विश्व संग्रहालय दिवस पर बुधवार को मुबारक मंडी के ऐतिहासिक डोगरा आर्ट म्यूजियम में डोगरा इतिहास से जुड़ी दुर्लभ कलाकृतियां प्रदर्शित की गई। प्रदर्शनी में मुख्य आकर्षण 1882 का एक अभिलेख रहा, जिस पर डोगरी की टाकरी लिपि लिखी है। यह अभिलेख हीरानगर के जांडी किले से मिला था। संग्रहालय दिवस पर डुग्गर प्रदेश की पुरानी परंपराओं को बयां करने वाली विशेष लोक कला को दिखाया गया। संग्रहालय में प्रवेश पर कोई शुल्क नहीं लिया गया। इसमें कला प्रेमी और स्कूली बच्चे भी ऐतिहासिक लोक कला से रूबरू हुए।
डोगरा आर्ट म्यूजियम में ऐतिहासिक, पौराणिक और सांस्कृतिक महत्व की 7500 महत्वपूर्ण कलाकृतियों का भंडार है। इसका उद्घाटन देश के पहले राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने 28 मई 1954 को किया था। म्यूजियम में दुर्लभ पांडुलिपियों का संग्रह है। म्यूजियम में चार गैलरियां हैं, इनमें पिंक हॉल, मास्टर संसार चंद आर्ट गैलरी, मार्बल हॉल, फाउंटेन हॉल शामिल हैं। इनमें बसोहली लघु चित्रकला, जम्मू चित्रकला, कांगड़ा चित्रकला की 702 कलाकृतियां मौजूद हैं। हालांकि प्रदर्शनी में स्थान की कमी के चलते कुछ कलाकृतियां ही प्रदर्शित की गईं।
म्यूजियम में डोगरा शासकों के समय के आभूषण, अस्त्र-शस्त्र और प्राचीन सिक्के हैं। सहायक निदेशक पुरातत्व, अभिलेखागार और डोगरा संग्रहालय की प्रभारी डॉ. संगीत शर्मा ने कहा कि विश्व संग्रहालय दिवस पर हर साल प्रदर्शनी आयोजित की जाती है। उन्होंने कहा कि प्रदर्शन का उद्देश्य लोगों को ऐतिहासिक परंपरा के साथ जोड़ना है। उन्होंने कहा कि प्रदर्शनी के लिए कॉलेज, स्कूल और विश्वविद्यालय के छात्रों के साथ ही कला प्रेमी पहुंचे।
जल्द ऑनलाइन भी देख सकेंगे कलाकृतियां
डोगरा आर्ट म्यूजियम को जीर्णोद्धार के साथ उसके डिजिटल मोड पर लाने की तैयारी है। जम्मू-कश्मीर पुरातत्व, अभिलेखागार और संग्रहालय विभाग भविष्य में डोगरा आर्ट म्यूजिक को हाईटेक करने की रणनीति पर काम रहा है। लोग म्यूजियम में रखी कलाकृतियों को ऑनलाइन देख सकें, इसकी भी तैयारी की जा रही है।