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Rabindranath Tagore Death Anniversary: जीने की नई राह दिखाते हैं रवींद्रनाथ टैगोर के अनमोल विचार

Fri, 07 Aug 2020 12:56 PM IST
निलेश कुमार लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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रवींद्रनाथ टैगोर - फोटो : अमर उजाला
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"सिर्फ खड़े होकर पानी देखने से आप नदी पार नहीं कर सकते।" यह विचार है प्रसिद्ध कवि, कहानीकार, गीतकार, संगीतकार, चित्रकार और नाटककार रवींद्रनाथ टैगोर का। कोरोना महामारी के समय उनके इस विचार की प्रासंगिकता और बढ़ जाती है। भारत समेत तमाम देश इस महामारी के खिलाफ दिन-रात काम कर रहे हैं। रवींद्रनाथ टैगोर, देश की महान विभूतियों में से एक हैं। वे अकेले ऐसे कवि हैं, जिनकी रचनाएं दो देशों का राष्ट्रगान बनीं। रवींद्रनाथ टैगोर भारत के राष्ट्रगान 'जन गण मन' के अलावा बांग्लादेश के राष्ट्रगान 'आमार सोनार बांग्ला' के भी रचियता हैं। रवींद्रनाथ टैगोर का जन्म सात मई 1861 को कोलकाता में हुआ था। सात अगस्त 1913 में उनकी मृत्यु हो गई थी। आज उनकी पुण्यतिथि पर आइए जानते हैं उनके अनमोल विचारों के बारे में: 

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रविंद्रनाथ टैगोर - फोटो : अमर उजाला
हम महानता के सबसे करीब तब होते हैं जब हम विनम्रता में महान होते हैं।

रविंद्रनाथ टैगोर - फोटो : अमर उजाला
मिटटी के बंधन से मुक्ति पेड़ के लिए आजादी नहीं है।

रविंद्रनाथ टैगोर - फोटो : अमर उजाला
हमेशा तर्क करने वाला दिमाग धार वाला वह चाकू है जो प्रयोग करने वाले के हाथ से ही खून निकाल देता है।

रविंद्रनाथ टैगोर - फोटो : अमर उजाला
चंद्रमा अपना प्रकाश संपूर्ण आकाश में फैलाता है परंतु अपना कलंक अपने ही पास रखता है।

रविंद्रनाथ टैगोर - फोटो : अमर उजाला
केवल प्रेम ही वास्तविकता है, ये महज एक भावना नहीं है। यह एक परम सत्य है जो सृजन के ह्रदय में वास करता है।

रविंद्रनाथ टैगोर - फोटो : अमर उजाला
किसी बच्चे की शिक्षा अपने ज्ञान तक सीमित मत रखिए, क्योंकि वह किसी और समय में पैदा हुआ है।

रविंद्रनाथ टैगोर - फोटो : अमर उजाला
फूल की पंखुड़ियों को तोड़ कर आप उसकी सुंदरता को इकठ्ठा नहीं कर सकते हैं।

रविंद्रनाथ टैगोर - फोटो : अमर उजाला
आइए हम यह प्रार्थना न करें कि हमारे ऊपर खतरे न आएं, बल्कि यह प्रार्थना करें कि हम उनका निडरता से सामना कर सकें।

रविंद्रनाथ टैगोर - फोटो : अमर उजाला
आश्रय के एवज में यदि आश्रितों से काम ही लिया गया, तो वह नौकरी से भी बदतर है। उससे आश्रयदान का महत्त्व ही जाता रहता है।
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रविंद्रनाथ टैगोर - फोटो : अमर उजाला
बर्तन में रखा पानी हमेशा चमकता है और समुद्र का पानी हमेशा गहरे रंग अस्पष्ट का होता है। लघु सत्य के शब्द हमेशा स्पष्ट होते हैं, महान सत्य मौन रहता है।
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