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Surya Grahan 2022 : खत्म हुआ साल का पहला सूर्य ग्रहण, जरूर करें ये उपाय, जानिए ग्रहण से जुड़ी बातें

Sun, 01 May 2022 04:12 AM IST
विनोद शुक्ला ज्योतिष डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

LIVE Solar Eclipse 2022 (सूर्य ग्रहण ) Updates - आज साल का पहला सूर्य ग्रहण लग गया है। सूर्य ग्रहण तीन प्रकार के होते हैं- पूर्ण सूर्य ग्रहण, आंशिक सूर्य ग्रहण और वलय सूर्य ग्रहण। यह सूर्य ग्रहण आंशिक सूर्य ग्रहण है। हिंदू पंचांग के अनुसार यह ग्रहण वैशाख अमावस्या की तिथि पर मेष राशि और भरणी नक्षत्र में लगा है। यह सूर्य ग्रहण आंशिक होने के कारण भारत में दिखाई नहीं देगा, ऐसे में भारत में इसका सूतककाल मान्य नहीं होगा। सूतक काल मान्य नहीं होने के कारण किसी भी तरह धार्मिक कार्यों में कोई भी रुकावटें नहीं रहेगी। भारतीय समयानुसार सूर्य ग्रहण मध्यरात्रि 12 बजकर 15 मिनट से शुरू हो गया है, यह सुबह 4 बजकर 07 मिनट तक रहेगा। इस सूर्य ग्रहण के बाद दूसरा सूर्य ग्रहण इस साल 25 अक्तूबर को लगेगा।
 
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Surya Grahan 2022 - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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आज अमावस्या तिथि है और इसी तिथि पर साल का पहला सूर्य ग्रहण भी लगने जा रहा है। यह आंशिक सूर्य ग्रहण होगा। भारत में इस सूर्य ग्रहण को नहीं देखा जा सकेगा। जिस वजह से ग्रहण का सूतक काल प्रभाव नहीं रहेगा। भारतीय समय के अनुसार ग्रहण आज यानी 30 अप्रैल की आधी रात से शुरू होगा, जो सुबह 4 बजकर 07 मिनट तक रहेगा।
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आज सू्र्य ग्रहण का समय

आज वैशाख मास की अमावस्या तिथि और इसी तिथि पर साल का पहला सूर्य ग्रहण भी लगेगा। भारतीय समय के अनुसार ग्रहण शनिवार, 30 अप्रैल की आधी रात को शुरू हो जाएगा। यह सूर्य ग्रहण आंशिक सूर्य ग्रहण होगा जिस कारण से भारत में इसका सूतक काल प्रभावी नहीं रहेगा। आज ही शनिश्चरी अमावस्या का शुभ योग भी है। सूर्य ग्रहण भारतीय समय के अनुसार आज रात 12 बजकर 15 मिनट से शुरू होगा जो 01 मई की सुबह 4 बजकर 07 मिनट तक रहेगा।

इस राशि और इस नक्षत्र में लगेगा सूर्य ग्रहण

आज लगने वाला सूर्य ग्रहण मेष राशि और भरणी नक्षत्र में लगेगा। इसी के साथ आज ही शनिश्चरी अमावस्या भी है। जब भी अमावस्या तिथि शनिवार के दिन पड़ती है उसे शनिश्चरी अमावस्या कहा जाता है और शनिश्चरी अमावस्या और सूर्य ग्रहण का योग बहुत कम देखने को मिलता है।

भारत में साल का पहला सूर्य ग्रहण कब लगेगा ? और इसका प्रभाव

आज साल का पहला सूर्यग्रहण है। यह सूर्य ग्रहण आंशिक सूर्य ग्रहण होगा। भारतीय समयानुसार 30 अप्रैल की देर रात 12 बजकर 15 मिनट पर सूर्य ग्रहण आरंभ हो जाएगा। जो 01 मई की सुबह 04 बजकर 07 मिनट तक रहेगा। भारत में सूर्य ग्रहण नहीं होने के कारण इसका सूतककाल मान्य नहीं होगा। इसके अलावा सूर्यग्रहण के साथ आज शनिश्चरी अमावस्या तिथि का शुभ संयोग भी है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार जब सूर्य ग्रहण होता है सभी जातकों का इसका प्रभाव अवश्य ही पड़ता है। 

कब लगता है सूर्य ग्रहण

30 अप्रैल को साल का पहला सूर्य ग्रहण है फिर इसके बाद दूसरा सूर्य ग्रहण 25 अक्तूबर होगा। धार्मिक और वैज्ञानिक नजरिए से ग्रहण का विशेष महत्व होता है। खगोल विज्ञान के अनुसार हमारी पृथ्वी सूर्य की परिक्रमा करती है और चंद्रमा धरती के चारों ओर घूमता है। परिक्रमा के दौरान जब सूर्य और धरती के बीच चंद्रमा आ जाता है तो कुछ देर के लिए सूर्य की रोशनी पृथ्वी पर नहीं पड़ती है इस घटना को ही सूर्य ग्रहण कहते हैं।
 

आज कितने बजे से शुरू होगा सूर्य ग्रहण ?

जब-जब ग्रहण की घटना घटित होती है तब-तब इसको देखने और जानने की इच्छा हर एक व्यक्ति को होती है। साल 2022 का पहला सूर्यग्रहण आज होगा। यह आंशिक सूर्यग्रहण है। भारतीय समय के अनुसार आज रात 12 बजकर 15 मिनट से ग्रहण आरंभ हो जाएगा। जो 01 मई की सुबह 04 बजकर 07 मिनट तक चलेगा। भारत में इस सूर्य ग्रहण को नहीं देखा जा सकेगा।

देश दुनिया में आज कहां-कहां दिखाई देखा सूर्य ग्रहण

साल 2022 का यह आंशिक सूर्य ग्रहण होगा भारत में इस आंशिक सूर्य ग्रहण का नहीं देखा जा सकेगा जिस कारण से सूतककाल मान्य नहीं होगा। यह सूर्य ग्रहण दक्षिण अमेरिका, प्रशांत महासागर,अटलांटिक महासागर और अंटार्कटिक महासागर के भागो में दिखाई देगा।

 

