झारखंड में सियासी संकट के बीच बड़ी खबर आ रही है। बताया जा रहा है कि UPA प्रतिनिधिमंडल राज्यपाल रमेश बैस से मुलाकात करने राजभवन पहुंचा। यूपीए विधायकों ने राज्यपाल को पत्र लिखकर उनसे पूछा कि क्या हेमंत सोरेन राज्य के मुख्यमंत्री के पद पर बने रहेंगे?
इसके बाद कांग्रेस के कार्यकारी अध्यक्ष बंधु तिर्की ने बताया कि सीएम इस्तीफा नहीं दे रहे हैं। राज्यपाल ने कानूनी राय मांगी है और आश्वासन दिया कि 2 दिनों के भीतर स्थिति स्पष्ट कर दी जाएगी। हमने यह भी सवाल किया कि मीडिया में चुनिंदा जानकारी कैसे लीक की जा रही है, उन्होंने यह भी आश्वासन दिया कि स्रोत उनके कार्यालय में नहीं है।
दरअसल, हाल ही में चुनाव आयोग ने हेमंत सोरेन के खिलाफ लाभ के पद के मामले में अपनी सिफारिश राज्यपाल को भेजी थी। इसमें सोरेन की विधानसभा सदस्यता रद्द करने की सलाह दी गई थी। हालांकि, राज्यपाल रमेश बैस ने अभी तक इस मामले में कोई फैसला नहीं लिया है।
यूपीए ने लगाया राज्यपाल पर खरीद-फरोख्त को बढ़ावा देने का आरोप
एक संयुक्त बयान में यूपीए विधायकों ने कहा, क्या राजभवन समय बढ़ाकर (निर्णय को सार्वजनिक करने में) खरीद-फरोख्त को बढ़ावा देना चाहता है? ... कानूनी सलाह क्या है जो वह लेने में सक्षम नहीं हैं? यह लोकतंत्र और लोगों का अपमान है। बयान में राज्यपाल से राज्य को अराजकता की ओर धकेलने से बचाने का आग्रह किया गया। कहा गया कि "संविधान ने आपके कंधों पर आदिवासी-दलितों के अधिकारों की रक्षा करने की जिम्मेदारी दी है।
कैबिनेट में हुए कई अहम फैसले
झारखंड कैबिनेट ने पांच सितंबर को विधानसभा के एक दिवसीय विशेष सत्र के प्रस्ताव को मंजूरी दी। उम्मीद की जा रही है कि सरकार इस दिन शक्ति परीक्षण कर सकती है। झारखंड कैबिनेट ने सरकारी कामकाज और वीआईपी/वीवीआईपी की यात्रा की सुविधा के लिए एक महीने के लिए चार्टर विमान किराए पर लेने को मंजूरी दी है। कैबिनेट ने पुरानी पेंशन योजना भी गुरुवार से प्रभावी कर दी है। राज्य कैबिनेट ने इसके लिए एसओपी को मंजूरी दे दी है। पुरानी पेंशन योजना को 1 अप्रैल 2004 को बंद कर दिया गया था और इसे राष्ट्रीय पेंशन प्रणाली (एनपीएस) से बदल दिया गया था।
पढ़े क्या है पूरा मामला
बता दें कि 81 सदस्यीय विधानसभा में सत्तारूढ़ गठबंधन के 49 विधायक हैं। लाभ के पद के मामले में विधानसभा से मुख्यमंत्री की अयोग्यता की मांग करने वाली भाजपा की एक याचिका के बाद, चुनाव आयोग ने 25 अगस्त को राज्य के राज्यपाल रमेश बैस को अपना फैसला भेजा है। हालांकि चुनाव आयोग के फैसले को अभी तक आधिकारिक नहीं बनाया गया है, लेकिन चर्चा है कि चुनाव आयोग ने हेमंत सोरेन को विधायक के रूप में अयोग्य घोषित करने की सिफारिश की है। भाजपा ने जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 9 (ए) का उल्लंघन करने के लिए हेमंत सोरेन की अयोग्यता की मांग की है, जो सरकारी अनुबंधों के लिए अयोग्यता से संबंधित है।
झारखंड विधानसभा अध्यक्ष ने सुनवाई टाली
इस बीच झारखंड विधानसभा अध्यक्ष रवींद्र नाथ महतो ने कांग्रेस के तीन विधायकों को दलबदल विरोधी कानून के तहत अयोग्य ठहराने के मामले की सुनवाई गुरुवार को पांच सितंबर तक के लिए टाल दी। कांग्रेस ने स्पीकर को एक पत्र भेजकर इरफान अंसारी, नमन बिक्सल कोंगारी और राजेश कच्छप को विधायकों के रूप में अयोग्य घोषित करने की मांग की थी, जिन्हें 30 जुलाई को पश्चिम बंगाल में लगभग 49 लाख रुपये की बेहिसाब नकदी के साथ गिरफ्तार किया गया था। वे फिलहाल जमानत पर बाहर हैं।