कोरोना महामारी ने स्वास्थ्य के साथ अन्य कई तरह की सामाजिक समस्याओं को भी बढ़ा दिया है। देश में कोरोना की आई अब तक दो लहरों का रोजगार पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा जिसके कारण कई लोगों का सामान्य रहन-सहन काफी प्रभावित हुआ है। महामारी ने शिक्षा व्यवस्था को भी दुर्गम बना दिया है। इन्हीं सब समस्याओं को देखते हुए कर्नाटक के हुनसेकट्टे के सरकारी उच्च प्राथमिक विद्यालय में फिजिकल एजूकेशन की शिक्षिका अनीता मैरी बड़ी पहल की है। अनीता ने कोविड के दौरान अनाथ हो चुके बच्चों के कल्याण के लिए काम करने का फैसला किया है। 57 वर्षीय शिक्षका अनीता कहती हैं, बच्चों की शिक्षा इस महामारी के दौरान काफी प्रभावित हुई है। मैंने एक छोटी सी कोशिश की है, जिससे अनाथ बच्चों की इस समस्या को दूर किया जा सके।
कोविड के दौरान अनाथ हुए बच्चों के लिए अनोखी पहल
अनीता कहती हैं, विद्यागामा योजना के दौरान बच्चों की पढ़ाई के लिए स्कूलों से 25-30 पेज से अधिक के नोट्स उपलब्ध कराए जाते हैं। हालांकि कोरोना के दौरान अनाथ हो चुके छात्रों के लिए इन नोट्स की फोटोकॉपी कराना आसान नहीं था। इसी समस्या को दूर करने के लिए मैंने काफी संघर्ष के बाद इज़राइल के अर्पित परेरा से संपर्क किया। उन्होंने ऐसे छात्रों के लिए एक फोटोकॉपी-कम-प्रिंटर मशीन दान की है, जिससे बच्चों के लिए नोट्स की फोटोकॉपी कराना अब आसान हो गया है।