आज आंशिक सूर्य ग्रहण होगा

साल 2022 का पहला सूर्य ग्रहण आंशिक ग्रहण होगा। आइए जानते हैं क्या होता है आंशिक सूर्य ग्रहण। जब भी कभी सूर्य और चंद्रमा एक सीधी रेखा नहीं होते तब ऐसी स्थिति में चंद्रमा सूर्य के कुछ ही हिस्सें को ढंक पाता है। इसे ही आंशिक सूर्य ग्रहण कहते हैं।
 

क्या होता है सूतक काल ( Sutak Kaal)

ग्रहण के दौरान और ग्रहण के पहले कुछ घंटों का समय सूतक काल कहलाता है। धार्मिक नजरिए से सूतक काल का बहुत ही अशुभ समय माना जाता है। इस दौरान किसी भी तरह का शुभ कार्य या पूजा-पाठ वर्जित होता है। सूर्य ग्रहण होने पर ग्रहण लगने से ठीक 12 घंटे पहले सूतक काल आरंभ हो जाता है वहीं चंद्र ग्रहण में ग्रहण शुरू होने से 5 घंटे पहले सूतक काल शुरू हो जाता है। चूंकि यह सूर्य ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा इस कारण से इसका सूतक काल मान्य नहीं होगा। जिन स्थानों पर सूर्य ग्रहण होगा वहां पर सूतक काल प्रभावी माना जाएगा।
 

सूर्य ग्रहण के दौरान गर्भवती महिलाएं रखें खास ध्यान

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार जब भी ग्रहण लगता है इसका बुरा प्रभाव गर्भवती महिलाओं पर पड़ता है ऐसे में ग्रहण के दौरान गर्भवती महिलाएं विशेष ध्यान रखना चाहिए।

-गर्भवती महिलाओं को सूर्य ग्रहण के दौरान भोजन नहीं करना चाहिए। कहा जाता है कि ग्रहण के दुष्प्रभाव से भोजन दूषित हो जाता है, इसलिए पहले से रखे पके हुए भोजन पर तुलसी का पत्ता या गंगाजल डाल दें। 
-गर्भवती महिलाओं को सूर्य ग्रहण के दौरान सूई, चाकू, कैंची जैसी नोकदारी वस्तुओं से दूर रहना चाहिए। कहा जाता है कि इनका उपयोग करने से गर्भ में पल रहे बच्चे पर दुष्प्रभाव हो सकता है। 
- जब सूर्य ग्रहण प्रारंभ हो और ग्रहण के समापन तक गर्भवती महिलाओं को घर से बाहर नहीं निकलना चाहिए, क्योंकि इसका नकारात्मक प्रभाव पल रहे बच्चे पर पड़ता है। 
- गर्भवती महिलाओं को सूर्य ग्रहण को भी नहीं देखना चाहिए। इससे उनकी और गर्भ में पल रहे बच्चे की सेहत पर बुरा प्रभाव पड़ने की आशंका रहती है। 
- सूर्य ग्रहण के समय में गर्भवती महिलाओं को अपने इष्टदेव का स्मरण करना चाहिए।
 

आज सूर्य ग्रहण और शनि अमावस्या का संयोग

आज साल 2022 का पहला सूर्य ग्रहण और शनि अमावस्या का खास संयोग बना हुआ है। इस तरह का संयोग वर्षों बाद बना है। शनि अमावस्या पर शनि दोषों से मुक्ति के लिए गंगा स्नान, दान और पितरों का तर्पण किया जाता है। वहीं इस तरह के संयोग से कुछ राशि के जातकों को विशेष लाभ के मिलने की संकेत हैं। जिनमें मेष, कर्क और वृश्चिक राशि शामिल है।

15 दिन के अंतराल पर दो ग्रहण 

साल 2022 का पहला सूर्य ग्रहण आज लगने जा रहा है। फिर इसके 15 दिन के बाद दूसरा ग्रहण लगेगा। यह चंद्र ग्रहण होगा। 15 मई को चंद्र ग्रहण लगेगा। ज्योतिषशास्त्र और धार्मिक नजरिए से ग्रहण को बहुत महत्व दिया जाता है।

अमावस्या तिथि पर ही लगता है सूर्य ग्रहण

हिंदी पंचांग की गणना के अनुसार सूर्य ग्रहण हमेशा अमावस्या तिथि पर और चंद्र ग्रहण हमेशा पूर्णिमा तिथि पर ही लगता है। लेकिन हर अमावस्या और पूर्णिमा तिथि को ग्रहण नहीं लगते। 

ग्रहण देखते समय इन बातों का रखें ध्यान

सूर्यग्रहण एक खगोलीय घटना है। परंतु इसे नग्न आंखों से नहीं देखना चाहिए। इसे देखने के लिए उच्च कोटि के फिल्टर ग्लास के चश्मे का इस्तेमाल करना चाहिए। कई लोग एक्सरे शीट के चश्मे का प्रयोग करते हैं लेकिन ऐसा नहीं करना चाहिए और छोटे बच्चों को सूर्य ग्रहण से दूर रखना चाहिए।

सूर्य ग्रहण का पौराणिक महत्व

पौराणिक कथाओं के अनुसार सूर्य ग्रहण और चंद्रग्रहण की घटना को राहु-केतु के द्वारा ग्रास करने के तौर पर देखा जाता है। राहु और केतु दोनों ही छाया ग्रह और राक्षस गण से संबंध रखते हैं। कथा के अनुसार जब समुद्र मंथन के दौरान निकले अमृत को भगवान विष्णु मोहिनी का रूप धारण कर सभी देवताओं को पिला रहे तो राहु और केतु इस बात को जान गए कि भगवान विष्णु सिर्फ देवताओं को ही अमृतपान करा रहे हैं। तब दोनों पापी ग्रह चुपके से जाकर देवताओं की पंक्ति में जाकर मोहिन के हाथों से अमृतपान कर लिया था। अमृतपान करने के दौरान चंद्रमा और सूर्यदेव ने यह देख लिया था, यह बात जैसे ही भगवान विष्णु को पता चली उन्होंने तुरंत ही अपने सुदर्शन चक्र से राक्षस का सिर धड़ से अलग कर दिया। तभी से राहु और केतु समय-समय पर सूर्य और चंद्रमा पर ग्रहण लगाते आ रहे हैं।

सूर्यग्रहण का वैज्ञानिक महत्व

सूर्य ग्रहण को एक खगोलीय घटना माना गया है। जब चंद्रमा सूर्य और पृथ्वी की बीच आ जाती है तब ऐसी स्थिति में सूर्य का प्रकाश धरती पर नहीं पहुंच पाता और चंद्रमा सूर्य को ढक लेता तो इस घटना को सूर्यग्रहण कहते हैं।

सूर्य ग्रहण का ज्योतिषीय महत्व

आज यानी 30 अप्रैल को लगने वाला सूर्यग्रहण मेष राशि में लगेगा। मेष राशि पर मंगल ग्रह का आधिपत्य है और भरणी नक्षत्र के स्वामी शुक्र ग्रह हैं। इस कारण से मेष राशि और भरणी नक्षत्र में जन्म लेने वाले जातकों पर इस ग्रहण का सबसे ज्यादा प्रभाव देखने को मिलेगा। वैदिक ज्योतिष शास्त्र में सूर्य को आत्मा जबकि चंद्रमा को मन का कारक माना गया है। ऐसे में ग्रहण के दौरान सभी जातकों पर विशेष प्रभाव पड़ता है। हालांकि जिस क्षेत्र में यह ग्रहण होता है वहीं पर ही रहने वाले जातकों पर इसका विशेष प्रभाव पड़ता है, अन्य जगहों पर ग्रहण का विशेष प्रभाव नहीं पड़ता है। 

सूर्य ग्रहण के दौरान न करें ये काम 

  • सूर्य ग्रहण के दौरान कुछ कार्यों का करना बिल्कुल वर्जित है।
  • नकारात्मक ऊर्जा बढ़ जाती है इसलिए किसी भी नए काम की शुरुआत या मांगलिक कार्य न करें।
  • इसके अलावा ग्रहण के दौरान नाखून काटना, कंघी करना भी सही नहीं माना जाता है।
  • शास्त्रों के अनुसार, ग्रहण के दौरान कुछ भी खाने से उसका नकारात्मक प्रभाव पड़ता है। ऐसे में इस दौरान पका हुआ खाना खाने की मनाही होती है।
  • इसके अलावा इस दौरान काटने-छीलने का काम भी न करें। 
  • ग्रहण के समय सोना नहीं चाहिए। साथ ही सुई में धागा भी डालने की मनाही की गई है।
  • ग्रहण के दौरान यात्रा करने से भी बचना चाहिए। 

सूर्य ग्रहण के प्रकार

सूर्य ग्रहण तीन प्रकार के होते हैं- 

पूर्ण सूर्य ग्रहण: पूर्ण सूर्य ग्रहण उस समय होता है जब चन्द्रमा पूरी तरह से पृ्थ्वी को अपने छाया क्षेत्र में ले लेता है। इसके फलस्वरुप सूर्य का प्रकाश पृ्थ्वी तक पहुंच नहीं पाता है और पृथ्वी पर अंधकार जैसी स्थिति उत्पन्न हो जाती है।  इस प्रकार बनने वाला ग्रहण पूर्ण सूर्य ग्रहण कहलाता है। 

आंशिक सूर्य ग्रहण:  आंशिक सूर्यग्रहण में चन्दमा, सूर्य के केवल कुछ भाग को ही अपनी छाया में ले पाता है। इससे सूर्य का कुछ भाग ग्रहण ग्रास में तथा कुछ भाग ग्रहण से अप्रभावित रहता है. इसे आंशिक सूर्यग्रहण कहा जाता है। 

वलय सूर्यग्रहण: तीसरे और अंतिम प्रकार का सूर्य ग्रहण "वलय सूर्यग्रहण" के नाम से जाना जाता है। इस प्रकार के ग्रहण के समय चन्द्र सूर्य को इस प्रकार से ढकता है, कि सूर्य का केवल मध्य भाग ही छाया क्षेत्र में आता है। सूर्य के बाहर का क्षेत्र प्रकाशित होने के कारण कंगन के समान प्रतीत होता है। कंगन आकार में बने सूर्यग्रहण को ही वलय सूर्यग्रहण कहा जाता है। 

ऐसे ऑनलाइन देख सकते हैं ग्रहण

चूंकि यह सूर्य ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा लेकिन इस महान खगोलीय घटना में दिलचस्पी रखने वाले लोग ऑनलाइन यूट्यूब पर ग्रहण देख सकेंगे। कई चैनल यूट्यूब पर ग्रहण को लाइव दिखाते हैं।

सूर्य ग्रहण के संकट से बचने के लिए करें ये उपाय 

  • सूर्य ग्रहण और शनि अमावस्या के दिन पंचामृत स्नान, तिल-तेल से शनि देव का अभिषेक करें और इस के साथ ही शनि चालीसा का पाठ करने से संकट दूर होते हैं। 
  • ज्योतिष के अनुसार, शनि अमावस्या और सूर्य ग्रहण एक दिन ही पड़ रहे हैं। ऐसे में इस दिन दान करना काफी शुभ माना जाता है। 
  • सूर्य ग्रहण के दिन जब ग्रहण समाप्त हो जाए तो पूरे घर में गंगाजल से छिड़काव करें और साथ ही स्नान करें। 
  • ग्रहण के दौरान ये भी ध्यान रखें कि खाने पीने कि चीजों में तुलसी डालकर रखें। मान्यता है ऐसा करने से खाने पीने कि चीजों में ग्रहण का प्रभाव नहीं पड़ता।

मेष राशि में सूर्य ग्रहण का प्रभाव 

आज थोड़ी देर में जो सूर्य ग्रहण लगने जा रहा है वो मेष राशि में लगेगा। मेष राशि के जातकों के लिए सूर्य ग्रहण फलदायी साबित होगा। आर्थिक स्थिति अच्छी रहेगी। पुराने किसी निवेश से अच्छा धन लाभ हो सकता है। कार्यस्थल में आपके काम की जमकर तारीफ होगी। व्यापारियों के लिए भी ये गोचर लाभप्रद साबित होगा। मुनाफे वाली डील फाइनल हो सकती है। यात्रा से अच्छा धन अर्जित करने में सफल रहेंगे। सरकारी नौकरी वाले जातकों के लिए समय काफी अनुकूल है।

