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Sawan 2024: सावन के पांच सोमवार है बेहद खास, भगवान शिव पर इन पांच मुट्ठी चीजों को करें अर्पित

Mon, 22 Jul 2024 12:27 PM IST
शिवानी अवस्थी लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला

सार

सावन के महीने में शिव की आराधना अंतर्मन के दुखों को दूर करके ग्रह कष्ट एवं अन्य किसी भी प्रकार की बाधा को दूर कर जीवन में उमंग एवं शुभ तत्व की वृद्धि करती है।
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Sawan 2024 - फोटो : Sawan 2024
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विस्तार
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ज्योतिषाचार्य गुंजन वार्ष्णेय

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सावन को मनभावन कहते हैं। सावन में प्रकृति झूम उठती है। प्रकृति में शिव रहते हैं और शिव की आराधना सावन के दिनों में अमोघ फल देने वाली होती है। इस बार सावन में पांच सोमवार पड़ रहे हैं, जो विशेष फलदायी हैं।

ऋतु बदलते ही सावन और मन बदलते ही जीवन में उमंग की बहार आ जाती है और मनुष्य को जीवन का कायाकल्प करने का एक अन्य अवसर फिर से मिल जाता है, ताकि वह अपने हाथों से भाग्य का नवसृजन कर सके। यूं तो भाग्य एवं भविष्य में घटित होने वाली घटनाओं को बदलना कठिन है, मगर शिव आराधना से भविष्य को सुधारा अवश्य जा सकता है। धर्म शास्त्रों में भगवान शिव के विषय में कहा गया है, ‘भावी मेट सकहिं त्रिपुरारी’, अर्थात शिव भावनाओं को शांत करने में समर्थ हैं, वे ललाट में लिखे विधाता के लेख को भी बदल सकते हैं, इसलिए सावन में शिव आराधना आवश्यक मानी गई है। सावन के महीने में शिव की आराधना अंतर्मन के दुखों को दूर करके ग्रह कष्ट एवं अन्य किसी भी प्रकार की बाधा को दूर कर जीवन में उमंग एवं शुभ तत्व की वृद्धि करती है।
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शिव की आराधना के दिन

शिव की आराधना से मन का दुख और शरीर का कष्ट कम होने लगता है, जिससे जीवन में चमत्कारिक अनुभूति होती है। हर प्रकार के दुख एवं संताप से बचने के लिए, घर-परिवार की सुरक्षा के लिए, स्त्रियों को सावन के महीने में भगवान शिव की आराधना अवश्य करनी चाहिए। भगवान शिव शीघ्र ही प्रसन्न होकर मनोकामना पूर्ति करने वाले देव हैं। भगवान शिव कुंआरी कन्याओं को मनचाहा वर, विवाहिता को संतान सुख आदि प्रदान करते हैं, इसलिए शिव की आराधना करने वाला मनुष्य पृथ्वी पर हर समय सुखपूर्वक निवास करता है। शिव को प्रसन्न करने के लिए सावन मास से बेहतर कोई अन्य समय नहीं है।

दांपत्य जीवन के लिए

सावन के महीने में प्रतिदिन भोले शंकर भगवान को जल चढ़ाकर बेल-पत्र अर्पण करने से उनकी विशेष अनुकंपा प्राप्त होती है। चातुर्मास प्रारंभ होने के बाद यह पहला माह आता है। इसमें चंद्रोदय व्यापिनी द्वितीया तिथि में अशून्य शयन का व्रत किया जाता है। शास्त्रों में कहा गया है कि इस व्रत को करने से पति-पत्नी का दांपत्य जीवन अक्षुण्ण अर्थात लंबी अवधि तक बना रहता है। इसका मान 22 जुलाई, सोमवार को होगा। चंद्रोदय रात्रि 7:53 बजे चंद्रमा को अर्घ्य दिया जाएगा।

पांच सोमवार बेहद खास

सोमवार के दिन का संबंध सोम यानी चंद्र ग्रह से है। चंद्रमा भगवान शिव के मस्तक पर विराजमान है। ज्योतिष शास्त्र अनुसार, चंद्रमा स्त्री कारक ग्रह है एवं मन का प्रतिनिधित्व करता है। इसलिए स्त्रियां अगर सावन में शिव जी की पूजा एवं श्रद्धा-भक्ति से सभी सोमवार का व्रत रखती हैं तो उन्हें किसी भी प्रकार का मनोविकार या दुख नहीं होता। चंद्रमा ही समस्त औषधियों का कारक है, इसलिए सावन के व्रत-उपवास स्वास्थ्य आदि के लिए उत्तम होते हैं।

