धनबाद के न्यायाधीश उत्तम आनंद की मौत के मामले में शुक्रवार को केंद्रीय जांच ब्यूरो की दलील को खारिज करते हुए कहा कि एजेंसी को आरोपियों को बचाने की कोशिश नहीं करनी चाहिए। दरअसल, शुक्रवार को इस मामले में सीबीआई की ओर से पेश हुए अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल एसवी राजू ने हाईकोर्ट को बताया कि धक्का मारने से पहले ऑटो चालकों को पता था कि वह व्यक्ति एक न्यायाधीश है।
उन्होंने बताया कि नार्को टेस्ट में भी ऑटो चालकों ने स्वीकार किया है कि वह न्यायाधीश को पहचानते थे। इस पर अदालत ने कहा कि सीबीआई को मामले की सही तरीके से जांच करनी चाहिए और आरोपियों को बचाने की कोशिश नहीं करनी चाहिए। अदालत ने कहा कि सीबीआई की जांच अलग कहानी बता रही है जबकि सबूत दूसरी ओर इशारा कर रहे हैं। मामले की अगली सुनवाई 28 जनवरी को होगी।
बता दें कि इस मामले में पूर्व की सुनवाई में भी हाईकोर्ट ने सीबीआई की जांच पर असंतोष जताया था। बता दें कि अतिरिक्त जिला न्यायाधीष उत्तम आनंद की मौत 28 जनवरी को हुई थी। वह सुबह लगभग पांच बजे टहलने के लिए निकले थे जब एक ऑटो ने उन्हें टक्कर मार दी थी। न्यायाधीश की मौके पर ही मौत हो गई थी। सीबीआई का अनुमान है कि न्यायाधीश की मौत मोबाइल लूटने की कोशिश में हुई थी।