सूर्य ग्रहण का सूतक 

चूंकि आज लगने वाला सूर्य ग्रहण भारत में नहीं दिखाई दे रहा है, इसलिए आज किसी भी प्रकार का कोई सूतक नहीं लगेगा। सूतक उसी ग्रहण का मान्य होता है जो ग्रहण अपने यहां दिखाई दे। सूर्य ग्रहण का सूतक 12 घंटे पहले शुरू हो जाता है। हालांकि सूतक नहीं लगेगा फिर भी थोड़ी सावधानी बरतनी आवश्यक है। 

अक्तूबर में लगेगा साल का दूसरा और अंतिम सूर्यग्रहण

साल का दूसरा व अंतिम सूर्यग्रहण 25 अक्टूबर 2022 को लगेगा। 25 अक्टूबर को सूर्यग्रहण शाम 04 बजकर 29 मिनट से लेकर 05 बजकर 42 मिनट तक लगेगा।  यह सूर्यग्रहण भारत के कुछ हिस्सों में नजर आएगा, जिसके कारण देश में सूतक काल मान्य होगा। इसके अलावा अक्तूबर में लगने वाला सूर्यग्रहण अफ्रीका महाद्वीप के उत्तर-पूर्वी भाग, एशिया के दक्षिण-पश्चिमी भाग और अटलांटिक में भी देखा जा सकेगा।  

सूर्य ग्रहण आज, इन तीन  राशि वालों को रहना होगा सावधान 

मिथुन राशि- मिथुन राशि के जातकों के यह ग्रहण थोड़ी समस्या लेकर आ सकता है। ग्रहण के दौरान यदि घर से निकलना है तो बहुत संभलकर निकलें, वरना नुकसान हो सकता है। यदि संभव हो तो इस दिन घर पर रहें या कम से कम भीड़-भाड़ वाली जगहों पर न जाएं।  
 
कन्या राशि- कन्या राशि के जातकों के लिए साल का पहला  सूर्य ग्रहण अच्छा नहीं रहेगा। बच्चों के करियर को लेकर आप चिंतित रह सकते हैं। मेहनत का पूरा फल नहीं मिलेगा। किसी को पैसे उधार न दें।

मकर राशि- मकर राशि के जातकों को सूर्य ग्रहण के दौरान सावधान रहना होगा। सेहत के मामले में विशेष ध्यान देने की जरूरत है। कोई पुराना रोग है तो उसे गंभीरता से लें। लक्ष्य को पाने में दिक्कत आ सकती है। 

इस वर्ष लगेंगे चार ग्रहण

इस वर्ष चार ग्रहण लगेंगे। दो सूर्य ग्रहण दो चंद्र ग्रहण हैं। पहला सूर्य ग्रहण 30 अप्रैल की आधी रात्रि को लगेगा। दूसरा सूर्य ग्रहण 25 अक्टूबर 2022 को लगेगा। पहला चंद्र ग्रहण 16 मई और दूसरा 8 नवंबर को होगा।

सूर्य ग्रहण के दौरान करें इन मंत्रों का जाप

नकारात्मक शक्तियों का नाश करने के लिए
ॐ ह्लीं बगलामुखी सर्वदुष्टानां वाचं मुखं पदं स्तंभ
जिह्ववां कीलय बुद्धि विनाशय ह्लीं ओम् स्वाहा।।

धन लाभ के लिए
ॐ श्रीं ह्रीं श्रीं कमले कमलालये
प्रसीद-प्रसीद श्रीं ह्रीं श्रीं महालक्ष्म्यै नम:

बुरी शक्तियों के नाश के लिए
विधुन्तुद नमस्तुभ्यं सिंहिकानन्दनाच्युत
दानेनानेन नागस्य रक्ष मां वेधजाद्भयात्॥

शांति कायम करने के लिए
तमोमय महाभीम सोमसूर्यविमर्दन।
हेमताराप्रदानेन मम शान्तिप्रदो भव॥

सिद्धि प्राप्त करने के लिए
ॐ मां भयात् सर्वतो रक्ष, श्रियं वर्धय सर्वदा।
शरीरारोग्यं मे देहि, देव-देव नमोऽस्तु ते।।

ग्रहणकाल में सूर्य की उपासना जरूर करें

ग्रहणकाल में भगवान सूर्य की उपासना के लिए आदित्य हृदय स्तोत्र, सूर्याष्टक स्तोत्र आदि सूर्य स्तोत्रों का पाठ व गुरु मंत्र का जाप करना चाहिए। ग्रहण के बाद स्नान-दान का भी महत्व है। ग्रहण जहां जितने समय तक दिखाई देता है, वहीं उसकी मान्यता उतने काल तक ही होती है। 

सूर्य ग्रहण में दान जरूर करें 

सूर्य ग्रहण क समय पर दान अवश्य करना चाहिए। रोग मुक्ति हेतु ग्रहण काल में मृत्युंजय मंत्र का जाप करत हुए महामृत्युंजय यंत्र का अभिषेक करें। कांसे  की कटोरी में पिघला देसी घी भरें और चांदी या सोने का सिक्का उसमें डाल कर रोगी अपनी छाया  देखकर उसे जरुरतमन्द को दान करें।

सूर्य ग्रहण पर करें आदित्यहृदय स्त्रोत का पाठ

ज्योतिषाचार्यों के अनुसार सूर्य ग्रहण के अशुभ प्रभाव से मुक्ति पाने के लिए इस काल में आदित्य हृदय स्तोत्र का पाठ करना चाहिए। ऐसा करने से भगवान सूर्य आप के समस्त दोष दूर करेंगे और आप पर सूर्य ग्रहण का कोई दुष्प्रभाव नहीं पड़ेगा। पढ़ें सम्पूर्ण आदित्यहृदय स्त्रोत यहां। 

आदित्य हृदय स्तोत्रम (Aditya Hriday Stotra)
ततो युद्धपरिश्रान्तं समरे चिन्तया स्थितम् । रावणं चाग्रतो दृष्ट्वा युद्धाय समुपस्थितम् ॥॥
दैवतैश्च समागम्य द्रष्टुमभ्यागतो रणम् । उपगम्याब्रवीद् राममगस्त्यो भगवांस्तदा ॥॥
राम राम महाबाहो श्रृणु गुह्मं सनातनम् । येन सर्वानरीन् वत्स समरे विजयिष्यसे ॥॥
आदित्यहृदयं पुण्यं सर्वशत्रुविनाशनम् । जयावहं जपं नित्यमक्षयं परमं शिवम् ॥॥
सर्वमंगलमागल्यं सर्वपापप्रणाशनम् । चिन्ताशोकप्रशमनमायुर्वर्धनमुत्तमम् ॥॥
 
