कठुआ के कई इलाकों में बाढ़ जैसे हालात
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जम्मू संभाग में मानसून के सक्रिय होने के साथ वाटर वार्न बीमारियों को लेकर सतर्कता बढ़ाई गई है। इसके लिए बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों को अलर्ट किया गया है। स्वास्थ्य विभाग की ओर से जलभराव स्थलों सहित अन्य स्थानों को ड्राई करने की हिदायतें दी गई हैं। मलेरिया, डेंगू जैसे संदिग्ध मामलों की संबंधित चिकित्सा केंद्रों में रिपोर्ट करने को कहा गया है। इस समय दूषित पानी से डायरिया, उल्टी, दस्त और बुखार की शिकायत बढ़ी है। अस्पतालों में ऐसे मरीजों की संख्या में बढ़ोतरी हुई है।
बरसात में खासतौर पर प्राकृतिक जलस्रोतों पर निर्भर रहने वाले दूषित पानी से डायरिया, उल्टी, दस्त और बुखार से पीड़ित हो रहे हैं। बारिश के साथ शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में दूषित पानी घरों तक पहुंच रहा है। यह समस्या उन क्षेत्रों में ज्यादा है, जहां पानी के पाइप टूटे हैं। इसी तरह ग्रामीण क्षेत्रों में प्राकृतिक जलस्रोतों में बरसात से पानी दूषित हो रहा है। जागरूकता के अभाव में ग्रामीण इसी पानी का पीने के लिए उपयोग कर रहे हैं। बरसात में दूषित पानी से बच्चों में सामान्य तौर पर रोटा वायरस की शिकायत अधिक हुई है। इसमें बच्चे को ठीक होने पर हफ्ते से अधिक समय लग सकता है।
एपिडामिनिलिजिस्ट डॉ. अनिला कौल के अनुसार बरसात के दौरान बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में वाटर वार्न बीमारियों से बचाव के लिए जागरूकता को बढ़ावा दिया जा रहा है। इसके लिए लोगों को दूषित पानी की पहचान कर उसे न पीने की सलाह दी जा रही है। मलेरिया और डेंगू से बचाव के लिए पानी को इकट्ठा न होने देने की हिदायत दी गई हैं। इसके अलावा पीएचई विभाग को पानी में जरूरी दवाई डालकर पेयजल की सप्लाई करने को कहा गया है। विभाग की ओर से चिनाब से सटे पलांवाला, अखनूर, परगवाल, फ्लाय मंडाल आदि बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में सतर्कता बरती जा रही है।
बचाव
- पानी को उबाल कर पीएं
- दुग्ध पदार्थों को सही तापमान में रखें
- नियमित उल्टी-दस्त को गंभीरता से लें
- अधिक उल्टी दस्त पर तत्काल पीड़ित को ओआरएस दें