कश्मीर में जबरदस्त ठंड के बावजूद रंगमंच एक ऐसी चीज है जिसने यहां के कला प्रेमियों में उत्साह पैदा कर रखा है। स्थानीय सिटी हाल में समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को पुनर्जीवित करने के उद्देश्य से जम्मू-कश्मीर कला, संस्कृति और भाषा अकादमी (जेकेएएसीएल) के सहयोग से एक्टर्स क्रिएटिव थिएटर (एसीटी) द्वारा आयोजित थिएटर शो का आनंद लेने के लिए बड़ी संख्या में लोग जुट रहे हैं।
सांस्कृतिक अकादमी के संपादक डॉ. फारूक अनवर मिर्जा बताते हैं कि कश्मीर की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित करना हमारी जिम्मेदारी है। रंगमंच कश्मीरी संस्कृति और परंपरा में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। हम इस तरह के आयोजनों के माध्यम से रंगमंच संस्कृति को संरक्षित करने की कोशिश कर रहे हैं।
एक कला प्रेमी शेख हसीन कहते हैं कि कोविड-19 के परिणामस्वरूप पिछले दो वर्षों से थियेटरों को बंद कर दिया गया था, लेकिन इस साल जैसे ही कोरोना की स्थिति में सुधार हुआ, अधिकारियों ने श्रीनगर के टैगोर हॉल में सांस्कृतिक गतिविधियों का आयोजन किया और लोग बड़ी संख्या में शो देखने के लिए पहुंचे। आज के युवा सोशल मीडिया जैसी चीजों में व्यस्त हैं। इसलिए संस्कृति को संरक्षित करने के लिए कश्मीरी जीवन पर आधारित और नाटक होने चाहिए।
थियेटर को व्यवस्थित किया जाए
रंगकर्मी बरकत कौर कहती हैं कि थिएटर के माध्यम से आयोजक कश्मीर के इतिहास और युवाओं को रंगमंच के महत्व के बारे में जागरूक करने का प्रयास कर रहे हैं। इसके अलावा थिएटर शो ने दो साल से मानसिक तनाव झेल रहे लोगों को तनाव घटाने में काफी मदद की है। रंगमंच लोगों के लिए तनाव दूर करने का साधन है। इसलिए थियेटर को व्यवस्थित करना चाहिए।