रश्मिमन्तं समुद्यन्तं देवासुरनमस्कृतम् । पुजयस्व विवस्वन्तं भास्करं भुवनेश्वरम् ॥॥
सर्वदेवात्मको ह्येष तेजस्वी रश्मिभावन: । एष देवासुरगणांल्लोकान् पाति गभस्तिभि: ॥॥
एष ब्रह्मा च विष्णुश्च शिव: स्कन्द: प्रजापति: । महेन्द्रो धनद: कालो यम: सोमो ह्यापां पतिः ॥॥

पितरो वसव: साध्या अश्विनौ मरुतो मनु: । वायुर्वहिन: प्रजा प्राण ऋतुकर्ता प्रभाकर: ॥॥
आदित्य: सविता सूर्य: खग: पूषा गभस्तिमान् । सुवर्णसदृशो भानुर्हिरण्यरेता दिवाकर: ॥॥
 
हरिदश्व: सहस्त्रार्चि: सप्तसप्तिर्मरीचिमान् । तिमिरोन्मथन: शम्भुस्त्वष्टा मार्तण्डकोंऽशुमान् ॥॥
हिरण्यगर्भ: शिशिरस्तपनोऽहस्करो रवि: । अग्निगर्भोऽदिते: पुत्रः शंखः शिशिरनाशन: ॥॥
व्योमनाथस्तमोभेदी ऋग्यजु:सामपारग: । घनवृष्टिरपां मित्रो विन्ध्यवीथीप्लवंगमः ॥॥
आतपी मण्डली मृत्यु: पिगंल: सर्वतापन:। कविर्विश्वो महातेजा: रक्त:सर्वभवोद् भव: ॥॥
नक्षत्रग्रहताराणामधिपो विश्वभावन: । तेजसामपि तेजस्वी द्वादशात्मन् नमोऽस्तु ते ॥॥
 
नम: पूर्वाय गिरये पश्चिमायाद्रये नम: । ज्योतिर्गणानां पतये दिनाधिपतये नम: ॥॥
जयाय जयभद्राय हर्यश्वाय नमो नम: । नमो नम: सहस्त्रांशो आदित्याय नमो नम: ॥॥
नम उग्राय वीराय सारंगाय नमो नम: । नम: पद्मप्रबोधाय प्रचण्डाय नमोऽस्तु ते ॥॥
ब्रह्मेशानाच्युतेशाय सुरायादित्यवर्चसे । भास्वते सर्वभक्षाय रौद्राय वपुषे नम: ॥॥
तमोघ्नाय हिमघ्नाय शत्रुघ्नायामितात्मने । कृतघ्नघ्नाय देवाय ज्योतिषां पतये नम: ॥॥
 
तप्तचामीकराभाय हरये विश्वकर्मणे । नमस्तमोऽभिनिघ्नाय रुचये लोकसाक्षिणे ॥॥
नाशयत्येष वै भूतं तमेष सृजति प्रभु: । पायत्येष तपत्येष वर्षत्येष गभस्तिभि: ॥॥
एष सुप्तेषु जागर्ति भूतेषु परिनिष्ठित: । एष चैवाग्निहोत्रं च फलं चैवाग्निहोत्रिणाम् ॥॥
देवाश्च क्रतवश्चैव क्रतुनां फलमेव च । यानि कृत्यानि लोकेषु सर्वेषु परमं प्रभु: ॥॥
एनमापत्सु कृच्छ्रेषु कान्तारेषु भयेषु च । कीर्तयन् पुरुष: कश्चिन्नावसीदति राघव ॥॥
 
पूजयस्वैनमेकाग्रो देवदेवं जगप्ततिम् । एतत्त्रिगुणितं जप्त्वा युद्धेषु विजयिष्यसि ॥॥
अस्मिन् क्षणे महाबाहो रावणं त्वं जहिष्यसि । एवमुक्ता ततोऽगस्त्यो जगाम स यथागतम् ॥॥
एतच्छ्रुत्वा महातेजा नष्टशोकोऽभवत् तदा ॥ धारयामास सुप्रीतो राघव प्रयतात्मवान् ॥॥
आदित्यं प्रेक्ष्य जप्त्वेदं परं हर्षमवाप्तवान् । त्रिराचम्य शूचिर्भूत्वा धनुरादाय वीर्यवान् ॥॥
रावणं प्रेक्ष्य हृष्टात्मा जयार्थं समुपागतम् । सर्वयत्नेन महता वृतस्तस्य वधेऽभवत् ॥॥
अथ रविरवदन्निरीक्ष्य रामं मुदितमना: परमं प्रहृष्यमाण: । निशिचरपतिसंक्षयं विदित्वा सुरगणमध्यगतो वचस्त्वरेति ॥॥
।।संपूर्ण ।।

इन राशियों को मिलेगा इस सूर्यग्रहण से लाभ

वृषभ राशि- वृषभ राशि के जातकों पर ग्रहण का शुभ प्रभाव पड़ेगा। कार्यों में आ रही बाधाएं खत्म होंगी। आर्थिक स्थिति में सुधार देखने को मिलेगा। धन लाभ के कई मौके आपको प्राप्त होंगे। पैतृक संपत्ति से लाभ की संभावना दिखाई दे रही है। 

सिंह राशि- सिंह राशि के जातकों के लिए भी सूर्य ग्रहण अच्छा है। सिंह राशि के जातकों को कार्यक्षेत्र में न सिर्फ आर्थिक तरक्की मिलेगी बल्कि पदोन्नति होने की भी संभावना है। इस दौरान सिंह राशि के जातक आय स्रोत बढ़ाने के साथ साथ निवेश पर भी ध्यान केंद्रित करेंगे। इन ग्रहण के दौरान कार्यसंबंधी मामलों को लेकर सिंह राशि के जातक यात्रा भी कर सकते हैं। 

मीन राशि- मीन राशि वालों के लिए यह सूर्य ग्रहण काफी शुभ रहेगा। धन लाभ की संभावना है। निवेश में भी लाभ मिल सकता है।  शत्रुओं पर विजय मिलेगी। मान-सम्मान में वृद्धि होगी। 

