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कोरोना की तीसरी लहर और बच्चों पर खतरा: डॉक्टर कह रहे हैं बहुत जरूरी बात, यहां पढ़ें

सार

भारत में कोरोना महामारी की दूसरी लहर के बाद परिस्थितियों में तेजी से बदलाव आया है। वैक्सीनेशन के साथ ही कई अन्य बातों को लेकर भी चर्चाओं का बाजार और गर्म हो गया है।

खासतौर पर इस बात को बार बार प्रचारित किया जा रहा है कि तीसरी लहर बच्चों के लिए खास नुकसान लाएगी। क्या यह पूर्वानुमान सही है या इसे लेकर सही जानकारी के प्रसार की जरूरत है।

पीडियाट्रिक क्रिटिकल केयर तथा पल्मोनोलॉजी, इंद्रप्रस्थ अपोलो हॉस्पिटल, नई दिल्ली के डॉक्टर नमित जेरथ बता रहे हैं कोरोना की तीसरी लहर से बच्चों को कितना खतरा है और माता-पिता को बच्चों को लेकर किस तरह से अलर्ट रहने की जरूरत है। 

 
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अब तक भारत में केवल 12-18 साल तक के बच्चों के लिए वैक्सीनेशन का ट्रायल शुरू हुआ है। - फोटो : iStock
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विस्तार
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डॉ. नमित जेरथ,

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सीनियर कंसल्टेंट, पीडियाट्रिक्स,
पीडियाट्रिक क्रिटिकल केयर तथा पल्मोनोलॉजी, इंद्रप्रस्थ अपोलो हॉस्पिटल (नई दिल्ली)



कोरोना की सेकेंड वेव के बाद अब थर्ड वेव और उससे जुड़ी चर्चाओं को लेकर नेहा बहुत परेशान है। जबसे उसने सुना है कि थर्ड वेव केवल बच्चों को नुकसान पहुंचाएगी, उसने अपनी 6 साल की बेटी को पूरी तरह घर में बंद करके रख दिया है। जाहिर है कि इससे बच्ची की नियमित एक्टिविटीज और सेहत पर भी असर पड़ रहा है लेकिन नेहा कोई रिस्क नहीं लेना चाहती। 

10 वर्ष के अन्नू यानी अनुभव के लिए पिछले कुछ समय से घर जेल की तरह हो गया है। उसके पैरेंट्स अब मास्क लगाकर भी उसे बाहर नहीं निकलने दे रहे। यह अनुभव के लिए बहुत मुश्किल स्थिति है। वो समझ नहीं पा रहा कि पापा-मम्मी क्यों डरे हुए हैं। पापा आजकल ऑफिस से आने के बाद उससे दूर भागते हैं और नहाने के बाद भी उससे दूर रहकर बात करते हैं। अब तक तो ऐसा नहीं था। अनुभव के व्यवहार में भी इसकी वजह से परिवर्तन आ रहा है। 

वैक्सीन से परे बच्चे

अब तक भारत में केवल 12-18 साल तक के बच्चों के लिए वैक्सीनेशन का ट्रायल शुरू हुआ है। छोटे बच्चों के टीके अब तक नहीं आए हैं। ऐसे में और भी जरूरी हो जाता है कि हम बच्चों को स्थिति के लिए इस तरह तैयार करें कि वैक्सीन के न होने की स्थिति में भी वे सुरक्षित रह सकें। 

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स्थिति को समझिए

सबसे पहली बात तो यह दिमाग से निकाल दीजिए कि तीसरी लहर सिर्फ बच्चों के लिए खतरा लेकर आ रही है या उसका असर बच्चों पर ज्यादा होगा। इस बात का अब तक कोई वैज्ञानिक ज्ञात आधार नहीं है। अब दूसरी बात, बच्चों की इम्युनिटी बड़ों की तुलना में अलग स्तर पर काम करती है। दूसरी लहर या सेकेंड वेव के दौरान भी बच्चों में पॉजिटिविटी रेट कम था। यदि बच्चे इन्फेक्ट हुए भी तो ज्यादातर माइल्ड सिम्टम्स के साथ ही ठीक भी हो गए। आगे भी यदि बच्चों को इंफेक्शन हुआ तो उसके माइल्ड होने की ही सम्भावना ज्यादा होगी। मतलब थर्ड वेव में भी 90 प्रतिशत बच्चों में संक्रमण माइल्ड होगा। हां जिन बच्चों में कोई गम्भीर बीमारी जैसे अस्थमा, गम्भीर मोटापा, डायबिटीज, आदि है उनके साथ दिक्कत ज्यादा हो सकती है लेकिन वह आशंका तो बड़ों में भी है। इसका केवल बच्चों पर ही असर होगा ऐसा नहीं है। 

बच्चे को ताजी हवा और धूप भी दें

अगर आपका बच्चा एक्टिव है, उसे नियमित भूख लगती है, सामान्य भोजन करता है, उसे कोई गम्भीर बीमारी नहीं है और वह सामान्य ग्रोथ कर रहा है तो आपको बिल्कुल भी चिंता करने की जरूरत नहीं है। सिर्फ बच्चे को सामान्य हाइजीन और सुरक्षा उपाय के बारे में बतायें और उसे संतुलित डाइट और फिजिकल एक्टिविटी का रूटीन दें। यह याद रखिये कि आने वाले समय में स्थितियां हर स्तर और भी चुनौतीपूर्ण होंगी।

ऐसे में बच्चों को केवल घर में बंद रखकर सुरक्षित नहीं रखा जा सकता। खुली हवा, सामान्य धूप और एक्सपोजर भी इम्युनिटी को मजबूत बनाने में मदद करते हैं। इसलिए सुरक्षा साधनों और कोरोना गाइडलाइंस के साथ बच्चों को घर से बाहर निकालिए। ये उनके स्वास्थ्य को अच्छा ही बनाएगा।

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अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
 

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