पेट की समस्या वाले मरीजों के बढ़े मामले
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अस्पतालों में बढ़ रहे मरीज
अमर उजाला से बातचीत में पश्चिमी दिल्ली स्थित एक निजी अस्पताल में जनरल फिजिशियन डॉ रविंद्र शर्मा बताते हैं कि इन दिनों ओपीडी में रोजाना उल्टी, पीलिया,
पेट दर्द और पाचन की अन्य समस्याओं के साथ आने वाले मरीजों की संख्या में वृद्धि हुई है। जांच में कई रोगियों में हेपेटाइटिस ए या ई संक्रमण देखा जा रहा है। चूंकि कई स्थानों पर बारिश के कारण जलजमाव और अस्वच्छता की स्थिति है, ऐसे में हर साल इस तरह के मामले बढ़ जाते हैं।
इस मौसम में अस्वच्छता के कारण पीने का पानी भी दूषित हो जाता है, जो इन रोगों का प्रमुख कारण है। इसके अलावा रेहड़ी-पटरी से बिना सही तरीके के रख रखाव वाली चीजें खाने से भी हेपेटाइटिस और पेट से संबंधित अन्य समस्याओं का खतरा बढ़ जाता है।
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हेपेटाइटिस के कारण हो सकती हैं लिवर की समस्याएं
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लिवर की बढ़ सकती हैं समस्याएं
नोएडा के अस्पतालों से प्राप्त हो रही जानकारियों के मुताबिक यहां भी ओपीडी में हेपेटाइटिस से संबंधित रोगियों की संख्या में बढ़ोतरी देखी गई है।
डॉक्टर कहते हैं आमतौर पर हेपेटाइटिस ए और ई स्वतः ठीक होने वाली बीमारियां हैं, लेकिन कई बार इन्हें पूरी तरह से ठीक होने में दो से छह हफ्ते लग सकते हैं। जिन लोगों की प्रतिरोधक क्षमता कमजोर है उनमें इससे गंभीर रोग होने का भी जोखिम रहता है इसलिए जिन स्थानों पर जलजमाव-अस्वच्छता की स्थिति है वहां पर लोगों को विशेष सावधानी बरतनी चाहिए।
हेपेटाइटिस की स्थिति कई बार पीलिया और गंभीर स्थितियों में लिवर में इंफ्लेमेशन के खतरे क बढ़ाने वाली हो सकती है।
हेपेटाइटिस ए और ई के बारे में जानिए
हेपेटाइटिस-ए एक वायरल लिवर संक्रमण है जो ज्यादातर दूषित पानी और भोजन से फैलता है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के अनुसार, हर साल दुनियाभर में लगभग 15 लाख लोग हेपेटाइटिस ए से प्रभावित होते हैं। इसके लक्षणों में थकान, भूख न लगना, बुखार, उल्टी और पीलिया शामिल हैं। अच्छी बात यह है कि हेपेटाइटिस ए आमतौर पर क्रॉनिक नहीं होता और समय पर दवाओं, आराम व देखभाल से ठीक हो जाता है।
हेपेटाइटिस ए की ही तरह हेपेटाइटिस ई भी दूषित पानी से फैलता है। इसके शिकार लोगों में भूख न लगने, बुखार, उल्टी, थकान और पीलिया की समस्या देखी जाती है। यह बीमारी गर्भवती महिलाओं और कमजोर इम्युनिटी वाले मरीजों के लिए बहुत खतरनाक हो सकती है। हेपेटाइटिस ई का कोई खास इलाज नहीं है, इसलिए बचाव ही सबसे बेहतर उपाय माना जाता है।
जल की स्वच्छता पर ध्यान देते रहना जरूरी
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कैसे करें इन रोगों से बचाव
स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, मानसून के दिनों में इन बीमारियों का खतरा अधिक होता है। खुले में रखी बाहर की चीजें, कटे फल या खुला खाना खाने से बीमारी का खतरा कई गुना बढ़ जाता है। यही कारण है कि इन दिनों आसपास की स्वच्छता और साफ पानी के इस्तेमाल पर विशेष ध्यान दिया जाना चाहिए।
इन रोगों से बचे रहने के लिए हमेशा उबला या फिल्टर किया हुआ पानी पिएं और बाहर का कुछ भी खाने से बचें। फल और सब्जियां धोकर ही इस्तेमाल करें। भोजन पकाते और खाते समय हाथ धोना जरूरी है। घरों के आसपास जलजमाव रोकें और स्वच्छता बनाए रखें।
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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है।
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