ये अंश चेतन भगत की बेस्ट सेलर किताब 'द 3 मिस्टेक्स ऑफ माइ लाइफ' से लिया गया है।
'मैं नहीं जानता कि यह मोमबत्ती की रोशनी थी या जन्मदिन का मूड या कुशन या कुछ भी। लेकिन मैंने यहां तब अपने जीवन की दूसरी गलती की।'
'मैंने उसकी कुर्ती के ऊपर के बटन को खोला और अपनी अंगुलियां कुर्ती के अंदर डाल दी। मेरी अंदर की आवाज ने मुझे रोकने की कोशिश की, मैंने अपना हाथ बाहर निकाल दिया, 'लुकिन उसने मुझे चूमने को जारी रखने के साथ अपनी कुर्ती के बाकी के बटन भी खोल दिए। उसने मुझे अपनी तरफ खींच लिया।'
''विद्या...'' 'उस समय तक मेरे हाथ उस जगह पहुंच गये थे जहां पर किसी व्यक्ति के लिए हटाने मुश्किल थे। इसीलिये मैं भावना, परवाह, इच्छा या जो कुछ भी लोग इस कहते हैं, जो मानव की समझ को उड़ा देती है, उसमें बह गया।'
उसने अपनी कुर्ती उतार दी ''अपने हाथ हटाओ वे भाग नहीं जायेंगे।'' ''हां'' मैंने कहा।
उसने अपनी ब्रा की तरफ इशारा करते हुए कहा,'' मैं इसे कैसे उतारूं।''
'मैंने अपने हाथ उस के पेट पर रखे और वह ब्रा उतार कर मेरे ऊपर लेट गई।'
उसने मेरी कमीज को पकड़ते हुए कहा, ''इसे उतारो, '' उस समय अगर वह मुझे छत से छलांग लगाने को भी कहती तो मैं करता। इसीलिये मैंने उस के निर्देशों का पालन किया।
'ना संगीत रूका, ना हम'। हम आगे और आगे बढ़ते गये जैसे-जैसे केक की मोमबत्तियां एक के बाद- एक जलती रहीं। 'हमारा शरीर पसीने की बूंदों से चमकने लगा।'
विद्या बीच में एक बार को छोड़कर कुछ नहीं बोली।
'' क्या तुम मेरे ऊपर से नीचे आओगे।' उसने ऐसा करने के बाद ही कहा।
'मैं नीचे गया और ऊपर आ गया।' हम जैसे ही एक हुए, हमने एक-दूसरे की आंखों में देखा। नीचे से चीखें जारी थी क्योंकि इंग्लैंड कुछ विकटें खो चुका था।
केवल चार मोमबत्तियां बची थीं, जब तक हमने खत्म किया। हमने छः कुशनों को जोड़ कर एक गद्दा बनाया और उस पर लेट गये। हमें तब पता चला कि उस समय कितनी सर्दी और ठण्डी हवा चल रही थी। हमने अपने आप को मेरी जैकेट से ढक लिया और अपने ठण्डे पांच कुशन के नीचे कर लिये।
''वाह, मैं व्यस्क हो गई हूं और कुंआरी भी नहीं रही हूं, क्या बात है, धन्यवाद भगवान, ''उसने मुस्कुराते हुए कहा। वह मेरे साथ सिमट गई। एक सच्चाई की भावना, जोश के कम होते ही दिखाई देने लगी।