राष्ट्रपिता और अहिंसा के पुजारी महात्मा गांधी को सरला देवी चौधरानी से प्रेम हो गया था। सरला देवी चौधरानी प्रगतिशील महिला थीं और उस वक्त लाहौर में अपने पति के साथ रहती थीं। महात्मा गांधी, सरला देवी चौधरानी के आकर्षक व्यक्तित्व की तरफ आकर्षित हो गए थे। प्रसिद्ध इतिहासकार रामचंद्र गुहा ने अपनी किताब में इस बात का जिक्र किया है।
सरला देवी चौधरानी, गुरुदेव रवींद्रनाथ टैगोर के बहन की बेटी थीं। रवींद्रनाथ टैगोर की ही तरह उनकी भांजी सरला देवी चौधरानी भी कविताएं लिखती थीं। उनकी आवाज भी बेहद मधुर थी और अक्सर अंग्रेजों से आजादी दिलाने के लिए होने वाली बैठकों के दौरान वह गाना गाया करती थीं।
महात्मा गांधी ने भी सरला देवी चौधरानी को गाते हुए सुना था। रामचंद्र गुहा ने अपनी किताब 'गांधी- द इयर दैट चेंज्ड द वर्ल्ड' में बताया है कि सरला देवी चौधरानी स्वतंत्र मानसिकता की थीं और उनका व्यक्तित्व करिश्माई था।
सरला देवी चौधरानी की भाषा, संगीत और लेखन में गहरी रुचि थी। महात्मा गांधी लाहौर में सरला के घर ही रुके थे। उस वक्त सरला देवी के पति स्वतंत्रता सेनानी रामभुज दत्त चौधरी जेल में थे। गांधी और सरला दोनों एक दूसरे के करीब रहे। यहां तक कि गांधी सरला को अपनी 'आध्यात्मिक पत्नी' बताते थे। हालांकि बाद के दिनों में गांधी ने ये भी माना कि इस रिश्ते की वजह से उनकी शादी टूटते-टूटते बची।
बता दें कि दो अक्तूबर 2019 को पूरा देश राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की 150वीं जयंती का जश्न मनाएगा। दो अक्तूबर 1869 में गुजरात के पोरबंदर में पैदा हुए मोहनदास करमचंद गांधी को पूरी दुनिया अहिंसा के पुजारी के रूप में पूजती है।
भारत की आजादी में महात्मा गांधी के अतुल्य योगदान पर हर भारतीय को गर्व है। महात्मा गांधी अपने सादा-जीवन और उच्च विचारों के चलते प्यार से भारतीयों के बापू बन गए। महात्मा गांधी ने ही विश्व को सत्य की शक्ति से परिचय करवाया।
गांधी के सत्याग्रह की ही बदौलत अंग्रेज भारत छोड़ने पर मजबूर हो गए। गांधी एकमात्र ऐसे व्यक्ति हुए जिन्होंने अपनी आत्मकथा- 'सत्य के साथ मेरे प्रयोग' में अपने बारे में सारी बातों को खुलकर लिखा। हालांकि, सरला देवी और गांधी के बीच के रिश्ता का जिक्र सिर्फ इतिहासकार रामचंद्र गुहा की किताब में मिलता है।