प्रतीकात्मक तस्वीर
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ह्यूमन ट्रायल की प्रक्रिया कैसी होती है?
दीपक बताते हैं कि पहले दिन मुझे बाजू में इंजेक्शन दिया गया। उस दिन थोड़ा बुखार आया और कंपकंपी हुई। वो कहते हैं, 'इंजेक्शन वाली जगह पर थोड़ी सूजन भी थी, जो डॉक्टरों के मुताबिक नॉर्मल बात थी। इसके अलावा मुझे हर दिन अस्पताल के साथ आधे घंटे का समय बिताना पड़ता है। मुझे एक ई-डायरी रोज भरनी पड़ती है, जिसमें रोज शरीर का तापमान, पल्स, वजन, बीपी, इंजेक्शन की जगह जो दाग हुआ उसको मापने की प्रक्रिया पूरी कर, फॉर्म भरना पड़ता था। इसके लिए जरूरी सारा सामान अस्पताल से दिया जाता है।'
'इसमें ये भी बताना पड़ता है कि आप बाहर गए, किस किस से मिले, मास्क पहन रहे हैं या नहीं, खाना क्या खा रहे हैं। 28 दिनों तक इसका पूरा ब्यौरा हमें ई-डायरी में भरना पड़ता है। इस पूरी प्रक्रिया के दौरान डॉक्टर लगातार आपसे फोन पर संपर्क में रहते हैं, रेगुलर फॉलोअप किया जाता है। सात जुलाई को भी फॉलो-अप हुआ है यानी अप्रैल से शुरू हुई प्रकिया जुलाई तक चल रही है।'