मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती ने आतंकियों को खरी-खरी सुनाते हुए साफ कर दिया कि ऐसे हमले और हत्याएं हमारा रास्ता नहीं रोक सकते। मुख्यमंत्री बीएसएफ के शहीद जवानों को श्रद्घांजलि अर्पित करने के लिए जम्मू में अपने तय कार्यक्रमों को रद्द कर शनिवार को श्रीनगर के हुमहामा स्थित सीमा सुरक्षा बल के फ्रंटियर मुख्यालय में पहुंचीं।
अनंतनाग जिले में शुक्रवार को आतंकी हमले में शहीद हुए जवानों के परिवारों के प्रति संवेदना व्यक्त करते हुए महबूबा ने कहा कि बीते दो दशक में सैकड़ों नागरिक, सुरक्षा बलों के जवान, पुलिसकर्मी और आतंकी मारे गए हैं। इस तरह के हमलों से कश्मीरी अवाम का दर्द बढ़ा है। इन हमलों ने दुख और दर्द का लंबा सिलसिला पीछे छोड़ा है।
उन्होंने स्पष्ट किया कि ऐसे हमले सरकार को रियासत में शांति बहाल करने और लोगों का दर्द कम करने के मकसद को पूरा करने के लिए आगे बढ़ने से नहीं रोक सकते। मुख्यमंत्री ने आतंकी हमलों को शांति प्रक्रिया में खलल की साजिश करार दिया। उन्होंने अनंतनाग बस स्टैंड पर आतंकी हमले की भी कड़ी निंदा की।
बंदूक और ग्रेनेड से किसी राजनीतिक समस्या का हल नहीं हो सकता
विधानसभा में बोलतीं महबूबा मुफ्ती
- फोटो : Nikhil Mehta
महबूबा ने कहा कि कुछ तत्वों को यह समझ क्यों नहीं आता कि हिंसा से किसी मसले का हल नहीं होता। इससे और मसले तैयार होते हैं। कमजोर लोग हिंसा का रास्ता चुनते हैं और निर्दोषों की हत्याएं करते हैं। उन्हाेंने कहा कि खूनखराबा करने वालों को समझना होगा कि बंदूक और ग्रेनेड से किसी राजनीतिक समस्या का हल नहीं हो सकता।
हिंसा इंसानियत के खिलाफ है। इसका एक सुर में विरोध होना चाहिए। जो जवान अपनी ड्यूटी का निर्वाह कर रहे हों, उन निर्दोष जवानों को क्यों अपनी जान गंवानी पड़ती है। महबूबा ने विपरीत हालात में संयम बरतने और आम लोगों को नुकसान न हो इसका ख्याल रखने के लिए सुरक्षा बलों की सराहना की।
डीजी बीएसएफ केके शर्मा, डीजीपी के राजेंद्रा, आईजी सीआरपीएफ अतुल करवाल, आईजी क्राइम मुनीर अहमद खान, आईजी कश्मीर जोन एसजेएम गिलानी, आईजी बीएसएफ विकास चंद्रा आदि अधिकारियाें ने भी शहीदों को श्रद्धांजलि दी।