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Coronavirus vaccine: रूस को अपनी कोरोना वैक्सीन के लिए भारत की जरूरत क्यों? जानें बड़ी वजह

Fri, 21 Aug 2020 09:43 PM IST
सोनू शर्मा लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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Russia vaccine update - फोटो : social media
रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने कुछ दिन पहले ही यह घोषणा की थी कि उनके देश ने कोरोना वायरस की दुनिया की पहला वैक्सीन बना ली है जो प्रभावी तरीके से काम करती है और इस बीमारी के खिलाफ इम्युनिटी देती है। अब वैक्सीन को लेकर भारत से जुड़ी एक बड़ी खबर सामने आ रही है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, रूसी प्रत्यक्ष निवेश कोष (आरडीआईएफ) के मुख्य कार्यकारी अधिकारी किरिल दिमित्रेव ने कहा है कि रूस कोरोना की वैक्सीन 'स्पुतनिक-वी' के उत्पादन के लिए भारत के साथ साझेदारी पर विचार कर रहा है। एक ऑनलाइन संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि इस वैक्सीन का उत्पादन बेहद महत्वपूर्ण मुद्दा है और फिलहाल हम भारत के साथ साझेदारी की उम्मीद कर रहे हैं। 
 
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
  • किरिल दिमित्रेव का कहना है कि दुनिया के कई देश वैक्सीन की मांग कर रहे हैं और उन सबकी मांगें पूरी करने के लिए बड़े पैमाने पर वैक्सीन के उत्पादन की जरूरत पड़ेगी। उनके मुताबिक, भारत के पास बड़ी मात्रा में वैक्सीन के उत्पादन की क्षमता है। इसलिए इसके लिए भारत के ड्रग मैन्यूफैक्चरिंग कंपनी से संपर्क किया जाएगा। 
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Amar Ujala
  • दिमित्रेव के मुताबिक, रूस के पास फिलहाल वैक्सीन की 10 लाख डोज की मांग आ चुकी है। उनका कहना है कि वो पांच से ज्यादा देशों में वैक्सीन के उत्पादन करने की योजना बना रहे हैं, जिसमें भारत भी शामिल है, क्योंकि भारत के पास सालाना पांच करोड़ वैक्सीन की डोज बनाने की क्षमता है।   

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सांकेतिक तस्वीर - फोटो : पीटीआई
  • हालांकि रूस की यह वैक्सीन पिछले कई दिनों से विवादों में है। इसकी वजह ये है कि वैक्सीन के ट्रायल के जुड़ा डाटा साइंटिफिक जर्नल या विश्व स्वास्थ्य संगठन के साथ साझा नहीं किया गया है, जिससे यह पता चल सके कि वैक्सीन सुरक्षित और प्रभावी है या नहीं। इसके अलावा रूस पर वैक्सीन को लेकर ट्रायल के सभी चरणों को पूरा न करने का भी आरोप है। 
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सांकेतिक तस्वीर - फोटो : social media
  • रूस के इस वैक्सीन के ट्रायल से संबंधित हाल ही में एक रिपोर्ट आई थी, जिसमें कहा गया था कि इस वैक्सीन ने अभी तीसरे यानी अंतिम चरण का ट्रायल पूरा नहीं किया है, जो सबसे महत्वपूर्ण है। वैज्ञानिकों की मानें तो तीसरे चरण का ट्रायल पूरा किए बिना यह दावा करना ठीक नहीं कि वैक्सीन प्रभावी है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, रूस अभी वैक्सीन के तीसरे चरण का ट्रायल ब्राजील, मैक्सिको, सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात में करने वाला है। 
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
रूस की इस वैक्सीन का नाम है 'स्पूतनिक-वी' 
  • रूस के गमलेया इंस्टीट्यूट द्वारा विकसित इस वैक्सीन का नाम 'स्पुतनिक V' रखा गया है। हाल ही में आई एक रिपोर्ट के मुताबिक, रूस ने वैक्सीन की पहली खेप तैयार कर ली है। न्यूज एजेंसी रायटर्स के मुताबिक, वह इस महीने के अंत तक बड़े पैमाने पर वैक्सीन का उत्पादन शुरू कर देगा और सितंबर तक यह आम लोगों को मिलने भी लगेगी। 
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
कोरोना से कितने दिन तक सुरक्षित रखेगी ये वैक्सीन? 
  • रूसी न्यूज एजेंसी तॉस के मुताबिक, इस वैक्सीन को बनाने वाले वैज्ञानिकों का कहना है कि यह कोरोना वायरस के संक्रमण से दो साल तक इंसान को बचाएगी। गमलेया रिसर्च सेंटर फॉर एपिडेमियोलॉजी एंड माइक्रोबायोलॉजी के निदेशक अलेक्जेंडर गिंट्सबर्ग के मुताबिक, इसकी प्रभावी क्षमता दो साल तक रहेगी।
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