इस व्यवस्था का फायदा केवल कर्मचारियों को ही नहीं होता। इसका फायदा एम्प्लॉयर को भी पहुंचता है।
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इस तरह की हो सकती हैं समस्याएं:
* कमर दर्द या गर्दन में दर्द
* आंखों में दिक्कत
* हाथों, उंगलियों या हथेलियों का दर्द
* सिरदर्द या सिर में भारी भारी लगना
* पैरों में दर्द या सूजन
* छिलने-कटने या गिरने से लगने वाली चोट
* वर्क प्लेस फर्नीचर या टूल्स के कारण लगने वाली चोट, आदि
शोध के अंतर्गत पाया गया था कि अक्सर वर्क प्लेस पर कर्मचारियों को कई तरह की समस्याओं का सामना करना पड़ता है। यह समस्याएं काम के हिसाब से कई तरह की हो सकती हैं। जैसे-
क्यों है जरूरी ऑफिस एर्गोनॉमिक्स?
इस व्यवस्था का फायदा केवल कर्मचारियों को ही नहीं होता। इसका फायदा एम्प्लॉयर को भी पहुंचता है। अगर कर्मचारी बार बार बीमार होगा तो छुट्टी लेना चाहेगा और अपने काम पर पूरी तरह फोकस नहीं कर पायेगा। इससे काम की उत्पादन क्षमता और क्वालिटी पर बुरा असर पड़ सकता है। इसलिए ऑफिस एर्गोनॉमिक्स के तहत इन चीजों को फिक्स किया जाता है। जैसे-
ऑफिस एर्गोनॉमिक्स एक ऐसी व्यवस्था है जिसे दुनियाभर में कई संस्थानों और कर्मचारियों ने अपनाया है।
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* कुर्सी व टेबल को इस तरह तैयार करना या सैट करना कि कर्मचारी की शारीरिक स्थिति पर बुरा असर न पड़े और वह आराम से काम कर सके।
* कर्मचारी को कितने समय तक खड़े रहकर या एक ही स्थिति में बैठकर काम करना पड़ता है, इसको ध्यान में रखते हुए स्थितियों में परिवर्तन करना।
* कार्यस्थल के तापमान, आवाज़ों या लाइट के कारण होने वाले व्यवधानों को ठीक करना।
* जिन टूल्स के साथ कर्मचारी काम कर रहे हैं वे उनके लिए ठीक हैं या नहीं, उन्हें बदलना।
* काम करते समय कर्मचारियों को किस तरह के खतरे हो सकते हैं उनका एनालिसिस करना और उनमें बदलाव लाना, आदि।
ऑफिस एर्गोनॉमिक्स एक ऐसी व्यवस्था है जिसे दुनियाभर में कई संस्थानों और कर्मचारियों ने अपनाया है और इसके काफी अच्छे परिणाम भी मिले हैं। इससे कर्मचारियों के स्वास्थ्य के साथ ही कम्पनी की क्षमता में भी बढ़ोतरी हुई है। स्वयं कर्मचारी भी इस दिशा में योजनाबद्ध तरीके से अपने वर्क प्लेस को बेहतर बनाने में मदद कर सकते हैं।