इस बार सावन का पवित्र मास सोमवार से प्रारंभ होकर सोमवार को ही पूर्ण होगा। भक्तों को सावन में शिव आराधना के लिए पांच सोमवार मिलेंगे। गुरु पूर्णिमा के बाद 22 जुलाई, सोमवार को सावन का ग्रहीय संयोग भक्तों की मनोकामना पूर्ति करने वाला है। सावन के प्रत्येक सोमवार को शिव आराधना करने से चंद्रमा बलवान होता है, जिससे व्यक्ति अपने जीवन में सही निर्णय लेकर हर प्रकार की असफलता एवं संताप से दूर होता है। सोमवार से सावन का प्रारंभ एवं विशिष्ट ग्रह स्थिति व्रतकर्ता महिलाओं सहित सभी के दुखों का संहार कर कल्याण का मार्ग प्रशस्त करेगी, जिसके फलस्वरूप घर-परिवार में सुख-सुविधाओं की वृद्धि होगी।

स्त्रियों के लिए सौभाग्य

सावन के महीने में भगवान शिव के साथ माता पार्वती की पूजा-अर्चना करने से न केवल स्त्रियों के सौभाग्य में वृद्धि होती है, बल्कि ज्ञात-अज्ञात सभी प्रकार की ग्रह पीड़ाओं का समाधान स्वतः शिव कृपा से होने लगता है। इसलिए सावन में व्रत, पूजन अवश्य करना चाहिए। सावन का पूरा महीना मुख्य रूप से देवों के देव महादेव शिव की पूजा-आराधना के लिए सर्वाधिक उपयुक्त माना गया है। भगवान शिव को आराध्य मानकर भक्त सावन मास में पूरे मनोयोग से जप-तप, आराधना करते हैं।
क्या करना चाहिए

धर्म शास्त्रों के अनुसार, श्रावण मास में चातुर्मास व्रती को साग खाना वर्जित है। महाभारत में वर्णित है कि जो मनुष्य पूरे सावन मास में एक समय भोजन करे और भगवान का अभिषेक करे, तो पुण्य प्रताप से भक्त के वंश की वृद्धि होती है तथा भगवान शिव, भक्त की सभी कल्याणकारी मनोकामनाओं को पूरा करते हैं। वामन पुराण में वर्णन आता है कि सावन मास में दूध, घी, गाय का दान करने से भगवान प्रसन्न होते हैं। इस माह में विधि पूर्वक सोमवार व्रत करना चाहिए, सक्षम होने पर पूरे उपवास करें और अक्षम होने पर रात्रि में भोजन कर सकते हैं।
 

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Sawan 2024 - फोटो : अमर उजाला
राम नाम लिखने का अमोघ फल

शंकर-पार्वती जी के संवाद अनुसार, राम नाम विष्णु सहस्रनाम के समान फलदायी है, इसलिए भगवान शंकर, माता पार्वती से कहते हैं कि वे सदा राम नाम जपते हैं- ‘राम रामेति रामेति रमे रामे मनोरमे, सहस्र नाम तत्तुल्यम राम नाम वरानने।’ शास्त्रों के अनुसार, शिव, भगवान राम को और भगवान राम, शिव जी को अपना आराध्य मानते हैं। सावन में प्रतिदिन राम नाम लिखने से श्रीराम के साथ उनके आराध्य भगवान शिव की कृपा सहज रूप से भक्तों को प्राप्त होती है।

यूं तो सावन का प्रत्येक दिन पूजा-पाठ, आराधना के लिए अमोघ फलदायी है, इसलिए यथासंभव सावन के प्रत्येक दिन पूजा करनी चाहिए, लेकिन सावन के मंगलवार और शनिवार को गणेश वंदना, शिवोपासना के साथ राम नाम लिखने से शनि पीड़ा मुक्ति और हनुमत कृपा भी प्राप्त होती है, क्योंकि हनुमान जी, शिव जी के रुद्र अवतार माने गए हैं। लाल रंग की कलम से सावन में प्रतिदिन कम से कम 108 बार राम नाम लिखना चाहिए।

पूजन विधि

सावन में शिव महिमा का गुणगान करते हुए श्रद्धानुसार आपको जो भी शिव मंत्र अथवा स्तोत्र याद हो, उसका पाठ करें। शिवाष्टक, शिव तांडव स्तोत्र, शिव महिम्न स्तोत्र, शिव चालीसा, शिव सहस्त्रनाम, शिव के मंत्रों का जाप पूरी श्रद्धा-भक्ति से करें और कुछ न कर पाएं तो सत्कर्म करते हुए सच्चे मन से शिव जी का हृदय से बारंबार स्मरण करें। सरलता की दृष्टि से मात्र एक लोटा गंगा जल, अक्षत, बेल-पत्र और मुख से बम-बम की ध्वनि निकालने से भी आशुतोष भगवान शिव जी की पूजा परिपूर्ण मानी जाती है। शिवलिंग ब्रह्मांड का प्रतीक है और ब्रह्मांड में सभी ग्रह समाहित हैं। शिव जी की उपासना के प्रभाव से प्रायः सभी अनिष्ट ग्रहों का दुष्प्रभाव निष्फल हो जाता है। श्रावण मास में भगवान शिव का रुद्राभिषेक, महामृत्युंजय जप बड़ी से बड़ी विपदा, रोग, अल्पायु दोष, ग्रह बाधा को भी दूर करने में सक्षम है।