चंद्र राशि के अनुसार इन राशियों पर रहेगा सूर्य ग्रहण का प्रभाव

मेष : यह सूर्य ग्रहण मेष राशि में लगेगा। इसलिए मेष राशि वाले लोगों पर सबसे ज्यादा प्रभाव रहेगा। ग्रहण के दौरान यात्रा न करें तथा सजग और सावधान रहें। सूर्य बीते 14 अप्रैल 2022 से मेष राशि में ही विराजमान हैं। सूर्य इस राशि में 15 मई 2022तक रहेंगे। मेष राशि में ही राहु बैठा हुआ है। सूर्य इस राशि में राहु के साथ 15 तक रहेंगे,जब तक राहु और सूर्य की युति बनी रहेगी तब तक इन राशि वालों को सावधान रहने की जरूरत है। धन की हानि हो सकती है। मानसिक तनाव में वृद्धि होगी। 15 मई तक अपनी वाणी और स्वभाव पर विशेष ध्यान देना होगा। वाणी दोष के कारण आपके अपने आपसे दूरी बना सकते हैं। अहंकार हो सकता है। जिससे मित्र भी शत्रु बन सकते हैं। विनम्र रहने का प्रयास करें। अनावश्यक विवादों से बचने का प्रयास करें। मानसिक तनाव का सामना करना पड़ सकता है साथ ही आप पर शत्रु भी हावी हो सकते हैं। ऐसे में आपको खासतौर पर सतर्क रहने की जरूरत है,नहीं तो आपको नुकसान हो सकता है। इसके अलावा जल्दबाजी करने से बचें।

 

चंद्र राशि के अनुसार वृषभ पर रहेगा सूर्य ग्रहण का प्रभाव

वृषभ:  ये ग्रहण बहुत शुभ रहने वाला है। इस ग्रहण से आपका आर्थिक पक्ष मजबूत हो सकता है। करियर में सफलता मिल सकती है। साथ ही अधूरे काम बन सकते हैं। नए व्यावसायिक संबंध बन सकते हैं। इस समय आप व्यापार में नया निवेश कर सकते हैं। जिससे आपको भविष्य  में फायदा हो सकता है। प्रॉपर्टी में निवेश करने के लिए अच्छा है और ऐसा करना इस दौरान आपके लिए लाभकारी सिद्ध हो सकता है।

चंद्र राशि के अनुसार कर्क पर रहेगा सूर्य ग्रहण का प्रभाव

कर्क : कर्क राशि का स्वामी चंद्रमा होता है। इस समय चंद्रमा मेष में राहु के साथ रहेंगे। यह स्थिति कर्क राशि वालों को मानसिक तनाव पैदा कर सकती है। वाहन चलाते समय सावधानी बरतनी होगी। इस दौरान मन खिन्न रहेगा। काम में बाधा आ सकती है। जिस कारण क्रोध की स्थिति बन सकती है। ऑफिस में सहयोगियों का पूर्ण सहयोग प्राप्त नहीं होगा। जिस कारण लक्ष्य को पाने में मुश्किल आ सकता है। संतान की सेहत को लेकर चिंता रहेगी। अनावश्यक यात्रा करनी पड़ सकती है। आपके खर्चे बढ़ेंगे। इसलिए इस दौरान धैर्य बनाकर रखें। साथ ही इस दौरान आपकी कार्यस्थल और समाज में आपकी छवि अच्छी हो सकती है। कार्यस्थल पर आपकी कार्य करने की शैली में निखार आ सकता है। नई जॉब का प्रस्ताव आ सकता है। अपनी योग्यताओं को साबित करने के लिए आगे बढ़ कर किसी भी नई चुनौती का समाधान करने की ज़िम्मेदारी ले सकते हैं।

अब कुछ देर बाद शुरू हो जाएगा सूर्य ग्रहण

साल का पहला सूर्य ग्रहण लगने में अब कुछ ही पल बचे हुए हैं, हालांकि भारत में यह ग्रहण नहीं देखा जा सकेगा। भारतीय समय के अनुसार देर रात 12 बजकर 15 मिनट पर ग्रहण शुरू हो जाएगा। यह ग्रहण आंशिक सूर्य ग्रहण होगा। ग्रहण का समापन सुबह 4 बजकर 07 मिनट पर होगा। 

ग्रहण काल में क्या न करें ?

यदि आपके संबंधी विदेश में हैं जहां दोनों ग्रहण लगेंगे,उन्हें आप यह सलाह दे सकते हैं-

ग्रहण काल में किसी भी नए कार्य का शुभारंभ न करें। सूतक के दौरान भोजन बनाना और भोजन करना वर्जित माना जाता है। देवी-देवताओं की प्रतिमा और तुलसी के पौधे को स्पर्श नहीं करना चाहिए। सूर्य ग्रहण के दौरान फूल,पत्ते,लकड़ी आदि नहीं तोड़ने चाहिए। इस दिन न बाल धोने चाहिए ना ही वस्त्र। ग्रहण के समय सोना,शौच,खाना,पीना,किसी भी तरह के वस्तु की खरीदारी से बचना चाहिए। सूर्यग्रहण में बाल अथवा दाढ़ी नहीं कटवानी चाहिए,ना ही बालों अथवा हाथों में मेहंदी लगवानी चाहिए। सूर्यग्रहण के दौरान उधार लेन-देन से बचना चाहिए। उधार लेने से दरिद्रता आती है और उधार देने से लक्ष्मी नाराज होती हैं।

कुछ देर में दिखाई देगा साल का पहला आंशिक सूर्य ग्रहण

दुनिया के कई हिस्सों में अब से कुछ देर में साल का पहला आंशिक सूर्य ग्रहण दिखाई देगा। यह घटना ब्लैक मून नामक एक अन्य खगोलीय घटना से भी टकरा रही है और नासा के अनुसार, ब्लैक मून दिन में कुछ समय के लिए धूप को ब्लॉक कर देगा। सूर्य ग्रहण दक्षिणी गोलार्ध के कुछ हिस्सों में दिखाई देगा और दक्षिण अमेरिका, चिली, उरुग्वे, दक्षिण-पश्चिमी बोलीविया, पेरू, दक्षिण-पश्चिमी ब्राजील और अर्जेंटीना के कुछ क्षेत्रों में रहने वाले लोग इस खगोलीय घटना को देख सकेंगे।

