सिनेमा और संगीत के गहरे मर्मज्ञ, शोधकर्ता और वरिष्ठ लेखक शरद दत्त जी का आज सुबह निधन हो गया है। कुछ महीने पहले ही शरद जी को कैंसर पता लगा था और तभी से उनकी हालत बिगड़ती चली गई। शरद जी ने सिनेमा और संगीत को जो कार्य किये हैं वह सिनेप्रेमियों और सिने-अध्येताओं के लिए सदैव महत्वपूर्ण बने रहेंगे।
दिल्ली दूरदर्शन केंद्र के पूर्व निदेशक के तौर पर उन्होने सिनेमा और संगीत को लेकर कई यादगार कार्यक्रम और सीरीज़ का निर्माण किया। दूरदर्शन के लिए बनाई उनकी सीरीज़ ‘मेलोडी मेकर्स’ खासी चर्चित रही है। शरद दत्त जी ने हिंदी की पहली बोलती फिल्म आलम आरा पर गहन रिसर्च कर इस फिल्म और इसके बनने की दास्तान पर एक बेहतरीन किताब लिखी थी 'दास्तान-ए-आलम आरा' जो करीब 14 वर्ष पूर्व प्रकाशित हुई थी। इसके पहले कुंदन लाल सहगल और अनिल बिस्वास पर लिखी किताब के लिए उन्हें क्रमश: 2002 और 2007 में नेशनल अवॉर्ड भी मिला था। हाल में ही उन्होंने साहिर लुधियानवी पर किताब लगभग पूरी कर ली थी और इसी साल मार्च में उनकी जयंती के मौके पर रिलीज़ करने की तैयारी कर रहे थे।
उनके निधन से सिने-समीक्षा का क्षेत्र कुछ रिक्त हो गया है। वे अपने योगदान के लिए हमेशा याद किये जाते रहेंगे।