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ऑफिस एर्गोनॉमिक्स समझते हैं आप? ऑफिस में आपको तो नहीं हो रही ये तकलीफें

सार

कामकाज के तरीके बदले हैं। अब कॉरपोरेट लाइफ में सबकुछ नया और भागदौड़ से भरा है। वर्किंग अवर्स जैसा कुछ बचा ही नहीं। बदले में कामकाज और तौरतरीकों ने सेहत पर भी असर डाला है।

यही कारण है कि अब विशेषज्ञों ने कर्मचारियों की सेहत के बारे में भी गम्भीरता से सोचना शुरू किया है। ऑफिस एर्गोनॉमिक्स ऐसा ही एक तरीका है। जानिए आपका ऑफिस कितना खरा बैठता है इस पैमाने पर।
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इसके अंतर्गत खासकर कर्मचारियों की शारीरिक स्थिति को ध्यान में रखकर काम किया जाता है। - फोटो : istock
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विस्तार
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क्या है ये ऑफिस एर्गोनॉमिक्स?

यह एक तरह के शोध का परिणाम है। जिसके अंतर्गत इस बात को देखा जाता है कि आप क्या काम करते हैं, आपके दफ्तर का एनवायरमेंट कैसा है और आप अपने कामों के लिए किस तरह के टूल्स का प्रयोग करते हैं। एर्गोनॉमिक्स का लक्ष्य होता है आपके ऑफिस वर्क स्पेस को इस तरह से जमाना कि आप अपने काम को सहजता से और पूरी ऊर्जा से कर सकें। इसके अंतर्गत खासकर कर्मचारियों की शारीरिक स्थिति को ध्यान में रखकर काम किया जाता है। यह व्यवस्था ऑफिस की तरफ से भी हो सकती है या कर्मचारी स्वयं भी इसके हिसाब से बदलाव कर सकते हैं। उदाहरण के लिए-

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* आप जिस कुर्सी पर बैठ रहे हैं वह आपके बैठने के लिए पूरी तरह ठीक है या नहीं। कहीं फर्नीचर की वजह से आपको कोई तकलीफ तो नहीं हो रही?

* आपके बैठने की जगह आपके काम के हिसाब से कम्फर्टेबल है या नहीं।

* जो काम आपको दिया जा रहा है उसके करने का तरीका ऐसा तो नहीं जिसके कारण आप एक्स्ट्रा स्ट्रेस या तनाव से गुजर रहे हों।

* ऑफिस में काम करते समय आपके चोटिल होने की कोई आशंका तो नहीं?

ये सारे वे आधार हैं जो लगभग हर तरह के दफ्तर या वर्क प्लेस से जुड़ जाते हैं। चाहे आप शानदार एसी वाले कॉरपोरेट ऑफिस में काम करते हों या किसी फैक्ट्री में। ऑफिस एर्गोनॉमिक्स के अंतर्गत इस बात को ध्यान में रखकर व्यवस्था की जाती है कि कर्मचारियों के लिए वर्क प्लेस पूरी तरह सुरक्षित और आरामदायक हो, ताकि वह निश्चिंत होकर काम कर सकें और अपना 100 परसेंट दे सकें।

इस व्यवस्था का फायदा केवल कर्मचारियों को ही नहीं होता। इसका फायदा एम्प्लॉयर को भी पहुंचता है। - फोटो : iStock


इस तरह की हो सकती हैं समस्याएं:

* कमर दर्द या गर्दन में दर्द
* आंखों में दिक्कत
* हाथों, उंगलियों या हथेलियों का दर्द
* सिरदर्द या सिर में भारी भारी लगना
* पैरों में दर्द या सूजन
* छिलने-कटने या गिरने से लगने वाली चोट
* वर्क प्लेस फर्नीचर या टूल्स के कारण लगने वाली चोट, आदि


शोध के अंतर्गत पाया गया था कि अक्सर वर्क प्लेस पर कर्मचारियों को कई तरह की समस्याओं का सामना करना पड़ता है। यह समस्याएं काम के हिसाब से कई तरह की हो सकती हैं। जैसे-
 


क्यों है जरूरी ऑफिस एर्गोनॉमिक्स?

इस व्यवस्था का फायदा केवल कर्मचारियों को ही नहीं होता। इसका फायदा एम्प्लॉयर को भी पहुंचता है। अगर कर्मचारी बार बार बीमार होगा तो छुट्टी लेना चाहेगा और अपने काम पर पूरी तरह फोकस नहीं कर पायेगा। इससे काम की उत्पादन क्षमता और क्वालिटी पर बुरा असर पड़ सकता है। इसलिए ऑफिस एर्गोनॉमिक्स के तहत इन चीजों को फिक्स किया जाता है। जैसे-
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ऑफिस एर्गोनॉमिक्स एक ऐसी व्यवस्था है जिसे दुनियाभर में कई संस्थानों और कर्मचारियों ने अपनाया है। - फोटो : Pixabay
* कुर्सी व टेबल को इस तरह तैयार करना या सैट करना कि कर्मचारी की शारीरिक स्थिति पर बुरा असर न पड़े और वह आराम से काम कर सके। 

* कर्मचारी को कितने समय तक खड़े रहकर या एक ही स्थिति में बैठकर काम करना पड़ता है, इसको ध्यान में रखते हुए स्थितियों में परिवर्तन करना। 

* कार्यस्थल के तापमान, आवाज़ों या लाइट के कारण होने वाले व्यवधानों को ठीक करना।

* जिन टूल्स के साथ कर्मचारी काम कर रहे हैं वे उनके लिए ठीक हैं या नहीं, उन्हें बदलना। 

* काम करते समय कर्मचारियों को किस तरह के खतरे हो सकते हैं उनका एनालिसिस करना और उनमें बदलाव लाना, आदि।

ऑफिस एर्गोनॉमिक्स एक ऐसी व्यवस्था है जिसे दुनियाभर में कई संस्थानों और कर्मचारियों ने अपनाया है और इसके काफी अच्छे परिणाम भी मिले हैं। इससे कर्मचारियों के स्वास्थ्य के साथ ही कम्पनी की क्षमता में भी बढ़ोतरी हुई है। स्वयं कर्मचारी भी इस दिशा में योजनाबद्ध तरीके से अपने वर्क प्लेस को बेहतर बनाने में मदद कर सकते हैं।
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