फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

टमाटर हुआ लाल, करेला नीम चढ़ा

विज्ञापन
विज्ञापन
अप्रैल में बेमौसम बारिश से सब्जियों को हुए नुकसान का असर अब दिखने लगा है। सब्जियों के दाम आसमान छूने लगे हैं। भरी गर्मी में सब्जियों का चढ़ा पारा देख लोगों का पसीना छूटने लगा है। सब्जियां इतनी महंगी हैं, कि वह आम लोगों को तो आसपास फटकने भी नहीं दे रही हैं।
विज्ञापन


आलम यह है कि अप्रैल के आखिरी सप्ताह तक 25 से 30 रुपये किलो में बिकने वाला टमाटर अब 80 रुपये किलो पर जा पहुंचा है। भिंडी और बीन्स (फली) 50 से 60 रुपये किलो तो टिंडा, करेला भी 60 रुपये तक अपनी पहुंच बना ली है। कमल ककड़ी 100 से 120 रुपये किलो में बिकी तो टिंडा भी 50 से साठ रुपये किलो में बिका।

जम्मू के सब्जी विक्रेताओं की माने तो मार्च-अप्रैल में खराब मौसम से यहां की सब्जियों पर भारी असर पड़ा है। खासतौर से टमाटर को बड़ा नुकसान हुआ है। अब अधिकतर टमाटर बाहरी राज्यों से आ रहा है। मंडी में ही चालीस से पचास रुपये किलो टमाटर मिल रहा है। फुटकर में इसके दाम और बढ़ जाते हैं। टमाटर गर्मी के मौसम में जल्दी खराब होता है, इसलिए इसका दाम बढ़ गया है।
विज्ञापन

विज्ञापन

खरीदारों के उड़ रहे होश

मंगलवार को टमाटर का दाम 70 से अस्सी रुपये किलो था जो बुधवार को 80 रुपये किलो तक में बिका। पुरानी मंडी स्थित सब्जी मंडी में भिंडी 50 से 60 रुपये किलो में बिकी, करेला 50 से साठ रुपये बिका। बैंगन चालीस रुपये तो हाग साग 60 से 100 रुपये किलो में बिका। आलू जरूरी दस से पंद्रह किलो रुपये में बिक रहा है, जो आम लोगों के लिए राहत की बात है।

सब्जी मंडी में टमाटर का दाम पूछकर राकेश कुमार के होश फाख्ता हो गए। उन्होंने सब्जी विक्रेता से कहा कि वह सप्ताह पहले टमाटर चालीस रुपये किलो ले गए अब 60 से अस्सी कैसे हो गए।

सुनीता कुमारी ने कहा कि अब तो सब्जी भी आम आदमी से दूर हो गई हैं। आखिर क्या खाएं। आलू रोज रोज नहीं खाएं जा सकते। हर सब्जी करीब पचास रुपये किलो से अधिक में बिक रही है। गली-मोहल्लों के अलावा बड़ी दुकानों में तो दाम और भी मनमाने हैं।
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें