फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

मुश्किल : महामारी में लॉन्ग कोविड के कारण भी अब नौकरी से हाथ धो रहे लोग, कार्यक्षमता भी घटी

Tue, 02 Nov 2021 06:30 AM IST
योगेश साहू अमर उजाला रिसर्च डेस्क, लंदन।

सार

ब्रिटेन के नेशनल हेल्थ सर्विस (एनएचएस) में ऑक्यूपेशनल थैरेपिस्ट के तौर पर काम करने वाली जेरी सियोल्टा स्मिथ बताती हैं कि पिछले साल मार्च को वे संक्रमित हुईं थी। दो बार काम पर लौटने की कोशिश की, लेकिन कामयाब नहीं हुई, अब नौकरी जा चुकी है।
विज्ञापन
नौकरी (प्रतीकात्मक तस्वीर) - फोटो : pixabay
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

कोरोना महामारी के दुष्परिणाम खत्म होने का नाम नहीं ले रहे हैं। ब्रिटेन के ऑफिस फॉर नेशनल स्टैटिस्टिक्स (ओएनएस) की एक रिपोर्ट के अनुसार, कोरोना की चपेट में आने के बाद लंबे समय तक स्वास्थ्य संबंधी तकलीफों (लॉन्ग कोविड) से जूझने वाले लोगों को भी अपनी नौकरी से हाथ धोना पड़ रहा है।

विज्ञापन


ओएनएस की रिपोर्ट के अनुसार, ब्रिटेन में कोरोना की चपेट में आने के बाद 4,05,000 लोग करीब एक साल तक कई तरह की स्वास्थ्य संबंधी तकलीफों से परेशान रहे। इस कारण बड़ी संख्या में लोग लंबे समय तक छुट्टी पर रहे। वहीं, कुछ लोगों के कार्य करने की क्षमता भी प्रभावित हुई, जिस कारण उन्हें अपनी नौकरी से हाथ धोना पड़ा। रिपोर्ट के अनुसार, लॉन्ग कोविड से जूझने वाले पांच फीसदी लोगों ने बताया कि उनकी नौकरी एक झटके में सिर्फ इसलिए चली गई क्योंकि संक्रमण के बाद वे लंबे समय तक स्वास्थ्य को लेकर परेशान रहे। इस कारण वे काम और नौकरी पर ध्यान नहीं दे सके।

सात फीसदी दे चुके इस्तीफा
सर्वे में शामिल 252 लोगों ने बताया कि  लॉन्ग कोविड से जूझने वाले सात फीसदी लोगों ने स्वास्थ्य कारणों से अपनी नौकरी से इस्तीफा दे दिया। वहीं, 45 फीसदी लोग अब भी नौकरी पर लौटने की कोशिश में हैं। वो भी तब जब इससे पहले भी काम पर वापस लौटने की वे कई कोशिश कर चुके हैं। लोगों का कहना है कि बीमारी और आर्थिक तंगी के बीच नौकरी जाना महामारी का सबसे बड़ा दुष्परिणाम है।
विज्ञापन


महिलाएं अधिक हुईं परेशान...
संक्रमण को मात देने के बाद लंबे समय तक स्वास्थ्य संबंधी तकलीफों से जूझने वाली महिलाओं की नौकरियां सबसे अधिक खतरे में पड़ी हैं। ब्रिटेन के नेशनल हेल्थ सर्विस (एनएचएस) में ऑक्यूपेशनल थैरेपिस्ट के तौर पर काम करने वाली जेरी सियोल्टा स्मिथ बताती हैं कि पिछले साल मार्च को वे संक्रमित हुईं थी। दो बार काम पर लौटने की कोशिश की, लेकिन कामयाब नहीं हुई, अब नौकरी जा चुकी है।

भेदभाव की भी स्थिति बनी
कोरोना को मात देने के बाद बीमार रहने वाले लोगों ने बताया कि जब वे जैसे-तैसे अपने दफ्तर पहुंचे तो उन्हें वहां भेदभाव की भी स्थिति का सामना करना पड़ा। ट्रेड यूनियन कांग्रेस द्वारा 3500 लोगों पर किए गए सर्वे में 19 फीसदी ने बताया कि उनके नियोक्ता ने ये तक पूछ दिया कि आपके बीमार रहने से दफ्तर के कामकाज पर क्या प्रभाव पड़ेगा। इसी सवाल के बाद ऐसे लोगों में नौकरी जाने का अंदेशा गहरा गया था।

विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें