सावन को मनभावन कहते हैं। सावन में प्रकृति झूम उठती है। प्रकृति में शिव रहते हैं और शिव की आराधना सावन के दिनों में अमोघ फल देने वाली होती है। इस बार सावन में पांच सोमवार पड़ रहे हैं, जो विशेष फलदायी हैं।
ऋतु बदलते ही सावन और मन बदलते ही जीवन में उमंग की बहार आ जाती है और मनुष्य को जीवन का कायाकल्प करने का एक अन्य अवसर फिर से मिल जाता है, ताकि वह अपने हाथों से भाग्य का नवसृजन कर सके। यूं तो भाग्य एवं भविष्य में घटित होने वाली घटनाओं को बदलना कठिन है, मगर शिव आराधना से भविष्य को सुधारा अवश्य जा सकता है। धर्म शास्त्रों में भगवान शिव के विषय में कहा गया है, ‘
भावी मेट सकहिं त्रिपुरारी’, अर्थात शिव भावनाओं को शांत करने में समर्थ हैं, वे ललाट में लिखे विधाता के लेख को भी बदल सकते हैं, इसलिए सावन में शिव आराधना आवश्यक मानी गई है। सावन के महीने में शिव की आराधना अंतर्मन के दुखों को दूर करके ग्रह कष्ट एवं अन्य किसी भी प्रकार की बाधा को दूर कर जीवन में उमंग एवं शुभ तत्व की वृद्धि करती है।
शिव की आराधना के दिन
शिव की आराधना से मन का दुख और शरीर का कष्ट कम होने लगता है, जिससे जीवन में चमत्कारिक अनुभूति होती है। हर प्रकार के दुख एवं संताप से बचने के लिए, घर-परिवार की सुरक्षा के लिए, स्त्रियों को सावन के महीने में भगवान शिव की आराधना अवश्य करनी चाहिए। भगवान शिव शीघ्र ही प्रसन्न होकर मनोकामना पूर्ति करने वाले देव हैं। भगवान शिव कुंआरी कन्याओं को मनचाहा वर, विवाहिता को संतान सुख आदि प्रदान करते हैं, इसलिए शिव की आराधना करने वाला मनुष्य पृथ्वी पर हर समय सुखपूर्वक निवास करता है। शिव को प्रसन्न करने के लिए सावन मास से बेहतर कोई अन्य समय नहीं है।
दांपत्य जीवन के लिए
सावन के महीने में प्रतिदिन भोले शंकर भगवान को जल चढ़ाकर बेल-पत्र अर्पण करने से उनकी विशेष अनुकंपा प्राप्त होती है। चातुर्मास प्रारंभ होने के बाद यह पहला माह आता है। इसमें चंद्रोदय व्यापिनी द्वितीया तिथि में अशून्य शयन का व्रत किया जाता है। शास्त्रों में कहा गया है कि इस व्रत को करने से पति-पत्नी का दांपत्य जीवन अक्षुण्ण अर्थात लंबी अवधि तक बना रहता है। इसका मान 22 जुलाई, सोमवार को होगा। चंद्रोदय रात्रि 7:53 बजे चंद्रमा को अर्घ्य दिया जाएगा।
पांच सोमवार बेहद खास
सोमवार के दिन का संबंध सोम यानी चंद्र ग्रह से है। चंद्रमा भगवान शिव के मस्तक पर विराजमान है। ज्योतिष शास्त्र अनुसार, चंद्रमा स्त्री कारक ग्रह है एवं मन का प्रतिनिधित्व करता है। इसलिए स्त्रियां अगर सावन में शिव जी की पूजा एवं श्रद्धा-भक्ति से सभी सोमवार का व्रत रखती हैं तो उन्हें किसी भी प्रकार का मनोविकार या दुख नहीं होता। चंद्रमा ही समस्त औषधियों का कारक है, इसलिए सावन के व्रत-उपवास स्वास्थ्य आदि के लिए उत्तम होते हैं।
इस बार सावन का पवित्र मास सोमवार से प्रारंभ होकर सोमवार को ही पूर्ण होगा। भक्तों को सावन में शिव आराधना के लिए पांच सोमवार मिलेंगे। गुरु पूर्णिमा के बाद 22 जुलाई, सोमवार को सावन का ग्रहीय संयोग भक्तों की मनोकामना पूर्ति करने वाला है। सावन के प्रत्येक सोमवार को शिव आराधना करने से चंद्रमा बलवान होता है, जिससे व्यक्ति अपने जीवन में सही निर्णय लेकर हर प्रकार की असफलता एवं संताप से दूर होता है। सोमवार से सावन का प्रारंभ एवं विशिष्ट ग्रह स्थिति व्रतकर्ता महिलाओं सहित सभी के दुखों का संहार कर कल्याण का मार्ग प्रशस्त करेगी, जिसके फलस्वरूप घर-परिवार में सुख-सुविधाओं की वृद्धि होगी।
स्त्रियों के लिए सौभाग्य
सावन के महीने में भगवान शिव के साथ माता पार्वती की पूजा-अर्चना करने से न केवल स्त्रियों के सौभाग्य में वृद्धि होती है, बल्कि ज्ञात-अज्ञात सभी प्रकार की ग्रह पीड़ाओं का समाधान स्वतः शिव कृपा से होने लगता है। इसलिए सावन में व्रत, पूजन अवश्य करना चाहिए। सावन का पूरा महीना मुख्य रूप से देवों के देव महादेव शिव की पूजा-आराधना के लिए सर्वाधिक उपयुक्त माना गया है। भगवान शिव को आराध्य मानकर भक्त सावन मास में पूरे मनोयोग से जप-तप, आराधना करते हैं।
क्या करना चाहिए
धर्म शास्त्रों के अनुसार, श्रावण मास में चातुर्मास व्रती को साग खाना वर्जित है। महाभारत में वर्णित है कि जो मनुष्य पूरे सावन मास में एक समय भोजन करे और भगवान का अभिषेक करे, तो पुण्य प्रताप से भक्त के वंश की वृद्धि होती है तथा भगवान शिव, भक्त की सभी कल्याणकारी मनोकामनाओं को पूरा करते हैं। वामन पुराण में वर्णन आता है कि सावन मास में दूध, घी, गाय का दान करने से भगवान प्रसन्न होते हैं। इस माह में विधि पूर्वक सोमवार व्रत करना चाहिए, सक्षम होने पर पूरे उपवास करें और अक्षम होने पर रात्रि में भोजन कर सकते हैं।