कैंसर के उपचार को अधिक प्रभावी व अपेक्षाकृत आसान बनाने के लिए अब नई तकनीकी हमारे देश में भी उपलब्ध है। कैंसर के दौरान मरीज के शरीर के किस हिस्से में ट्यूमर है, इसकी पहचान करने के लिए पेट एमआरआई स्कैनिंग अब कैंसर के उपचार की प्रक्रिया को आसान बना सकती है।
दिल्ली के इंद्रप्रस्थ अपोलो अस्पताल दिमाग के कैंसर के परीक्षण के लिए पेट एमआरआई परीक्षण की सुविधा शुरू हो चुकी है।
कैंसर के लिए होने वाली सर्जरी व रेडियोथेरेपी के बावजूद भी इस बारे में आश्वस्त नहीं हो सकते हैं कि रेडिएशन से कितनी क्षति पहुंच सकती है या ट्यूमर दोबारा न पनपा हो। ऐसे में पेट एमआरआई विधि से परीक्षण करके उपचार की प्रक्रिया को अधिक प्रभावी बनाया जा सकता है।
कैसे होती है यह स्कैनिंग?
पेट स्कैनिंग यानी पोजिट्रॉन एमिशन टोमोग्राफी एक न्यूक्लियर मेडिसिन इमेजिंग तकनीक है। इसमें शरीर में एक रेडियोएक्टिव तत्व डाला जाता है जो आमतौर पर एफडीजी यानी फ्लूरोडियोऑक्सग्लिकोज होता है। यह ग्लूकोज पूरे शरीर में फैल जाता है और जिन हिस्सों में यह जमा या गाढ़ा होता है, उनमें ट्यूमर की आशंका हो सकती है।
शरीर के 3डी स्कैनिंग के जरिए, उस हिस्से को खोजा जा सकता है जिसमें कैंसर हो। अब तक करीब 93 प्रतिशत मामलों में सि विधि से कैंसर के परीक्षण में सफलता मिल चुकी है।
कब-कब कराएं
कैंसर के उपचार के बाद भी दोबारा ट्यूपर पनपने की आशंका से बचने के लिए 35 साल की उम्र के बाद हर पांच साल में एक बार यह स्कैनिंग करवानी चाहिए। 45 साल के बाद तीन साल में एक बार और 50 साल की आयु के बाद हर दो साल में एक बार इस एमआरआई स्कैनिंग को करवाना चाहिए।
डॉक्टरों का मानना है कि इस विधि से स्कैनिंग में रेडिएशन से होने वाला रिस्क लगभग न के बराबर है।
क्या कीमत है
एफडीजी का अस्तेमाल कर किसी स्वस्थ व्यक्ति के पेट एमआरआई परीक्षण का खर्च करीब 35,000 रुपए है। वहीं कैंसर से संभावित व्यक्ति के परीक्षण के लिए इसका खर्च 55,000 रुपए है। शरीर के किसी विशेष हिस्से पर यह परीक्षण करवाने की लागत 40,000 से 45,000 तक है।
सुपर मॉलिक्यूल्स की सहायता से पेट एमआरआआई करवाने का खर्च 45,000 रुपए तक आ सकता है।