नग्न आंखों से नहीं देखें सूर्य ग्रहण

नासा ने यह भी स्पष्ट किया है कि सूर्य ग्रहण दक्षिण प्रशांत महासागर और दक्षिणी महासागर क्षेत्रों से भी दिखाई देगा। भारत में लोग इस घटना को नहीं देख पाएंगे। आंशिक सूर्य ग्रहण 30 अप्रैल 2022 को भारत के समयानुसार मध्यरात्रि को 12 बजकर 15 मिनट से शुरू होकर सुबह 4 बजकर सात मिनट तक रहेगा। नग्न आंखों से नहीं देखें सूर्य ग्रहण बल्कि इसे दूरबीन या चश्मे से ही देखना चाहिए।

शुरू हुआ सूर्य ग्रहण

सूर्य ग्रहण शुरू हो गया है। जिन क्षेत्रों में आकाशीय घटना दिखाई नहीं देगी, वहां लोग इसे ऑनलाइन लाइव देख सकते हैं। नासा के यूट्यूब चैनल समेत कई YouTube चैनलों पर इसकी लाइव स्ट्रीमिंग देखी जा सकती है। भारत में यह सूर्य ग्रहण दिखाई नहीं देगा। इसके कारण इसका भौतिक प्रभाव भी भारत पर नहीं पडेगा।

सूर्य ग्रहण का पौराणिक महत्व

आज लगने वाला सूर्य ग्रहण मेष राशि और भरणी नक्षत्र में लगा है। इसी के साथ आज ही शनिश्चरी अमावस्या भी है। पौराणिक कथाओं के अनुसार सूर्य ग्रहण और चंद्रग्रहण की घटना को राहु-केतु के द्वारा ग्रास करने के तौर पर देखा जाता है। राहु और केतु दोनों ही छाया ग्रह और राक्षस गण से संबंध रखते हैं। कथा के अनुसार जब समुद्र मंथन के दौरान निकले अमृत को भगवान विष्णु मोहिनी का रूप धारण कर सभी देवताओं को पिला रहे तो राहु और केतु इस बात को जान गए और दोनों पापी ग्रह चुपके से देवताओं की पंक्ति में जाकर मोहिन के हाथों से अमृतपान कर लिया था। अमृतपान करने के दौरान चंद्रमा और सूर्यदेव ने यह देख लिया था, यह बात जैसे ही भगवान विष्णु को पता चली उन्होंने तुरंत ही अपने सुदर्शन चक्र से राक्षस का सिर धड़ से अलग कर दिया। तभी से राहु और केतु समय-समय पर सूर्य और चंद्रमा पर ग्रहण लगाते आ रहे हैं।

इस राशि के लोगों को सावधान रहने की जरूरत

मेष राशि- इस बार सूर्य ग्रहण का प्रभाव मेष राशि में होगा। जिससे सबसे ज्यादा प्रभावित मेष राशि के जातक होंगे। ऐसे में मेष राशि के जातकों को शत्रुओं से सावधान रहना होगा। इस दौरान मेष राशि के जातकों में आत्मविश्वास भरपूर रहेगा। इस दिन मेष राशि के जातकों को पारिवारिक सुख मिलेगा और मित्रों का सहयोग बना रहेगा। इस राशि के लोगों का मन अशांत रहेगा लेकिन वाणी में सौम्यता बनी रहेगी। मेष राशिवाले ग्रहण के दौरान यात्रा न करें। ग्रहण काल में गायत्री मंत्र का जाप करना शुभ रहेगा।

कर्क राशि के लिए मुश्किल समय

कर्क राशि- इस राशि के जातकों के लिए यह एक मुश्किल समय रहेगा। ग्रहण के दौरान चंद्रमा मेष राशि में राहु के साथ मौजूद रहेंगे, जिसके कारण मन में नकारात्मकता की भावना आएगी। बेवजह के खर्चों में वृद्धि होगी। ग्रहण के दौरान कर्क राशि के जातको को घर से बाहर नहीं निकलना चाहिए। ग्रहण के दौरान गायत्री मंत्र का जाप करने से ग्रहण का दोष नहीं लगता है।

वृश्चिक राशि के जातकों को विशेष सावधान रहने की जरूरत

वृश्चिक राशि- सूर्य ग्रहण के दौरान इस राशि के जातकों को विशेष सावधान रहने की जरूरत है। लड़ाई-झगड़े, विवादों में न पड़े, नहीं तो लेने के देने पड़ सकते हैं। शत्रुओं से विशेष सतर्क रहें, जरा सी लापारवाही के चलते पद प्रतिष्ठा पर आंच आ सकती है। ग्रहण के दौरान खाने-पीने से बिलकुल परहेज करें और गायत्री मंत्र का जाप करें।

धनु राशि के लोग शत्रुओं से दूर रहें

धनु राशि- इस राशि के जातक शत्रुओं से दूर रहें। किसी भी तरह की गोपनीय जानकारी को दूसरों से साझा न करें। कार्यों में लापारवाही के चलते कार्यालय में वरिष्ठ अधिकारियों से मतभेद हो सकता है। इसलिए ग्रहण के दौरान विशेष सावधानी बरतें, जरूरी न हो तो इस समय यात्रा न करें। ग्रहण के दौरान गायत्री मंत्र का जप करते रहें।

सूर्य ग्रहण को ऑनलाइन कैसे देखें?

