गरमी की आहट के साथ ही आग की घटनाओं का सिलसिला शुरू हो गया है, लेकिन हर बार की तरह पर्वतीय इलाकों में आग इस बार भी जानलेवा साबित होने लगी हैं।
डोडा जिले की बागवा तहसील के गाडान इलाके में एक ही परिवार के चार सदस्यों की मौत पर्वतीय इलाके में सीजन से जुड़े कालचक्र की तसदीक करती है।
जम्मू संभाग में हर साल औसतन सत्रह सौ से अधिक आग की घटनाएं होती हैं, लेकिन पर्वतीय इलाकों में उठने वाली लपटें न सिर्फ संपत्ति को राख कर देती हैं, बल्कि जानलेवा भी साबित होती हैं।
फायर एंड इमरजेंसी विभाग के रिकार्ड के अनुसार पर्वतीय इलाकों में लकड़ी के ढांचे माली नुकसान के साथ-साथ अमूमन इंसानी जानों को भी लील लेते हैं।
पूरे जम्मू संभाग में बीते चार वर्ष का रिकार्ड खंगालें तो हर साल औसतन 1700 से अधिक आग की घटनाएं होती हैं। वर्ष 2012 में राहत और बचाव के लिए आई कुल 2107 घटनाएं दर्ज हुईं। पूरे वर्ष में 48 लोगों की जान गई और साढ़े दस करोड़ की संपत्ति राख हो गई। वर्ष 2013 में 2041 घटनाएं दर्ज हुईं।