सुरसा के मुंह की तरह बढ़ रही महंगाई ने आम लोगों की कमर तोड़ दी है। दाल की बात छोड़ दो, गरीबों की थाली से प्याज तक गायब हो गया है। सब्जी खाना तो सभी के बस का नहीं रहा। आसमान छूती महंगाई ने रसोई का बजट बिगाड़ दिया है। गृहणियों को हर सुबह और शाम तनाव रहता है कि आज क्या पकाया जाए।
सब्जियों के दाम इतने ऊंचे हो गए हैं कि खरीदना मुश्किल हो गया है। किचन से मटर और टमाटर नदारद है। आलू, प्याज से लेकर अदरक, लहसुन, अरबी, नींबू के भाव भी सिर चढ़कर बोल रहे हैं। हर सब्जी में टमाटर और अदरक का प्रयोग होता है, लेकिन दोनों ही रसोई से दूर हैं। टमाटर के दाम 50 रुपयों पर बने हुए हैं। अदरक और लहसुन दोनों ही 80 रुपये प्रति किलो से कम नहीं हो रहे हैं। मटर भी 70 रुपये प्रति किलो के हिसाब से मिल रही है।
हाल यह है कि लोग पहले जहां दो किलो सब्जी खरीदते थे, वहां अब पाव भर लेने को विवश हैं। 15 रुपये प्रति किलो मिल रही बंदगोभी के अलावा कोई भी सब्जी ऐसी नहीं है, जिसके दाम बीस रुपये से कम हों। शहर की कुछ गृहणियों से बात की गई तो उन्होंने कहा कि शाम को कई बार गली-मोहल्ले में बची हुई सब्जी बेचने जो आते हैं, उनसे कुछ सस्ती सब्जी मिल जाती है। यह सब्जी क्वालिटी में उतनी बढि़या नहीं होती है, लेकिन मजबूरी में खरीदना होता है।