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Silent Immunity: क्या कोरोना संक्रमण से बचाएगी 'साइलेंट इम्यूनिटी'? फ्रांस के वैज्ञानिकों ने शोध में किया यह दावा

Sun, 12 Jul 2020 02:50 AM IST
निलेश कुमार लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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Silent Immunity: साइलेंट इम्यूनिटी कोरोना संक्रमण से बचाएगी? - फोटो : Pixabay/Amar Ujala
कोरोना वायरस संक्रमण को रोकने के लिए लंबे समय से हर्ड इम्यूनिटी की चर्चा हो रही है। हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि यह बहुत सुरक्षित तरीका नहीं है। हर्ड इम्यूनिटी यानी अगर एक बड़ी आबादी कोरोना से संक्रमित हो जाए तो उनमें पैदा हुई इम्यूनिटी की बदौलत बाकी लोग भी इस संक्रमण से सुरक्षित हो जाते हैं। इसी तरह का एक दावा फ्रांस के वैज्ञानिकों ने लंबे अध्ययन के बाद किया है। वैज्ञानिकों का दावा है कि कोरोना मरीजों के साथ रहने वाले लोग इस महामारी से बच सकते हैं। फ्रांस के स्ट्रासबर्ग यूनिवर्सिटी अस्पताल के शोधकर्ताओं ने इसे 'साइलेंट इम्यूनिटी' नाम दिया है। आइए जानते हैं इस बारे में विस्तार से:
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
  • फ्रांस के वैज्ञानिकों ने लंबे अध्ययन के बाद यह दावा किया है कि एक घर में किसी के कोरोना पॉजिटिव होने के बाद वहां के तीन चौथाई सदस्यों के शरीर में साइलेंट इम्यूनिटी विकसित हो जाती है। इसके बाद अगर कहीं वे संक्रमण की चपेट में आ गए तो शरीर में पैदा हुई इसी रक्षा कवच की वजह से खुद-ब-खुद ठीक भी हो जाएंगे।
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
  • फ्रांस के स्ट्रासबर्ग यूनिवर्सिटी अस्पताल के शोधकर्ताओं ने इसे साइलेंट इम्यूनिटी नाम दिया है। उनके मुताबिक, ब्लड की एंटीबॉडी जांच से यह पता नहीं लग पाता कि कोरोना के खिलाफ शरीर में इम्यूनिटी विकसित हो चुकी है। विशेषज्ञों के मुताबिक, अगर कोरोना वायरस के खिलाफ शरीर में एंटीबॉडी बन रही है तो आप जल्दी इस महामारी से ठीक हो सकते हैं।  

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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
  • वैज्ञानिकों का मानना है कि दुनिया की 10 फीसदी आबादी में कोरोना वायरस के खिलाफ प्रतिरक्षा विकसित हो चुकी है। एंटीबॉडी जांच के आधार पर उनका यह आकलन है कि 10 फीसदी आबादी कोरोना वायरस के हल्के लक्षणों से संक्रमित होकर खुद ही ठीक हो चुकी है। हालांकि हालिया शोध के मुताबिक, दुनिया में संक्रमित हो चुके लोगों की संख्या अनुमान से ज्यादा हो सकती है क्योंकि उनमें साइलेंट इम्यूनिटी विकसित हो चुकी है। 
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
साइलेंट इम्यूनिटी ने शोधकर्ताओं को चौंकाया
  • शोधकर्ताओं ने शोध अध्ययन के दौरान कोरोना संक्रमित एक परिवार के सात लोगों में विशेष तरह की एंटीबॉडी का पता लगाया जो कि चौंकाने वाला था। एक परिवार के आठ में से छह सदस्यों यानी एक चौथाई सदस्यों का एंटीबॉडी टेस्ट निगेटिव निकला, जिससे वैज्ञानिकों ने अनुमान लगाया कि ये संक्रमित नहीं हुए थे। लेकिन उनके बोन मैरो में टी-कोशिकाओं की जांच करने पर पाया कि उनमें कोरोना के खिलाफ एंटीबॉडी मिली।
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
  • जिन सदस्यों के बोन मैरो में टी-कोशिकाओं की जांच के दौरान कोरोना की एंटीबॉडी मिली, उस आधार पर शोधकर्ताओं का कहना था कि उनके शरीर में साइलेंट इम्यूनिटी विकसित हो चुकी थी। इसका मतलब है कि पूर्व में ये सभी कोरोना वायरस के संक्रमण की जद में आए। भले ही लक्षण बहुत हल्के हों, लेकिन ये सभी खुद-ब-खुद ठीक हो गए।
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कोरोना वायरस जांच (फाइल फोटो) - फोटो : PTI
  • शोधकर्ताओं के मुताबिक, जब शरीर के इम्यून सिस्टम को वायरस से लड़ने के लिए अतिरिक्त सहायता की जरूरत होती है तब ब्लड की श्वेत रक्त कणों से टी-सेल निकलकर बोन मैरो में पहुंचते हैं। इस तरह वायरस से लड़ने के लिए यह शरीर का प्रमुख हथियार हैं।
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कोरोना वायरस जांच (फाइल फोटो) - फोटो : PTI
  • शोधकर्ता प्रोफेसर समीरा फाफी-क्रेमर का कहना है कि छोटे समूह पर किए गए इस शोध के जरिए इस बात के संकेत मिले हैं कि एंटीबॉडी जांच में टी-कोशिका को भी शामिल करने की जरूरत है ताकि संक्रमण की सही स्थिति का पता लगाया जा सके। 
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