पूरे जम्मू-कश्मीर राज्य के साथ-साथ राजोरी जिले में प्रकृति के प्रकोप के बाद अब पीड़ितों को सरकार की सुस्त कार्यप्रणाली से दो-चार होना पड़ रहा है। सैकड़ों परिवार अभी भी खुले आसमान के नीचे अपना समय बिता रहे हैं। प्रशासन न तो टेंट-कंबल और न ही खाने-पीने की वस्तुएं प्रदान करने में सफल हो पा रही है।
डीसी कार्यालय से प्राप्त जानकारी के अनुसार, जिले में बाढ़ और मूसलाधार बारिश से करीब 3300 कच्चे व पक्के मकान ढह गए हैं, लेकिन अभी तक प्रशासन के पास केवल 150 के करीब टेंट ही उपलब्ध हो पाए हैं। बाकी के सैकड़ों परिवार अभी भी खुले आसमान के नीचे अपना समय गुजारने पर मजबूर हैं। यहां तक कि रोज हो रही बारिश में भी लोगों के पास सिर छिपाने के लिए कोई जगह उपलब्ध नहीं है।
जिले की कालाकोट तहसील के मोगला, तरयाठ, कोटरंका तहसील के बुद्धल, समोट, फलनी, गब्बर, थन्नामंडी तहसील के पंगाई, मंगोटा, बहरोट, मंजाकोट तहसील के गंभीर मुगलां, सेरी हट्टां ऐसे क्षेत्र हैं, जहां बाढ़ ने सबसे अधिक तबाही मचाई है। इन क्षेत्रों में सैकड़ों पीड़ित परिवार पिछले एक हफ्ते से सरकार व प्रशासन की तरफ से मदद का इंतजार कर रहे हैं, लेकिन अभी तक इनके पास कोई राहत सामग्री नहीं पहुंच पाई है।
राजधानी मंजाकोट के सरपंच के तसदक हुसैन के अनुसार, राज्य सरकार और जिला प्रशासन की सुस्त कार्यप्रणाली के चलते अब लोगों में भूख से मरने की नौबत आ गई है। खाने-पीने के लिए कुछ भी उपलब्ध नहीं है। कोटरंका के सरपंच मनीर हुसैन ने राज्य सरकार के खिलाफ कड़ा रोष प्रकट करते हुए कहा कि अभी तक सरकार के एक भी मंत्री या उच्च प्रशासनिक अधिकारी ने क्षेत्र में दौरा कर बाढ़ पीड़ितों की सुध नहीं ली है।