श्रद्धा की पांच मुट्ठी

एक आम आदमी या साधारण गृहस्थ को कठिन अनुष्ठान की अपेक्षा सरल विधि से शिव पूजन करना चाहिए, क्योंकि भोले बाबा भक्तों के मनोभाव से शीघ्र प्रसन्न होकर आशीर्वाद प्रदान करते हैं। सुख-समृद्धि धन प्राप्ति के लिए या अगर आपका कोई महत्वपूर्ण कार्य रुका हुआ है तो उस विशेष कार्य की सिद्धि के लिए आप एक सरल, लेकिन अत्यंत प्रभावशाली प्रयोग अपना सकते हैं। प्राचीन ग्रंथों में इस कल्याणकारी उपाय को शिवामूठ प्रयोग कहा गया है। इसके तहत विशेष अनाज को लेकर पांच मुट्ठी श्रद्धा की अर्पण करने से भक्तों के मनोवांछित कार्य पूरे होते हैं।

भोले भंडारी को प्रसन्न करने के लिए यह एक सरल अचूक उपाय है, लेकिन शर्त यह है कि यह उपाय आपको पांचों सोमवार बिना बाधा के पूरे करना है। इस उपाय के अंतर्गत सावन के पहले सोमवार को शिव मंदिर में जाकर शिवलिंग पर एक मुट्ठी कच्चे साबुत चावल अर्पण करें। इस बात का ध्यान रखें कि चावल टूटे हुए या खंडित न हों।

इसी तरह दूसरे सोमवार को एक मुट्ठी सफेद तिल चढ़ाना चाहिए। तीसरे सोमवार को एक मुट्ठी खड़ी मूंग चढ़ाएं, चौथे सोमवार को एक मुट्ठी जौ का अर्पण करें और पांचवें एवं अंतिम सोमवार को चारों सोमवार को अर्पण की गई वस्तुएं एक-एक मुट्ठी पुनः चढ़ाएं तथा पांचवें सोमवार के निमित्त एक मुट्ठी काला तिल सर्वपीड़ा हरण या निवारण की कामना से शिव को अर्पण करें। श्रद्धापूर्वक पांचों सोमवार को यह क्रम सूर्योदय से लेकर दोपहर 12 बजे से पहले अवश्य पूरा कर लें।

अनिष्ट ग्रहों की शांति

इस बार सावन मास में विशेष ग्रहों की स्थिति को देखें तो वृष राशि में गुरु और मंगल की युति, कुंभ राशि में वक्री शनि, मीन राशि में राहु, कन्या राशि का केतु जैसी ग्रह स्थिति आकाशमंडल में उत्पन्न हो रही है। आकाशीय गोचर ग्रहों की स्थिति एवं अपनी व्यक्तिगत ग्रह दशा के अनुसार ग्रह कष्ट की निवृत्ति के लिए जन्म-कुंडली में चलने वाली महादशा-अंतर्दशा या जो भी ग्रह पीड़ादायक हों, उसके अनुसार सावन में अनिष्ट ग्रहों की शांति स्वयं कर सकते हैं।
  • यदि जन्म-पत्रिका में सूर्य से संबंधित कष्ट है तो सावन में रविवार को शिवोपासना कर शिव मंत्रों का जप करें।
  • यदि जन्म-पत्रिका में चंद्रमा से संबंधित कष्ट है तो शिवलिंग पर दूध की धारा अर्पित करें या रुद्राभिषेक कराएं।
  • यदि जन्म-पत्रिका में मंगल से संबंधित कष्ट है तो सावन में मंगलवार के दिन मंगला गौरी का व्रत कर शिव सहित मां पार्वती की उपासना करें।
  • यदि जन्म-पत्रिका में बुध से संबंधित पीड़ा हो तो सावन में बुधवार को गन्ने के रस से भगवान शंकर का रुद्राभिषेक करें।
  • बृहस्पति ग्रह निर्बल होने के कारण कन्या के विवाह आदि में बाधा आ रही हो तो शिवलिंग पर केसर मिश्रित दूध चढ़ाएं।
  • यदि जन्म-पत्रिका में शुक्र ग्रह से संबंधित कष्ट हो तो पंचामृत, शहद, घृत से भगवान शिव का अभिषेक करें।
  • यदि शनि की साढ़ेसाती से पीड़ा हो या राहु-केतु से संबंधित कष्ट हो तो शिवलिंग पर काला तिल मिश्रित जल पूरे सावन माह में अर्पण करना चाहिए।
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