झारखंड हाईकोर्ट ने एक बार फिर राज्य के वन विभाग की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए पूछा कि क्या वन विभाग के शीर्ष 20 अधिकारियों ने अपनी संपत्तियों का ब्यौरा दिया है और यदि उन्होंने ऐसा नहीं किया है तो क्यों न उनकी संपत्ति की जांच कराई जाए।
मुख्य न्यायाधीश जस्टिस रवि रंजन और जस्टिस एस एन प्रसाद की पीठ ने पिछले वर्ष सितंबर में लातेहार जिले में हाथी के बच्चे की मौत के संबंध में स्वत: संज्ञान लिए गए मामले की सुनवाई करते हुए यह टिप्पणी की। अदालत ने राज्य में वनों और वन्य जीवों की कमी पर वन विभाग के अधिकारियों को फटकार लगाई। इससे पहले राज्य सरकार की ओर से शपथ पत्र दाखिल कर बताया कि पलामू टाइगर प्रोजेक्ट में कई कदम उठाए गए हैं।
अदालत ने कहा, अधिकारी यहां आते हैं और बड़े-बड़े दावे कर चले जाते हैं। यदि अफसर काम कर रहे हैं तो वन एवं वन्य जीव राज्य से कहां गए? साल 2018 में पलामू टाइगर रिजर्व में पांच बाघों का दावा किया गया था। लेकिन अभी क्या हाल है बाघों की संख्या कितनी है किसी को भी जानकारी नहीं है। अदालत ने कहा कि सरकार को वन और वन जीवों की कोई चिंता नहीं है। अदालत ने इस मामले पर अगली सुनवाई के लिए 4 फरवरी की तारीख मुकर्रर की है।
नाबालिग लड़की से दुष्कर्म के तीन दोषियों को उम्रकैद
वहीं, झारखंड के पूर्वी सिंहभूम जिले की एक अदालत ने चार साल पहले यहां एक नाबालिग लड़की से दुषकर्म के मामले में शनिवार को तीन लोगों को 25 साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई। अतिरिक्त जिला न्यायाधीश संजय कुमार उपाध्याय ने मंगलवार को मामले में शिव कुमार महतो, इंद्रपाल सैनी और श्रीकांत को दोषी ठहराया था. सजा का ऐलान शनिवार को किया गया। अदालत ने प्रत्येक पर 80 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया। अर्थदंड की अदायगी न करने पर उन्हें तीन वर्ष का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा।