नवरात्रों में भारत में कन्याओं को देवी तुल्य मानकर पूजा जाता है पर कुछ लोग नवरात्रि के बाद यह सब भूल जाते हैं। बहुत जगह कन्याओं पर शोषण होता है, उनका अपमान किया जाता है। आज भी भारत में कन्या के जन्म पर दुःख मनाया जाता है। ऐसा क्यों? क्यों आप देवी मां के इन रूपों का ऐसा अपमान करते है? हर कन्या अपना भाग्य खुद लेकर आती है। कन्याओं के प्रति समाज को सोच बदलनी पड़ेगी यह देवी तुल्य है देवी तुल्य इन कन्याओं और महिलाओं का सम्मान करें। इनका आदर कर आप ईश्वर की पूजा के बराबर पुण्य प्राप्त करते हैं। शास्त्रों में भी बताया गया है कि जिस घर में नारी का सम्मान होता है, वहां खुद ईश्वर वास करते हैं।
शास्त्रों में दो साल की कन्या कुमारी, तीन साल की त्रिमूर्ति, चार साल की कल्याणी, पांच साल की रोहिणी, छ: साल की कालिका, सात साल की चंडिका, आठ साल की शाम्भवी, नौ साल की दुर्गा और दस साल की कन्या सुभद्रा मानी जाती हैं। भोजन कराने के बाद कन्याओं को दक्षिणा देनी चाहिए। इस प्रकार महामाया भगवती प्रसन्न होकर मनोरथ पूर्ण करती हैं।
साथ ही साथ अगर आप नवरात्रों में अगर आप कन्या पूजन कर रहे हैं या नहीं भी कर रहे हैं किन्तु आपको यह संकल्प इन नवरात्रों में अवश्य लेना चाहिए कि आप समाज की कन्याओं और महिलाओं को हमेशा आदर भाव देंगे। शायद नवरात्रों में माता को यही सबसे बड़ी भेंट हो सकती है।