जम्मू-कश्मीर में शांतिपूर्ण चुनाव का श्रेय पाकिस्तान, हुर्रियत और आतंकवादियों को देने संबंधी सूबे के सीएम मुफ्ती मोहम्मद सईद के बयान मामले में सरकार संसद में बुरी तरह घिर गई है।
एकजुट विपक्ष ने इस मुद्दे पर न केवल प्रधानमंत्री की सफाई और बयान के खिलाफ निंदा प्रस्ताव की मांग करते हुए जबर्दस्त हंगामा किया बल्कि उसने केंद्र पर सत्ता के लिए राष्ट्रहित को कुर्बान करने का आरोप भी लगाया।
हालांकि, सरकार ने मुफ्ती के बयान से पल्ला झाड़ते हुए शांतिपूर्ण चुनाव का श्रेय सूबे के मतदाताओं, सेना और चुनाव आयोग को दिया। गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने इस दौरान मुफ्ती के उस बयान का भी खंडन किया, जिसमें कहा गया था कि उन्होंने अपनी इस राय से पीएम नरेंद्र मोदी को भी अवगत कराया था।
लोकसभा में सरकार के जवाब से असंतुष्ट एकजुट विपक्ष ने वाकआउट किया। राज्यसभा में भी सरकार को विपक्ष के भारी हंगामे के बीच सफाई पेश करनी पड़ी। इस बीच, पीडीपी के विधायकों ने संसद पर हमला मामले के दोषी अफजल गुरु के साथ अन्याय होने की बात कर विवाद को और हवा दे दी है।
अफजल की फांसी को न्याय के सिद्धांत के खिलाफ बताते हुए पार्टी ने उसका शव सौंपे जाने की मांग की है। मुफ्ती के बयान के खिलाफ कांग्रेस ने लोकसभा में प्रश्नकाल स्थगित करने और कार्यस्थगन प्रस्ताव का अलग-अलग नोटिस दिया था।