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कोरोना से जंग में एंड्राइड हथियार: कश्मीर के तीन सिख युवाओं ने बनाया ये एप, ऐसे काम करता है 'किरपा'

Thu, 03 Jun 2021 03:34 PM IST
प्रशांत कुमार अमृतपाल सिंह बाली, श्रीनगर

सार

श्रीनगर के रहने वाले बलजीत सिंह, बारामुला के रहने वाले अभयजीत और उरज ने श्रीनगर के एनआईटी से इंजीनियरिंग की है। अपनी पढ़ाई खत्म करने के बाद अब तीनों बेंगलुरू में रहते हैं। अभयजीत एक कॉलेज में प्रोजेक्ट असिस्टेंट हैं, जबकि बलजीत और उरज निजी सॉफ्टवेयर कंपनियों में सॉफ्टवेयर डेवलपर के तौर पर काम कर रहे हैं।
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बलजीत सिंह, अभयजीत सिंह, उरज सिंह - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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कश्मीर में कोरोना की जंग से निपटने के लिए सरकार के साथ कंधे से कंधा मिलाकर चलने के लिए कई स्वयंसेवी संथाएं सामने आईं हैं। लेकिन कई ऐसे भी कोरोना योद्धा हैं जो बैकग्राउंड में रहकर इन सभी कार्यों में प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से अपना योगदान दे रहे हैं। ऐसे ही कोरोना योद्धा हैं कश्मीर के रहने वाले तीन सिख युवा अभयजीत सिंह (25), बलजीत सिंह (25) और उरज सिंह (28)। इन्होंने एक एंड्राइड एप तैयार किया है।

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बलजीत ने अमर उजाला के साथ बातचीत में बताया कि कोरोना की महामारी शुरू होने के बाद से वह तीनों घाटी लौट आए थे और वर्क फ्रॉम होम कर रहे थे। इस बीच उन्होंने देखा कि कश्मीर में कोरोना के मरीजों की मदद के लिए सिख कोविड-19 वालंटियर्स की एक टीम दिन रात लोगों तक हर संभव मदद पहुंचा रही है। इसलिए उन्होंने ठान लिया कि वह एक ऐसा एप तैयार करेंगे जिससे स्वयंसेवी संस्था के काम में आसानी आएगी।

अभयजीत ने बताया कि उनकी टीम का नाम बैकयार्ड प्रोजेक्टस है और इन तीनों ने मिलकर एक एप तैयार किया जिसका नाम किरपा रखा। उन्होंने बताया कि उनकी इस एप के जरिये कोई भी कोरोना मरीज जिसे ऑक्सीजन कॉन्सेंट्रेटर, ऑक्सीजन सिलिंडर, ऑक्सीमीटर आदि की जरूरत होती है वो इस एप के जरिये अपनी डिमांड रख सकता है। एडमिन उस रिक्वेस्ट को अप्रूव कर उस सामान को या तो मरीज के किसी अटेंडेंट को देता है या किसी वालंटियर की ड्यूटी उस सामान को मरीज तक पहुंचाने की लगाई जाती है। 
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अभयजीत के अनुसार उनके द्वारा हाल ही में खाने का ऑप्शन भी ऐड किया है जिससे घरों या अस्पतालों में मरीज व उनके अटेंडेंट अपने खाने की डिमांड एप के जरिये दे सकते हैं। जिस तरह की डिमांड बनती है उसके अनुसार वह साथ-साथ एप में मॉडिफिकेशन लाते रहते हैं।

टीम के तीसरे सदस्य उरज सिंह ने बताया कि इस प्रोजेक्ट की शुरुआत पहले पिछले साल दिसंबर में की गई थी, लेकिन बीच में कोरोना संक्रमण कम हो गया, इसलिए वह रुक गए थे। लेकिन बाद में फिर से वायरस के फैलने के बाद उन्हें मार्च में फिर से काम करना शुरू किया और एक महीने के भीतर इस एप को पूरी तरह से इस्तेमाल करने के लिए तैयार कर दिया। इस बीच बलजीत ने यह भी बताया कि उन्हें अपने आप पर और अपनी टीम पर गर्व है कि वह भी कुछ योगदान दे पा रहे हैं। उन्होंने यह भी बताया कि वह भविष्य में अन्य कुछ प्रोजेक्ट्स भी शुरू करने जा रहे हैं।
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