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'डायन उतारने के नाम पर मुझे मैला पिलाया गया'

Wed, 06 Apr 2016 12:08 PM IST
छुटनी महतो/सामाजिक कार्यकर्ता
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मैं छुटनी महतो हूं, लोग मुझे डायन कहते हैं। निवासी गांव - बीरबांस, थाना - गम्हरिया, ज़िला - सरायकेला खऱसांवा और राज्य - झारखंड। यही मेरा छोटा सा बायोडेटा है। गम्हरिया थाने के महतांड डीह गांव में मेरी शादी हुई थी, लेकिन, मुझे वहां से निकाल दिया गया।
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मेरी उम्र जब 12 साल थी तो धनंजय महतो से मेरी शादी कर दी गई, जल्द ही हमारे तीन बच्चे हो गए। दो सितंबर 1995 को मेरे पड़ोसी भोजहरी की बेटी बीमार हुई, लोगों ने शक जताया कि मैंने उस पर टोना कर दिया है।

गांव में पंचायत हुई, इसमें मुझे डायन क़रार दिया गया। लोगों ने घर में घुसकर मेरे साथ बलात्कार की कोशिश की। वे लोग दरवाज़ा तोड़कर अंदर आए थे, हम किसी तरह बचे, सुंदर होना मेरे लिए अभिशाप बन गया।
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अगले दिन फिर पंचायत हुई, पांच सितंबर तक रोज़ कुछ न कुछ होता रहा। पंचायत ने 500 रुपए का जुर्माना लगाया, वह अदा कर दिए। इसके बाद लगा कि सबकुछ ठीक हो जाएगा, लेकिन हुआ नहीं।

शाम हो चली थी, गांव वालो ने ओझा को बुलाया। वे दो लोग थे, उन लोगों ने मुझे मैला पिलाने का सुझाव दिया। बोले कि मानव मल पीने से डायन उतर जाती है, मैंने मना किया, फिर क्या था। मैं अकेली और पूरा गांव दूसरी तरफ़, लोगों ने मैला पिलाने के लिए मुझे पकड़ लिया।

डायन बताकर मार दी जाती हैं महिलाएं

उनकी पकड़ से छूटने की कोशिश की तो मैला मेरे शरीर पर गिर गया, लोगों ने फिर पकड़ा। मैला दुबारा फेंका गया, अब उसका कुछ हिस्सा मेरे मुंह के अंदर था। मैं डायन क़रार दी जा चुकी थी, मुझे घर में घुसने नहीं दिया गया। चार बच्चों के साथ रात पेड़ के नीचे काटी, पति क्या करता, उसे गांव में ही रहना था।

रात में हम विधायक चंपई सोरेन के यहां गए, वहां से हमें कोई मदद नहीं मिली। छह सितंबर को मैंने थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई। कुछ लोग गिरफ्तार हुए, फिर ज़मानत पर छूट गए। इसके बाद गांव में कुछ नहीं बदला, लेकिन मेरी किस्मत बदल गई।

मैं अपना ससुराल छोड़ मायके आ गई, यहां भी लोग देखकर दरवाज़ा बंद कर लेते कि डायन हूं। उनके बच्चों को कुछ कर दूंगी। ऐसे में मेरे भाइयों ने साथ दिया, मेरे पति भी आए। कुछ पैसे की मदद की, भाइयों ने ज़मीन दी, पैसे दिए। अब मायका ही मेरा गांव हो गया।

मुझे सामान्य होने में 5 साल लगे, अब तो एक ही मकसद है, डायन करार दी गई महिलाओं के लिए काम करना, यही कर रही हूं। इसके लिए मुख्यमंत्री ने मुझे सम्मानित किया है।

लेकिन, 1995 में मेरे लिए कोई खड़ा नहीं हुआ, लोग मुझसे जलते थे कि मैं क्यों अच्छे कपड़े पहनती हूं। मेरे साथ सोना चाहते थे, क्योंकि, मैं सुंदर थी।
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बीस सालों में 16 सौ महिलाओं की हत्या

बीबीसी को अपनी कहानी सुनाते हुए छुटनी महतो कई बार रोईं, रोने लगती हैं। जब उन्हें डायन करार दिया गया था, उस समय वो करीब 30 साल की थीं। लेकिन अब वो बूढ़ी हो चली हैं।

उन्हें सेमिनारों मे बुलाया जाता है, हवाई जहाज़ से आना-जाना भी हुआ है। छुटनी कहती हैं, डायन सिर्फ एक वहम के सिवा कुछ नहीं है। एसोसिएशन फार सोशल एंड ह्यूमन अवेयरनेस (आशा) के अजय कुमार जायसवाल बताते हैं झारखंड में 2016 में अब तक 18 महिलाओं की हत्या डायन होने के आरोप में कर दी गई।

झारखंड में पिछले 20 साल में करीब 16 सौ महिलाएं डायन के नाम पर मारी जा चुकी हैं। नेशनल क्राईम रिकॉर्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) के 2014 में जारी आंकड़े के मुताबिक़ झारखंड में 2012 से 2014 के बीच 127 महिलाओं की हत्या डायन बताकर कर दी गई।

राज्यसभा में एक सवाल के जवाब में तत्कालीन गृह राज्यमंत्री एचपी चौधरी ने ये आंकड़े बताए थे। उन्होंने कहा था कि झारखंड में 2014 में ही 47 महिलाओं की हत्या डायन बताकर कर दी गई, यह उस साल देशभर में डायन के नाम पर हुई हत्याओं का 30 फ़ीसद था।

(स्थानीय पत्रकार रवि प्रकाश से हुई बातचीत पर आधारित)
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