इंसान की जिद व कुछ कर गुजरने के जज्बे के आगे सारी मुश्किलें दम तोड़ देती हैं। राष्ट्रकवि दिनकर की पंक्तियां ‘खम ठोंक ठेलता है जब नर, पर्वत के जाते पाँव उखड़, मानव जब जोर लगाता है पत्थर पानी बन जाता है।’ मानवता के इसी जज्बे को उजागर करते हैं। हमने ऐसे कई उदाहरण देखे हैं जहां पर लोगों ने अपने कठिन परिश्रम व कभी हार न मानने वाले जज्बे से सफलता प्राप्त की है। Safalta Talks का हिस्सा बनने वाली सोनिया रॉय भी एक ऐसी ही उदाहरण हैं।
कौन हैं सोनिया रॉय
दिल्ली की जाना-मानी बॉक्सर कोच सोनिया का जन्म कोलकाता में हुआ था। बचपन से ही इनकी रुचि स्पोर्ट्स में थी जिसके कारण 2009 से बॉक्सिंग खेलना शुरू किया। घर की आर्थिक स्थिति ठीक न होने के कारण सोनिया को अपनी प्रैक्टिस के साथ ही नौकरी भी करनी पड़ी। 2009 से ही सोनिया ढेरों बॉक्सिंग प्रतियोगिताओं में भाग लेती रहीं लेकिन इन्हें उनमें स्वर्ण पदक नहीं मिला। साल 2014 में इन्हें प्रोफेशनल कोच के साथ ट्रेनिंग करने का मौका मिला, जिसके बाद सोनिया ने कई पदक जीते। साथ ही इन्हें नेशनल खेलने का भी मौका मिला। साल 2017 में सोनिया का ऐक्सीडेंट हो गया, जिसके बाद इन्होंने बॉक्सिंग से दूरी बना ली। लेकिन अपने कोच व घरवालों के द्वारा उत्साहवर्धन किए जाने के बाद इन्होंने बॉक्सिंग की दुनिया में कदम रखा और वर्तमान समय में ये सक्षम बॉक्सिंग क्लब गुरुग्राम में कोच के रूप में कार्य कर रही हैं।
सोनिया का जीवन ढेरों चुनौतियों व उतार चढ़ाव से भरा रहा लेकिन इन्होंने अपने जीवन की हर चुनौती का डट कर सामना किया। कभी किसी भी परिस्थिति के सामने हार नहीं मानी। इनका संघर्ष हर युवा के लिए बेहद खास है। अगर आप भी इनकी कहानी जानना चाहते हैं तो आज ही जुड़ें
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