यह सूर्य ग्रहण भारत में नहीं दिखाई देगा, लेकिन आप NASA ऑर्थोग्राफिक मैप्स, Google इंटरएक्टिव मैप्स और NASA एनिमेशन के जरिये ऑनलाइन स्ट्रीमिंग देख सकते हैं।

सूर्यग्रहण खत्म होने के तुंरत बाद जरूर कर लें ये सात काम 

शास्त्रों के मुताबिक ग्रहण खत्म होने के बाद भी उसका प्रभाव रहता है। इसे दूर करने के लिए कुछ विशेष उपाय करना बेहद जरूरी है। शास्त्रों के अनुसार जिस प्रकार सूर्य ग्रहण के दौरान कुछ काम करना वर्जित माना जाता है उसी प्रकार सूर्य ग्रहण खत्म होने पर भी कुछ चीजों का खास ख्याल रखने की जरूरत होती है। ज्योतिष शास्त्र में सूर्य ग्रहण को अशुभ माना जाता है। ऐसे में सूर्य ग्रहण के खत्म होने के बाद ऐसे कुछ काम जरूर करने चाहिए, जिससे ग्रहण के नकारात्मक ऊर्जा का प्रभाव खत्म हो जाए। आइए जानते हैं सूर्य ग्रहण के तुरंत बाद क्या करना चाहिए।

दान- ग्रहण समाप्त होने के बाद स्नान करें और किसी जरूरतमंद को अन्न, वस्त्र, या धन का दान करें। ग्रहण के दौरान पहने गए कपड़ों को भी दान कर दें।

देवताओं के दर्शन- ग्रहण काल में मंत्र जाप व चिंतन कार्य करने का विधान है। इसलिए ग्रहण का मोक्ष काल समाप्त होते ही भगवान के दर्शन करना विशेष शुभ फल देता है।

तुलसी के पौधे को गंगाजल से शुद्ध करें- सूर्य ग्रहण के बाद मंदिर की सफाई करें और भगवान की मूर्तियों को पवित्र गंगाजल से स्नान करवाएं। सूर्य ग्रहण के बाद तुलसी और शमी के पौधे पर गंगाजल छिड़ककर उन्हें शुद्ध कर लेना चाहिए।

गंगाजल का छिड़काव- ग्रहण के बाद पूरे घर में गंगा जल छिड़कें। सूर्य ग्रहण समय में अगर कोई व्यक्ति तीर्थ यात्राओं पर हैं, तो उन्हें ग्रहण समाप्त होने के बाद करीब के तीर्थ स्थलों पर जाकर स्नान अवश्य करना चाहिए।

श्राद्ध करना- सूर्य ग्रहण की अंत की अवधि में श्राद्ध और दान कार्य करना कल्याणकारी होता है।

घर की सफाई- सूर्य ग्रहण खत्म होने के तुरंत बाद ही घर में झाड़ू लगाने के साथ पोछा लगा दें। इससे नकारात्मक ऊर्जा खत्म हो जाती है।

गर्भवती महिलाएं करें ये काम- माना जाता है कि ग्रहण समाप्त होने के तुरंत बाद गर्भवती महिलाओं को स्नान करना चाहिए। ऐसा नहीं करने पर गर्भ में पल रहे बच्चे को त्वचा संबंधी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। 

सूर्य ग्रहण के बाद करें ये उपाय, घर में लक्ष्मी का होगा वास

सूर्यग्रहण की समाप्ति के बाद लोंगों को स्नान करना चाहिए। उसके बाद मां लक्ष्मी को लाल रंग का पुष्प अर्पित कर उनकी पूजा करें। इसके बाद घर-परिवार में कृपा करने की प्रार्थना करें। मां लक्ष्मी की कृपा से घर में धन की कमी नहीं होगी। एक कमल का फूल लेकर उस पर कुमकुम लगाकर बहते पानी में प्रवाहित करें। साथ ही अपने आराध्य देव से यह प्रार्थना करें कि इस फूल के साथ घर-परिवार के सभी दुख, दर्द, संकट और दरिद्रता भी दूर हो जाए, घर में देवी मां लक्ष्मी का वास हो। इसके साथ ही एक कटोरी आटा, एक कटोरी चावल, एक कटोरी काली उड़द की दाल और कुछ पैसे अपने हाथ में लेकर ईश्वर का ध्यान करते हुए प्रार्थना करें कि हे प्रभु सूर्यग्रहण के अशुभ फल हमारे घर-परिवार को कभी ना सताएं।

शनि अमावस्या पर तीन शुभ संयोग

जब कोई अमावस्या शनिवार को पड़ती है तो उसे शनिश्चरी अमावस्या कहा जाता है। साल की पहली शनिश्चरी अमावस्या पर सूर्य ग्रहण लगा है। लेकिन ज्योतिषविद इससे भयभीत होने की बजाय इसे शुभ बता रहे हैं। क्योंकि वैशाख माह की शनि अमावस्या इस बार एक नहीं बल्कि तीन-तीन शुभ संयोग लेकर आई है। इस बार शनि अमावस्या पर मेष राशि में तीन ग्रह सूर्य, चंद्रमा और राहु एकसाथ आ गए हैं। एक ही राशि में तीन ग्रह होने से त्रिग्रही योग बन रहा है। इस दौरान सूर्य अपनी उच्च स्थिति में हैं और शनि अपनी स्वराशि कुंभ में विराजमान हैं। इस बीच प्रीति, आयुष्मान और केदार तीन शुभ योग बन रहे हैं। शुभ योग होने से शनिश्चरी अमावस्या का महत्व और भी बढ़ गया है।

14 साल बाद बनेगा ऐसा शुभ संयोग

आज से पहले वैशाख महीने में तीन साल पहले 2019 में शनि अमावस्या का संयोग बना था और अब 14 साल बाद 2036 में ऐसा संयोग बनेगा। अमावस्या के दिन पितरों के लिए श्राद्ध कर्म भी किए जाते हैं। इससे पितरों की आत्मा तृप्त होती है और वे अपने परिवार और सगे संबंधी को सुखमय जीवन का आशीर्वाद देते हैं।
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सूर्य ग्रहण खत्म, अब जरूर करें ये उपाय

  • ज्योतिष शास्त्र के अनुसार सूर्य ग्रहण समाप्त होने के बाद तुलसी के पौधे में गंगाजल का छिड़काव करें। 
  • ग्रहण खत्म होने के बाद ही गर्भवती महिला को तुरंत स्नान करना चाहिए। 
  • सूर्य ग्रहण समाप्त होने के बाद पूरे घर में और घर के पूजा स्थल में गंगाजल का छिड़काव अवश्य करें। 
  • सूर्य ग्रहण के खत्म होने के बाद तिल, चने की दाल का दान अवश्य करें। 
  • ग्रहण खत्म होने के बाद अपने आराध्य देव के दर्शन अवश्य करें।
  • सूर्य ग्रहण की समाप्ति के बाद परिवार सहित भगवान श्रीहरि विष्णु और माता तुलसी के नामों और मंत्रों का जाप करें।
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