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Cervical Cancer: दिल्ली में एचपीवी वैक्सीनेशन अभियान की शुरुआत, सर्वाइकल कैंसर के खिलाफ मजबूत होगी लड़ाई

Mon, 05 Aug 2024 12:27 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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सर्वाइकल कैंसर को लेकर अभियान - फोटो : karkinos healthcar
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सस्टेनेबल डेवलपमेंट गोल (SDG) 2030 के अनुरूप, कार्किनोस हेल्थकेयर अपने क्लिनिकल टीम और कार्यान्वयन विशेषज्ञता का उपयोग करके सर्वाइकल कैंसर को समाप्त करने का लक्ष्य रखता है। इस दिशा में कैंसर अवेयरनेस, प्रिवेंशन, और अर्ली डिटेक्शन (CAPED) ट्रस्ट के साथ मिलकर दिल्ली एनसीआर में वंचित किशोरियों को लक्षित करते हुए एक परिवर्तनकारी एचपीवी टीकाकरण अभियान शुरू किया जा रहा है।

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इस पहल का समर्थन अवंते गार्ड क्लीनरूम और इंजीनियरिंग सॉल्यूशंस प्राइवेट लिमिटेड, अवद इंडिया और अन्य संगठनों द्वारा किया जा रहा है, जिन्होंने महिलाओं में कैंसर को समाप्त करने के लिए हाथ मिलाया है।

जब भारत में कैंसर का बोझ बढ़ रहा है, यह पहल विश्व स्वास्थ्य संगठन के सर्वाइकल कैंसर को सार्वजनिक स्वास्थ्य समस्या के रूप में समाप्त करने के मिशन और सस्टेनेबल डेवलपमेंट गोल (SDG) 2030 का समर्थन करती है। श्रीमती सुधा मूर्ति ने अपने उद्घाटन संसदीय भाषण में 2024 के अंतरिम बजट में 9-14 वर्ष की लड़कियों के लिए एचपीवी टीकाकरण को शामिल करने पर जोर दिया, जो कि निवारक देखभाल और प्रारंभिक पहचान के प्रति राष्ट्र की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
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इस प्रयास को और बढ़ावा देते हुए, एनसीआई-एम्स झज्जर के प्रिवेंटिव ऑन्कोलॉजी विभाग से डॉ. हरी सगराजू और डॉ. जितेंद्र मीणा, साथ ही प्योर हार्ट्स क्लब, इस महत्वपूर्ण कार्यक्रम की पहुंच को वंचित समुदायों तक विस्तारित करने के लिए एकजुट हो गए हैं। ये सहयोग एक शक्तिशाली और संयुक्त कदम को दर्शाते हैं, जो सर्वाइकल कैंसर को समाप्त करने के लक्ष्य की ओर अग्रसर है।

स्वस्थ भविष्य के लिए एकजुट मिशन

कार्किनोस हेल्थकेयर 2030 तक सर्वाइकल कैंसर को समाप्त करने के लिए अपनी मजबूत क्लिनिकल विशेषज्ञता और कार्यान्वयन क्षमताओं के साथ प्रतिबद्ध है। अवंते गार्ड क्लीनरूम और इंजीनियरिंग सॉल्यूशंस प्राइवेट लिमिटेड द्वारा वित्तपोषित और अवद इंडिया तथा CAPED द्वारा समर्थित इस पहल का उद्देश्य आउटरीच प्रयासों के माध्यम से एचपीवी टीकाकरण कवरेज को बढ़ाना है।

यह पहल अगले तीन महीनों में 500 किशोरियों को टीका लगाने के सरकारी प्रयासों को पूरक बनाते हुए सुनिश्चित करती है कि 13-14 वर्ष की आयु की लड़कियों को उनकी पात्रता मानदंड से आगे बढ़ने से पहले उनका निवारक कवच मिल सके।

एनसीआई-एम्स झज्जर के प्रिवेंटिव ऑन्कोलॉजी विभाग से डॉ. जितेंद्र मीणा और डॉ. हरी सगराजू और प्योर हार्ट्स क्लब के साथ साझेदारी में, यह पहल अपनी पहुंच को वंचित समूहों तक विस्तारित करेगी। यूनिवर्सल इम्यूनाइजेशन प्रोग्राम (UIP) में एचपीवी वैक्सीन को शामिल करने में देरी को ध्यान में रखते हुए, यह टीम टीकाकरण कर रहे हैं उन युवा लड़कियों का जो इसके शुरू होने पर टीकाकरण की अवधि से चूक सकती हैं।

9-14 वर्ष की आयु के बच्चों के टीकाकरण की आदर्श आयु को लक्षित करते हुए, अगले तीन महीनों में 500 किशोरियों को टीका लगाकर सरकारी प्रयासों को पूरा करने का प्रयास कर रहे हैं।

इस पहल का मार्गदर्शन कार्किनोस हेल्थकेयर के प्रिवेंटिव ऑन्कोलॉजी के निदेशक और विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के इंटरनेशनल एजेंसी फॉर रिसर्च ऑन कैंसर (IARC) के पूर्व कैंसर स्क्रीनिंग समूह के प्रमुख डॉ. आर. शंकरनारायणन और CAPED ट्रस्ट की सीईओ श्रीमती मृदु गुप्ता द्वारा किया जा रहा है।

एचपीवी टीकाकरण शिविर की शुरुआत एक सूचनात्मक जागरूकता सत्र से हुई, जिसके बाद प्रमुख चिकित्सा विशेषज्ञों के संबोधन हुए। भारतीय ऑन्कोलॉजी में एक प्रतिष्ठित हस्ती, राष्ट्रीय कैंसर संस्थान और एम्स में एक शानदार करियर के साथ, डॉ. जी.के. राठ ने अपनी विशेषज्ञता प्रदान की और उपस्थित लोगों में विश्वास जगाया। उनके साथ एनसीआई-एम्स झज्जर के प्रिवेंटिव ऑन्कोलॉजी के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. हरी सगराजू भी शामिल हुए।

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सर्वाइकल कैंसर को लेकर अभियान - फोटो : karkinos healthcar
सर्वाइकल कैंसर को लेकर क्या कहते हैं विशेषज्ञ?

डॉ. जी.के. रथ ने भारतीय ऑन्कोलॉजी में अपने व्यापक अनुभव और योगदान के साथ, विशेषकर वंचित आबादी के बीच सर्वाइकल कैंसर के समाधान की तात्कालिकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा, "सर्वाइकल कैंसर का प्रसार एक गंभीर मुद्दा है, विशेष रूप से समाज के वंचित वर्गों के बीच। कार्किनोस हेल्थकेयर और कैपेड ट्रस्ट की यह पहल समय पर और आवश्यक है, जो उन लोगों को आवश्यक निवारक देखभाल प्रदान करती है जिन्हें इसकी सबसे अधिक आवश्यकता है।"

डॉ. हरि सगीराजू ने कहा, सर्वाइकल कैंसर की बढ़ती समस्या से निपटने के लिए शुरुआती जांच और टीकाकरण समय की मांग है। यह पहल न केवल टीकाकरण के माध्यम से तत्काल राहत प्रदान करती है, बल्कि समुदाय को शिक्षित भी करती है, जिससे सार्वजनिक स्वास्थ्य पर दीर्घकालिक प्रभाव पड़ता है।

कैप्ड ट्रस्ट की सीईओ सुश्री मृदु गुप्ता ने कहा, “हमारा मिशन भारत से सर्वाइकल कैंसर को खत्म करना है। यह पहल यह सुनिश्चित करने में एक महत्वपूर्ण कदम है कि सर्वाइकल कैंसर के खिलाफ लड़ाई में कोई भी किशोर लड़की पीछे न रह जाए। यह निवारक स्वास्थ्य देखभाल और सामुदायिक सशक्तिकरण के प्रति हमारी प्रतिबद्धता का उदाहरण है।''

इस पहल के माध्यम से, कार्किनोस हेल्थकेयर और कैप्ड ट्रस्ट का लक्ष्य एक ऐसे भविष्य की नींव रखना है जहां भारत में सर्वाइकल कैंसर का कोई खतरा न रहे, और इसके निवारण और उपचार के लिए एक स्थायी और दीर्घकालिक समाधान प्रदान किया जा सके।

यहां जानना जरूरी है कि कार्किनोस हेल्थकेयर सामान्य कैंसर का शीघ्र पता लगाने और निदान के लिए एक उद्देश्य-संचालित प्रौद्योगिकी-आधारित ऑन्कोलॉजी हेल्थकेयर प्लेटफॉर्म है। संगठन व्यक्तियों के घरों के करीब व्यापक कैंसर देखभाल प्रदान करने के लिए पारिस्थितिकी तंत्र के भीतर स्वास्थ्य देखभाल संस्थानों और डोमेन विशेषज्ञों के नेटवर्क के साथ काम करते हुए एक वितरित कैंसर देखभाल नेटवर्क के उपयोग का समर्थन करता है।

कैंसर जागरूकता, रोकथाम और प्रारंभिक जांच (सीएपीईडी) ट्रस्ट (www.capedindia.org) एक सामुदायिक आउटरीच संगठन है जो 2014 से कैंसर की रोकथाम और प्रारंभिक पहचान, विशेष रूप से गर्भाशय ग्रीवा कैंसर पर केंद्रित है।


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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है। 

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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