हाईकोर्ट की खंडपीठ ने जम्मू और कश्मीर के डिवीजनल कमिश्नर से पूछा है कि रियासत में सरेआम हो रही गोहत्या को रोकने के लिए उन्होंने क्या कदम उठाए हैं।
जस्टिस धीरज सिंह ठाकुर और जस्टिस बंसी लाल भट की खंडपीठ ने इस संबंध में दायर एक याचिका की सुनवाई के दौरान दोनों संभागों के डिवकाम को नोटिस जारी करते हुए मामले की ताजा रिपोर्ट पेश करने को कहा है।
खंडपीठ ने कहा कि रिपोर्ट में यह बताया जाए कि अदालत के आदेशानुसार उन्होंने अपने इलाके में इस पर प्रतिबंध लगाने के क्या कदम उठाए। रिपोर्ट में संबंधित आईजीपी के इनपुट भी रखे जाएं कि आरपीसी के अनुसार उन्होंने इसके मांस की नियमित हो रही बिक्री को कहां तक रोका।
उल्लेखनीय है कि एडवोकेट परिमोक्ष सेठ ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर शिकायत की कि रियासत में सरेआम गोहत्या करने के अलावा उसके मांस की बिक्री हो रही है, जबकि यह आरपीसी की धारा 298-ए और 298-बी के तहत दंडनीय अपराध है।
याचिका में आरोप लगाया कि इस अपराध को रोकने की जिम्मेदार अथारिटी के सहयोग से ही यह काम धड़ल्ले से जारी है। इससे लोगों की धार्मिक भावनाओं को आहत पहुंचा है।