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जिसे आप एसिडिटी समझ रहे हैं, कहीं हार्ट अटैक तो नहीं

Tue, 18 Sep 2012 05:15 PM IST
नई दिल्ली/इंटरनेट डेस्क
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अचानक एक रात 44 वर्षीय तमन्ना को पेट में दर्द उठा और उल्टियां शुरू हो गईं। पहले तो कुछ घंटों तक उन्होंने इंतजार किया कि यह दर्द एसिडिटी की वजह से हो रहा है लेकिन जब हालत और बिगड़ गई तब उन्हें डॉक्टर के पास पहुंचाया गया। डॉक्टर ने टेस्ट के बाद बताया कि यह कोई साधारण  दर्द नहीं बल्कि दिल का दौरा है तो तमन्ना के परिवारवालों के होश उड़ गए। उन्होंने कभी सपने में भी कल्पना नहीं की होगी कि दिल के दौरे का कोई संबंध पेट दर्द से भी हो सकता है।
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दिल के दौरे की पहचान अगर सही समय पर हो जाए तो इसके उपचार में बहुत मदद मिल सकती है लेकिन कई बार लोगों में इसके लक्षणों और इससे जुड़ी जानकारी का अभाव होता है, जिस वजह से रोगी को जान तक से हाथ धोना पड़ जाता है।

कई बार हो जाते हैं भ्रम
वरिष्ठ जनरल फिजिशयिन डॉ. के.सी. सूद इस बारे में बताते हैं, 'कई बार हमारे पास ऐसे केस आते हैं जिसमें रोगी के लक्षणों को लोग गंभीरता से नहीं लेते और उन्हें एसिडिटी या मस्कुलर पेन समझकर इलाज में देरी कर बैठते हैं। ऐसे में किसी भी प्रकार के सीने के दर्द को कभी भी हल्के में नहीं लेना चाहिए और इसका सही समय पर उपचार जरूर कराना चाहिए।'
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ये भी हो सकते हैं लक्षण
जरूरी नहीं कि किसी व्यक्ति को दिल के दौरे के दौरान सीने में तेज दर्द ही हो, कई बार सीने के मध्य भाग और बाएं भाग में दर्द, बेचैनी, बहुत अधिक पसीना, उल्टियां, पेट में दर्द, सीने में जलन, सांस लेने में दिक्कत, बहुत अधिक कमजोरी महसूस होना जैसे लक्षण भी हो सकते हैं।

हो सकता है कि मैनोपॉज के पहले महिलाओं में दिल के दौरे के लक्षण थोड़े अलग हों जैसे उन्हें पेट दर्द के साथ उल्टियां आदि समस्याएं हों लेकिन मैनोपॉज के बाद अधिक उम्र की महिलाओं और पुरुषों के लक्षण सामान्यतः एक जैसे ही होते हैं।

क्या करें, क्या न करें
डॉ. सूद बताते हैं, 'किसी भी प्रकार के सीने में दर्द को बिल्कुल हल्के में न लें और तुरंत चिकित्सक से संपर्क करें। ऐसी परिस्थिति में बिना किसी देरी के रोगी का ईसीजी टेस्ट जरूर करवा लें जिससे दिल के दौरे की पहचान सही समय पर हो सके। डॉक्टरों के लिए भी मेरी सलाह है कि ऐसी परिस्थिति में इलाज शुरू करने के पहले ईसीजी टेस्ट जरूर करवाएं।'

इस दौरान रोगी के नब्ज चेक करें। उसे बिल्कुल भी अकेला न छोड़ें और अगर वे होश में हैं तो उन्हें ऐस्प्रिन दवा खिला दें जिससे उनका खून क्लॉट न हो। बहुत शोर-शराबा न करें और रोगी को चलने न दें। 
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