कश्मीर घाटी के पंपोर में केसर पार्क में केसर की इस बार टेस्टिंग और पैकेजिंग होगी। इसके बाद उच्च गुणवत्ता वाले केसर को विदेशों में निर्यात किया जाएगा। इसके अलावा देश में मांग के हिसाब से केसर की आपूर्ति होगी। ऑनलाइन ऑर्डर मिलने भी शुरू हो गए हैं।
हालांकि पहले किसान केसर को अपने स्तर पर ही बेचते थे। कई बार तो केसर दो-दो वर्षों तक किसानों के घरों में ही पड़ी रहता था। अच्छी जान पहचान रखने वाले किसान ही केसर को अच्छे दामों में बेच पाते थे। छोटे किसान 70 से 80 हजार में ठेकेदारों को बेच देते थे। ठेकेदार दोगुने मुनाफे में इसे आगे बेचता था।
कई बार कश्मीरी केसर की जगह कम गुणवत्ता वाली केसर बेच दी जाती थी। इस कारण कश्मीरी केसर की मांग घट रही थी। इस बार जीआई टैगिंग शुरू की गई है। इस कारण केसर को ऑनलाइन बेचा जा रहा है। अब पार्क में केसर आएगा। इसकी अच्छी तरह से पैकेजिंग कर विदेशों में भेजा जाएगा। टेस्टिंग में घटिया गुणवत्ता वाला केसर अलग कर दिया जाएगा।