झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री और झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) के कार्यकारी अध्यक्ष हेमंत सोरेन को राहत नहीं मिल पा रही है। झारखंड हाईकोर्ट ने बुधवार को उनकी उस याचिका को खारिज कर दिया, जिसमें सोरेन ने झारखंड विधानसभा के बजट सत्र में शामिल होने देने की इजाजत मांगी थी। इससे पहले 22 फरवरी को रांची की विशेष पीएमएलए कोर्ट ने हेमंत सोरेन की याचिका खारिज कर दी। इसके बाद उन्होंने हाईकोर्ट का रुख किया था।
पिछले महीने धनशोधन के एक मामले में गिरफ्तार किया था
सोरेन को ईडी ने पिछले महीने धनशोधन के एक मामले में गिरफ्तार किया था। उन्होंने शुक्रवार को हाईकोर्ट में आवेदन दायर कर बजट सत्र में भाग लेने की अनुमति मांगी थी। उनकी दलीलें सुनने के बाद न्यायमूर्ति सुजीत नारायण प्रसाद ने सोमवार को अपना आदेश सुरक्षित रखा था। इससे पहले कोर्ट ने पहले सत्तारूढ़ झामुमो के कार्यकारी अध्यक्ष सोरेन को पांच फरवरी को विधानसभा में विश्वास मत में भाग लेने की अनुमति दी थी।
गिरफ्तारी को चुनौती देने वाली याचिका पर भी फैसला सुरक्षित
ईडी की गिरफ्तारी को चुनौती देने के लिए हेमंत सोरेन की याचिका पर उच्च न्यायालय ने अपना आदेश सुरक्षित रखा था। कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश श्री चंद्रशेखर और न्यायमूर्ति नवनीत कुमार की खंडपीठ ने मामले में सुनवाई की। सोरेन को ईडी की 13 दिन की हिरासत के बाद 15 फरवरी को बिरसा मुंडा सेंट्रल जेल भेज दिया गया था।
न्यायिक हिरासत में हैं सोरेन
बता दें कि झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को गुरुवार को न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया था। विशेष पीएमएलए कोर्ट ने कथित भूमि घोटाले से जुड़े धन शोधन के एक मामले में यह फैसला सुनाया था। सत्तारूढ़ झारखंड मुक्ति मोर्चा के कार्यकारी अध्यक्ष ईडी की हिरासत में थे। सोरेन को अदालत से रांची के होटवार स्थित बिरसा मुंडा केंद्रीय कारागार ले जाया गया था।
ऐसे बढ़ी हिरासत
उन्हें 31 जनवरी को गिरफ्तार करने के बाद 2 फरवरी को कोर्ट ने सोरेन को पांच दिनों की ईडी हिरासत में भेजा था। इसके बाद से हिरासत की अवधि को कुल मिलाकर सात दिनों के लिए दो बार बढ़ाया गया।