शरीर में हीमोग्लोबिन, शर्करा, लिपिड, लौह और खनिज तत्वों की मात्रा को सामान्य बनाए रखने के लिए रक्त का शुद्ध होना जरूरी है। त्वचा पर धब्बे, संक्रमण, फुंसियां आदि रक्त विकार का ही परिणाम हैं। रक्त की अशुद्धि, अपच और वजन गिरने का कारण भी बनती है। अशुद्ध रक्त से हृदय कमजोर होता है, प्रतिरोधक क्षमता गिरती है। निर्मल मुद्रा इन सबमें उपयोगी है। यह मुद्रा शरीर से विजातीय तत्व को बाहर निकालने के लिए लिवर को प्रोत्साहित करती है।
इससे रक्त शुद्ध होता है। अंगूठे के शीर्ष को अनामिका उंगली की जड़ के पास अंदर की ओर (मध्यमा और अनामिका उंगली के बीच) रखें। शेष चारों उंगलियां सीधी रखें। इसे लेटकर करें। धीमी, लंबी एवं गहरी सांस के साथ 15-15 मिनट के लिए तीन बार करें।