करते हुए अर्घ्य देकर व्रत को पूरा कर सकती हैं। इसमें किसी तरह का दोष नहीं लगता और व्रत पूर्ण माना जाता है।
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करवा चौथ का त्योहार उत्तर भारत में विशेष रूप से मनाया जाता है। करवा चौथ व्रत पंजाब, हरियाणा, उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश में बड़े ही उत्साह के साथ मनाया जाता है।
आज कब होगा चंद्रोदय (Karwa Chauth 2022 Moonrise Time Today, Chand Nikalne Ka Samay)
आज देशभर में करवा चौथ का चांद शाम को करीब 08 बजकर 09 मिनट के आसपास दिखाई देना शुुरू हो जाएगा। हालांकि देश के शहरों में चांद के निकलने का समय थोड़ा अलग-अलग समय पर होगा। आज शाम को सबसे पहले चांद पूर्वी भारत में गुवाहटी में करीब शाम 07 बजकर 15 मिनट पर दिखाई देगा फिर धीरे-धीरे देश के अन्य भागों में दिखाई देना शुरु हो जाएगा।
करवा चौथ पर सुहागिन महिलाएं दिनभर उपवास रहते हुए और 16 श्रृंगार करके शाम के समय करवा माता की पूजा और कथा सुनती हैं। इस दिन सभी सुहागिन महिलाएं एक जगह एकत्रित होकर करवा चौथ की पूजा करती हैं। 13 अक्तूबर को करवा चौथ की पूजा का शुभ मुहूर्त शाम 05 बजकर 54 मिनट से लेकर 07 बजकर 03 मिनट तक रहेगा।
करवा चौथ सुहागिन महिलाओं के लिए अखंड सौभाग्य का आशीर्वाद पाने का त्योहार माना जाता है। इस दिन सुहागिन महिलाएं 16 श्रृंगार करके शाम को करवा माता की पूजा करते हुए चांद के निकलने का इंतजार करती हैं, फिर चांद के निकलने पर दर्शन करते हुए अर्ध्य देकर व्रत का पारण करती हैं। करवा चौथ पर चांद की पूजा और अर्ध्य देने का विशेष महत्व होता है। शास्त्रों में चंद्रमा को औषधियों का स्वामी माना गया है जबकि ज्योतिष में चांद को मन का कारक ग्रह माना गया है। चांद की किरणों में शीतला प्रदान करने का गुण होता है। पुराणों में चांद को प्रेम,सुंदरता और सौंदर्य का प्रतीक माना है। इस कारण से सुहागिन महिलाएं करवा चौथ पर चांद के दर्शन करते हुए पति की लंबी आयु और सुखी दांपत्य जीवन की कामना के लिए चंद्रदेव की पूजा-आराधना करती हैं।
हिंदू धर्म में चतुर्थी तिथि का विशेष महत्व होता है। इस तिथि पर भगवान गणेश की पूजा और चंद्रदर्शन का विशेष महत्व होता है। चतु्र्थी तिथि भगवान गणेश को समर्पित होती है क्योंकि इस तिथि पर ही उनका जन्म हुआ था। हिंदू पंचांग के मुताबिक कार्तिक माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि पर करवा चौथ का त्योहार मनाया जाता है। यह सुहागिन महिलाओं के सबसे बड़े व्रत में से एक है। इसमें सुबह से निर्जला व्रत रखते हुए शाम के समय करवा माता की पूजा करते हुए चंद्रमा के दर्शन करते और अर्ध्य देकर व्रत तोड़ा जाता है।